अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर रिपोर्ट 2019 जारी की है जिसमें चैप्टरवाइज देशों की धार्मिक स्वतंत्रता पर चर्चा की गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ द्वारा जारी इस रिपोर्ट में भारत को भीड़ हिंसा, धर्म परिवर्तन और देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के अल्पसंख्यक दर्जे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं।

मोब लिंचिंग पर इतनी खामोशी क्यों सरकार मोब लिंचिंग को रोकने के लिए क्यों नहीं बना रही है कानून कब तक मारा जाएगा निर्दोष कब तक चलेगा यह कृत्य यह सरेआम हत्याएं इस देश की एकता और अखंडता प्रेम और सद्भाव लोकतंत्र की हत्या नही है

मोब लिंचिंग के नाम पर खमोशी। मोब लिंचिंग के नाम पर फिर मारा गया तबरेज।   इस तरीके की घटनाओं से पैरों तले से जमीन खिसक रही है। लोगों के अंदर एक  डर  खौफ भय दिख रहा है । ऐसे में सरकार को बड़ा कदम उठाने की आवश्यकता है।

 यह कैसे हो सकता है कि राम के नाम पर एक इंसान का कत्ल हो जाये? यह मुसलमान का कत्ल नहीं इंसानियत का कत्ल है।

मुसलमान तो छोड़िए, यदि वह चोर भी था तो उसको मारने का अधिकार कहाँ से मिल गया?

ये भारत है या कोई कबीलाई संस्क्रति वाला देश ?

 इस देश में हर एक व्यक्ति को स्वतंत्रता है कि वह अपने धर्म अपने समाज के रीति रिवाजों को मानते हुए स्वतंत्रता से देश में रहे।

 समाज के अंदर देश के अंदर ऐसी भावनाएं उत्पन्न हो रही हैं, जो जाति धर्म को आपस में बांट रहे हैं 

तबरेज अंसारी की मौत से खाली मुसलमान दुखी नहीं है, बल्कि हर वह व्यक्ति दुखी है जो इन घटनाओं को देख रहा है।

 कुछ ऐसी घटनाएं हैं जिन्हें पुष्टि करने के लिए आवश्यकता नहीं है।

 साक्षात वीडियोस दिख रही हैं कि कुछ असामाजिक तत्व उन्हें जबरन जय श्री राम बोलवाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या इस देश में ऐसे पहले कभी हुआ है?

 मॉब लिंचिंग इस देश के लिए घातक है। किसी एक व्यक्ति को चारों तरफ से घेर के और अपने मंशा अनुसार किसी चीज का नारा  लगाने के लिए उसे मारा जाए?

 बल्कि चाहिए तो यह की अपने प्रेम सद्भाव विचारधारा से लोगों को मायल करें कि वह खुशी से उस नारे का समर्थन करें ।

जिस देश की भजन संध्या में  मुस्लिम के गाए हुए भजन मंदिरों में बजाए जाते थे।

 आज उनके वंशज हाहाकार मचा रहे है 

हमारा सम्माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से आग्रह है कि मोब लिंचिंग की घटनाओं पर कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान किया जाए ।
वह चाहे किसी भी जाति धर्म संप्रदाय का व्यक्ति करें ।

धर्म और राजनीति के नाम पर हो रही घटनाओं से भारतीय जनता पार्टी का और उसकी विचारधारा का गलत इस्तेमाल हो रहा है और इन घटनाओं पर प्रतिबंध लगना अति आवश्यक है

पुरानी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप तो सिद्ध नही हो सके, लेकिन उस भुलावे में पैसे की चोरी बचाने के चक्कर मे हमने अपनी जान को जोखिम में डाल दिया, लगता है।

राज्य सरकार ने मुस्लिम प्रथाओं और संस्थानों को प्रभावित करने वाले निर्णय लिए हैं। सरकार ने मुस्लिम शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इससे पाठ्यक्रम संबंधी निर्णयों और भर्ती की स्वतंत्रता प्रभावित होगी। देश में मुस्लिम नाम वाले शहरों के नाम बदलने की भी बात कही गई है। इसमें सबसे प्रमुख इलाहाबाद को प्रयागराज करना शामिल है।

इसमें कहा गया है कि प्रशासन गौरक्षकों के हमलों को रोकने में असफल रहा है। इसमें भीड़ हिंसा, लोगों को डराने-धमकाने और लोगों की हत्या तक शामिल है।


रिपोर्ट में पाकिस्तान में भी धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को उठाया गया है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने आसिया बीबी की रिहाई के बाद शुक्रवार को पाकिस्तान से कहा कि ईशनिंद कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए और अधिक कदम उठाए। आसिया बीबी को ईशनिंदा के एक मामले में मौत की सजा दी गई थी, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था। यह मामला विश्वभर में चर्चा में रहा था।

कितने शर्म की बात है कि भारत जो गांधी मदर टेरेसा की भूमि का यह हाल है।
 महात्मा गांधी के जन्म दिवस 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस माना गया है।

आज वर्ल्ड बैंक में हम विकासशील देशों की सूची में डाल दिए गए और सामाजिक न्याय व्यवस्था में कट्टर पाकिस्तान  वाली लिस्ट में।

भारत के युद्ध महाकाव्य महाभारत में भी 3 बार अहिँसा का महिमामंडन करते हुए इसे परम् धर्म कहा गया है।

जिस भारत भूमि से जैन धर्म की उतपत्ति हुई जो मन कर्म वचन से किसी भी प्राणी मात्र के प्रति अहिंसा पर आधारित है, उस भूमि पर यह रक्त पात अमिट कलंक लगाता है।

वर्तमान सरकार संविधान की रक्षा करने में विफल होती दिख रही  है।
लोगों की आत्मा के साथ पुलिस एवं कानून व्यवस्था तंत्र मर गया सा लगता है।

सार्वजनिक स्थल पर किसी व्यक्ति को 7 घण्टे तक मारा, किसी को खबर नहीं। न पुलिस आई न मदत। 

इस तरह के व्यवहार पर लगाम लगाने की जरूरत है।
एक बार पाप व्यवहार में आ गया तो राक्षस के लिए क्या हिन्दू क्या मुसलमान।

 एक ग्रुप से लिए गए कुछ समाजसेवियों के विचार

मॉब लिंचिंग इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटनाएं है, भला छोटे से गुनाह के बदले इतनी भयानक मौत कहा तक उचित हो सकती है।मै तो इसे इंसानियत/मानवता पर धब्बा मानता हूँ।
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गोकुल पटेल,जिला कटनी

इस देश में राम अब साध्य नहीं साधन है, आस्था नहीं आक्षेप (कटाक्ष) है, अब राम कत्ल का सबब है बहाना है।
सब भक्त राम की दुर्गति में लगे हैं खुद की सुगति की अपेक्षा में।
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परवाला राविन्द

प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी सिर्फ यही कारण सबसे ज्यादा है बाकी भी कारण है पर समाज में ऐसी विसंगतियों विसंगतियां होना आम बात है प्रशासनिक व्यवस्था लचर है इसलिए हत्यारों के हौसले बढ़े हुए हैं

मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है क्या मेरे हक में फैसला देगा
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तारिक़ हुसैन


       लेखक 
अब्दुल कादिर खान 
 कलयुग की कलम  
मोबाइल नंबर 97536 87489


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