बीना  :  दो फीट जमीन को लेकर हुए विवाद में परिवार के 5 लोगों की हत्या कर दी गई। शख्स और उसके दो बेटों ने छोटे भाई के परिवार पर 12 बोर की लाइसेंसी बंदूक से अंधाधुंध गोलियां चलाईं। गोली लगने से दो भतीजों, एक भतीजे की पत्नी और पुत्र की मौत हो गई। बहन ने अस्पताल में दम तोड़ा। घटनास्थल से पुलिस को चलाए गए 9 कारतूस मिले हैं।
एसडीओपी डीआरएस चौहान ने बताया कि गणेश वाॅर्ड स्थित शंकर माली की टपरिया में रहने वाले परिवार में जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। शुक्रवार रात करीब पौने 9 बजे भी जमीन को लेकर परिवार में बहस हुई। तैश में आकर मनोहर अहिरवार एवं उसके दो पुत्र प्रवीण अहिरवार व प्रशांत अहिरवार ने 12 बोर लाइसेंसी बंदूक से फायरिंग कर दी। इसमें मनोज (42) पिता राजाराम अहिरवार, उसका भाई संजीव (35), संजीव की पत्नी राजकुमारी (28) व पुत्र यशवंत (10) की मौके पर मौत हो गई। आरोपी मनोहर की बहन ताराबाई (70) पत्नी भैयालाल को गोली लगने पर सागर रैफर किया गया, लेकिन उन्होंने रास्ते में दम तोड़ दिया। पुलिस ने आरोपी मनोहर को बंदूक सहित गिरफ्तार कर लिया है।

दो फीट जमीन के पीछे हत्या
थाना प्रभारी अनिल मौर्य ने बताया कि आरोपी एवं मारे गए लोग एक ही जगह रहते थे। आरोपी के घर के पीछे उसके नाम सरकारी पट्टे की जमीन है, जिस पर मृतकों का कब्जा था। इस जमीन में से वह दो फीट जमीन घर की मरम्मत करने के लिए मांग रहा था। इसके लिए उसने बहन ताराबाई को भी समझाने के लिए भेजा था। इसी बात पर विवाद हो गया और मामला यहां तक पहुंच गया।

लाइसेंसी बंदूक से किए फायर
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि सबसे पहले गोली संजीव अहिरवार को लगी। इसके बाद उसकी पत्नी राजकुमारी, फिर बड़े भाई मनोज एवं सबसे आखिर में संजीव के बेटे यशवंत को गोली लगी। इस कारण सभी की मौके पर ही मौत हो गई। ताराबाई को गोली कब और कहां लगी, इसकी जानकारी नहीं है। थाना प्रभारी ने बताया कि लाइसेंसी बंदूक मनोहर अहिरवार के नाम है, जो लोकसभा चुनाव के दौरान थाने में जमा थी। इस बंदूक को आरोपी दो दिन पहले बुधवार को थाने से लेकर गया था।

गुरुवार को ही परिवार ने मनाया था मनोज का जन्मदिन
मृतक मनोज का गुरुवार को जन्मदिन था। परिवार ने हंसी-खुशी के साथ मनाया। मनोज के भानेज सौरभ ने खून से सने हाथ दिखाते हुए कहा- मैं जी के क्या करूंगा। मनोहर को मार डालूंगा या खुद मर जाऊंगा।

कर्ज ने बनाया हत्यारा
बताया जा रहा है कि आरोपी मनोहर पर कर्ज था। वह जमीन हासिल कर उसे बेचना चाहता था, ताकि वह कर्ज चुका सके। लेकिन, परिवार के लोग जमीन देने को तैयार नहीं थे। शुक्रवार की रात बहन ताराबाई उसे समझाने गई थी, तभी विवाद हो गया और मनोहर ने अपनी बंदूक से फायरिंग कर दी।
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