India fights back

भीड़ हत्या या मॉब लिंचिंग पूर्वचिन्तित बिना किसी व्यवस्थित न्याय प्रक्रिया के, किसी अनौपचारिक अप्रशासनिक समूह द्वारा की गई हत्या या शारीरिक प्रताड़ना को कहा जाता है। कथित शब्द का उपयोग अक्सर एक बड़ी भीड़ द्वारा अन्यायिक रूप से किसी कथित अपराधियों को दंडित करने के लिए या किसी समूह को धमकाने के लिए, सार्वजनिक हत्या, या अन्य शारीरिक प्रताड़ना को चिह्नित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

भारत मे लोकतंत्र पर भीड़ तंत्र के हावी होते ही जून में 5 बड़ी मोब लीनचिंग की घटनाएं सामने आई।

जहां इस विषय पर सरकार की खामोशी हैरान कर देने वाली है।
वहीं सरकार का केवल इतना कहना है कि इसको राजनैतिक रंग न दिया जाए।

मोब लीनचिंग को ले कर जहां राजधानी में जंतर मंतर से लेकर राज भवन तक प्रदर्शन किया जा रहा है। वहीं दक्षिण, सुदूर पुर्वी क्षेत्र औऱ गुजरात में भी जनता मोब लीनचिंग के ख़िलाफ़ सड़कों पर आ गई है।

महिला, पुरुष, बच्चे, बूढ़े, गरीब या सभ्रांत वर्ग के लोग हों, सभी सार्वजनिक तौर पर मोब लीनचिंग का विरोध कर रहे हैं।

वहीँ हाल ही में हुई तबरेज़ की मोब लीनचिंग पर 'पायल रोहतगी' का कहना है कि, क्या आप जानते हैं वह एक चोर था?

देश मे 5 साल में ऐसी 48 मौतें रिपोर्ट हुई हैं। जो रिपोर्ट नही हुई या जहां मृत्यु नही हुई उन मामलों को हटा भी दे तो आंकड़े चिंताजनक हैं।

ऐसी घटनाएं हिन्दू ओर मुस्लिम, दोनों समुदाय के लोगों के साथ हुई है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी एकरिपोर्ट में खुलकर मोदी सरकार की आलोचना की। इसमें कहा गया है कि पिछले कुछ सालों के दौरान भारत में गोरक्षा के नाम पर अल्पसंख्यकों पर हिंदू संगठनों ने हमले किए। 2015 से 2017 के बीच देश में साम्प्रदायिक घटनाएं 9% बढ़ गईं।

गृह विभाग के हवाले से विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने रिपोर्ट में कहा है कि 2015 से 2017 के बीच भारत में साम्प्रदायिक घटनाओं में 9% वृद्धि हुई। 2017 में ऐसी 822 घटनाओं में 111 लोगों की जान गई और 2384 जख्मी हुए।

इस रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की मुस्लिम लड़की के साथ अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले का जिक्र भी है।

जो भी हो, अगर ऐसी ही चलता रहा तो सोचना होगा कि क्या अगला नम्बर मेरा है?

फिलहाल,

छत्तीसगढ़ में उन्मादी हिंसा के शिकार लोगों को राज्य सरकार मुआवज़ा देगी. उम्मीद जताई जा रही है कि मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं में घायल होने या मारे जाने की स्थिति में लोगों को इससे बड़ी राहत मिलेगी.

मॉब लिंचिंग पर कमलनाथ सरकार बनाने जा रही है कड़ा कानून, अब होगी 5 साल की जेल


गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग को रोकने के लिए मध्य प्रदेश सरकार कड़ा कानून बनाने जा रही है. इस कानून के तहत खुद को गोरक्षक बताकर हिंसा करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
 गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग को रोकने के लिए मध्य प्रदेश सरकार कड़ा कानून बनाने जा रही है. इस कानून के तहत खुद को गोरक्षक बताकर हिंसा करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. सरकार ये संशोधित विधेयक विधान सभा के मानसून सत्र में पेश कर पारित कराना चाहती है. अगर विधेयक पारित होता है तो मध्य प्रदेश में इस तरह के मामलों के लिए अलग से कानून बन जाएगा.

अभी क्या है कानून

मध्य प्रदेश में अभी जो कानून लागू है, उसके तहत गोवंश की हत्या, गोमांस रखने और उसके परिवहन पर पूरी तरह रोक है. इसमें गोवंश के नाम पर हिंसा या मॉब लिंचिंग का जिक्र नहीं है.

संशोधित कानून कैसा होगा

संशोधन के बाद अब कोई व्यक्ति गोवंश का वध, गोमांस और गोवंश का परिवहन, मांस रखना या सहयोग करना या इसके अंतर्गत कोई हिंसा या क्षति नहीं करने पर पांच साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान होगा.

हिंदुस्तान बना 'लिंचिस्तान'!

देश में कभी चोरी तो कभी गाय के नाम पर हिंसा के मामले में आए दिन मामले सामने आते रहते हैं. अभी हाल ही में झारखंड के सरायकेला खरसावां में चोरी के शक में गुस्साई भीड़ ने एक युवक को इतना पीटा की उसकी मौत हो गई. युवक की पहचान तबरेज अंसार के रूप में हुई. तबरेज की उम्र 22 साल थी और उसने इलाज के दौरान दम तोड़ा था.

झारखंड देश का इकलौता राज्य नहीं है जहां मॉब लिंचिंग की घटना हुई हो. पिछले कुछ सालों में हिंदुस्तान में कई लिंचिस्तान बन गए हैं. इनमें प्रमुख हैं - उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, गुजरात और राजस्थान. मॉब लिंचिंग में देश में जितने लोग मारे गए उनमें से 7 फीसदी महिलाएं भी हैं.


गोरक्षा के नाम पर सबसे ज्यादा मॉब लिंचिंग

देश में 2009 से 2019 तक हेट क्राइम के 287 बड़े मामले हुए हैं. इनमें 98 लोगों की मौत हुई है, जबकि 722 लोग जख्मी हुए हैं. इनमें सबसे ज्यादा 59% मुस्लिम, 14% हिंदू और 15% ईसाई हैं. सबसे ज्यादा 28% हमले गोरक्षा के नाम पर, 13% हमले दो धर्म के लोगों में प्रेम प्रसंग पर, 9% धार्मिक हिंसा और 29% हमले अन्य कारणों से हुए. गोरक्षा के नाम पर ही सबसे ज्यादा मॉब लिंचिंग मामले सामने आए हैं. 2014 से अब तक पूरे देश में 125 मामले सामने आए हैं. इन मामलों में 48 लोगों की मौत हुई. जबकि 252 लोग घायल हुए हैं. (स्रोत- सभी आंकड़े फैक्टचेकर डॉट इन और इंडियास्पेंड से.)

आखिर होती क्यों है मॉब लिंचिंग?

लोगों के चोरी, गोरक्षा, मान-सम्मान और धर्म के नाम पर भड़काया जाता है. आजकल इसका सबसे बड़ा माध्यम है सोशल मीडिया. भड़की हुई भीड़ बहुत जल्द गुस्सा हो जाती है. यही गुस्साई भीड़ हत्यारी बन जाती है. ऐसी भीड़ यह नहीं देखती कि पीड़ित किस काम से आया है. ये भीड़ तर्कहीन होती है. विवेकहीन होती है. इसीलिए असम में मछली पकड़ने गए दो युवकों को मार दिया जाता है. झारखंड में मॉब लिंचिंग की हर साल खबर आती है. दादरी कांड जहां अचानक भीड़ ने अखलाक के खुशहाल परिवार को शक के बिना पर मार डाला.

कई मामले हैं, हिन्दू मुस्लिम महिला पुरूष का भेद किए बगैर जो अभी का मामला है केवल उसी के बारे में लिखा है।

बहुत हैं सज्दा-गाहें पर दर-ए-जानाँ नहीं मिलता ।

हज़ारों देवता हैं हर तरफ़ इंसाँ नहीं मिलता ।।

छत्तीसगढ़ में राहत और मध्यप्रदेश में मोब लीनचिंग रोकने के लिए कानून बनाए जाने के अलावा इस बार एक अच्छी बात यह दिखी की हिन्दू इस घटना के विरोध में श्री राम जी को भी शामिल कर रहे हैं।

मोब लीनचिंग के विरोध में एक नारा यह भी है : NOT IN MY NAME

मेरे नाम पर नहीं ‼






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