#हरदोई : क्षेत्र पंचायत की सियासत में भाजपा बनाम भाजपा का शुरू हुआ द्वंद्व

साल भर पहले अधिकृत प्रत्याशी बतौर बने प्रमुखों को पैदल करने का शुरू हुआ दंद-फंद

#कद्दावर_नेता के निशाने पर बावन व अहिरोरी, बिलग्राम में आशू कर रहे जोरा-जोरी

बावन प्रमुख समीर सिंह के विरुद्ध आज शाम अविश्वास प्रस्ताव पेश करने की तैयारी


लखनऊ और दिल्ली की गद्दी पर आसीन भाजपा जिले में असहज हालात से दो-चार होने जा रही है। लोकसभा चुनाव में दोनों सीटें जीतने के बाद क्षेत्र पंचायतों की राजनीति में उथल-पुथल की तस्वीर बनती साफ़ दिख रही है। 19 क्षेत्र पंचायतों में फ़िलहाल 03 में हलचल बढ़ गई है। पिछले साल की मार्च में राजनीतिक मौसम विज्ञानी नरेश अग्रवाल के भाजपा में जाने के साथ ही साफ़ हो गया था कि हरदोई का राजनीतिक मौसम देर-सबेर सही, पर बदलेगा। मानसून की दस्तक के साथ सदर संसदीय क्षेत्र की 02 क्षेत्र पंचायतों की राजनीति पर 'बदलाव के बादल' मंडराने लगे हैं।

सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिले में भी पंचायतों की राजनीति पर सत्ता पक्ष ने पकड़ बनाने की कवायद शुरू कर दी थी। सबसे पहले जिला पंचायत अध्यक्ष को टारगेट किया गया था। बिलग्राम-मल्लावां विधायक आशीष सिंह 'आशू' की अगुवाई में अध्यक्ष को शासन से मुअत्तल करा 03 सदस्यीय संचालन समिति गठित करा दी गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने अध्यक्ष मीरा अग्रवाल को बहाल कर दिया था। बाद के दिनों में नरेश अग्रवाल संग मीरा भी भाजपा के भजन भजने लगीं और खुद को पूरे कार्यकाल के लिए महफूज कर लिया। क्षेत्र पंचायतों में सबसे पहले टड़ियावां प्रमुख बंसीलाल और अहिरोरी प्रमुख आकाश वर्मा ने अविश्वास प्रस्ताव के आसार देख इस्तीफा दे दिया था। बिलग्राम, टोडरपुर, बावन और पिहानी में प्रमुखों के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष श्री कृष्ण शास्त्री के निर्देशन में प्रस्तुत होने के बाद पारित हो गए थे।

बाद में बिलग्राम, टड़ियावां, पिहानी व बावन में निर्विरोध और टोडरपुर व अहिरोरी में वाया चुनाव भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार प्रमुख पद पर निर्वाचित हुए थे। सबसे ज़्यादा चर्चा जाहिर ही बावन के तख्तापलट की हुई थी, इसलिए कि वहां समीर सिंह ने कद्दावर नेता नरेश अग्रवाल की किलेबन्दी ध्वस्त की थी। लेकिन, कुछ ही समय बाद नरेश अग्रवाल भाजपा में दाखिल हो गए और साथ ही बावन सहित कुछ अन्य क्षेत्र पंचायतों में प्रमुखों के बे-दखल होने की चर्चा शुरू हो गई थी। खासकर, ब्लॉक की एक बैठक के दौरान सदर विधायक नितिन अग्रवाल और प्रमुख समीर सिंह के बीच हुई तकरार के बाद चर्चाओं को पर लग गए थे। अग्रवाल ने अहिरोरी में सदर सांसद जय प्रकाश के कन्धे का इस्तेमाल कर और बावन में सीधे ही निशाना साध दिया। जय प्रकाश के पत्र लिखने के बाद डीएम ने अहिरोरी प्रमुख शिव रतन के विरुद्ध कथित अनियमितताओं की जांच को कमेटी गठित की है।

वहीं, कल नरेश अग्रवाल के जनपद प्रवास के दौरान उनके आवास पर भारी गहमागहमी से अंदाजा लग गया था कि बावन प्रमुख पर जल्दी ही अविश्वास प्रस्ताव का प्रहार हो जाएगा। इसका अंदाजा समीर को भी हो गया था और भाजपा में उनके हितैषी नेताओं ने कल ही पारुल दीक्षित के आवास पर बैठक कर उत्पन्न संकट से निपटने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया था। बैठक में एक विधायक भी पहुंचे थे। समीर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव अग्रवाल के लखनऊ रवाना होने के अगले ही दिन लाया जाएगा, उसका अंदाजा कम लोगों को ही रहा होगा। बहरहाल, बताते हैं शांति देवी धर्मशाला में इस वक़्त कोई 07 दर्जन बीडीसी सदस्य मौजूद हैं और ये संख्या अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के लिए पर्याप्त बताई जा रही है। सुनवाई है, प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए डीएम पुलकित खरे ने शाम 05 बजे का समय दिया है। सदर विधायक नितिन अग्रवाल आवास पर मौजूद रह कर सिपह-सलारों को दिशा-निर्देश दे रहे हैं।

भाजपा जिला नेतृत्व तस्वीर से तिरोहित है। यहां पार्टी नेतृत्व से निराश और वैटगंज में गतिविधियां शुरू होने के बाद समीर के लखनऊ पहुंचने की खबर है। बताया जा रहा कि समीर पार्टी के आला पदाधिकारियों से मिल कर डैमेज कण्ट्रोल की कोशिश में हैं। उन्हें पार्टी की प्रदेश कमान से क्या कुछ आश्वासन मिला है, कोई खबर फ़िलहाल नहीं है। इधर, बावन प्रमुख के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव (भाजपा बनाम भाजपा) को लेकर पार्टी के गलियारों में ज़र्द सन्नाटा पसरा है। जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्र नीरज से सम्पर्क करने पर उनके दोनों कॉन्टेक्ट नम्बर 'आउट ऑफ़ नेटवर्क कवरेज एरिया' मिले। निवर्तमान जिलाध्यक्ष श्री कृष्ण शास्त्री ने अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत होने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया देने की बात कही। सियासी गलियारों में लोग फिलवक्त इंतज़ार 05 बजने का कर रहे हैं।
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