कटनी - बालकों के विरूद्ध लैंगिक अपराधों की रोकथाम हेतु जागरूकता एवं सजगता अत्यंत आवश्यक है। इसी दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण पॉक्सो अधिनियम 2012 एवं किशोर न्याय अधिनियम 2015 पर जिला स्तरीय अंतर्विभागीय कार्यशाला का आयोजन होटल उर्वशी में किया गया।कार्यशाला का शुभारंभ महिला सशक्तिकरण अधिकारी कटनी वनश्री कुर्वेती द्वारा पॉक्सों अधिनियम की पृष्ठभूमि, बाल मित्र प्रावधानों एवं भार साधक व्यक्तियों के उत्तरदायित्वों पर प्रकाश डालकर किया गया। तत्पश्चात् संरक्षण अधिकारी मनीष तिवारी द्वारा लघु फिल्म एवं पावर पाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पॉक्सो अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों, यथा अपराध, प्रावधानित सजा, चिकित्सा परीक्षण, बालक की निजता का अधिकार आदि पर विस्तृत रूप से जानकारी दी गई।कार्यशाला में जिला संयोजक आदिम जाति विभाग सरिता नायक द्वारा बालक एवं बालिका दोनों को सुरक्षित सामाजिक वातावरण देने पर जोर दिया गया। सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास शिवेन्द्र चन्द्रवार द्वारा बताया गया कि बच्चों को गलत स्पर्श पर विरोध करना सिखाये। परियोजना अधिकारी सतीश पटेल एवं इन्द्रभूषण तिवारी द्वारा बाल सुरक्षा का संदेश प्रत्येक घर तक पहुंचाकर इस जन आंदोलन बनाने की अपील की गई। अध्यक्ष बाल कल्याण समिति शैला तिवारी द्वारा परिवार को समाज की धुरि बताते हुए संयुक्त परिवार को बाल संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण बताया गया। कार्यशाला के अंत में महिला सशक्तिकरण अधिकारी वनश्री कुर्वेती द्वारा आभार प्रदर्शन करते हुये प्रतिभागियों को चाईल्ड हेल्पलाईन टोलफ्री नंबर 1098, पॉक्सों ईबॉक्स एवं गुड टच बैड टच के बारे में बताया गया। कार्यशाला में परियोजना अधिकारी मीना बड़कुल, रविशंकर पाण्डेय, संतोष अग्रवाल, सुषमा नाग, अंजू पोर्ते, संरक्षण अधिकारी शैलेन्द्र मार्को, शैलजा पाण्डेय, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षा एवं आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों के अधीक्षक, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस ईकाई के सदस्य, बाल देख-रेख संस्थाओं के कर्मचारी, चाईल्ड लाईन प्रतिनिधि, बाल कल्याण समिति सतना के सदस्यों की उपस्थिति रही।


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