सरकारी अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए न बिस्तर है और न दवाइयां : अमित जोगी 

स्टेट हेड -अशोक श्रीवास्तव 

रायपुर। बिलासपुर जिले के मरवाही में मलेरिया और टाइफाइड फैल गया है। इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में मरीजों का न तो बेहतर इलाज हो रहा है और न दवाइयां मिल रही है न ही बिस्तर है। मरवाही की जनता की परेशानी की सूचना पर छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के प्रमुख अजीत जोगी ने अपने बेट अमित जोगी को जनता का हालचाल जानने के लिए स्वास्थ्य केंद्र भेजा। यहां स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल देखकर अमित जोगी भड़के गए। अमित जोगी ने कहा कि न तो यहां इलाज हो रहा है और न दवाइयां मिल रही है, जनता परेशान हैं।

मरवाही क्षेत्र में फैले मलेरिया, टाइफाइड बुखार पर शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराने और मरवाही की संतोषी गौड़ की मृत्यु जाने के बाद मरवाही के पूर्व विधायक छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के नेता अमित जोगी, लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ मरवाही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर धरने पर बैठ गए। टायफाइड एवं मलेरिया से पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ने एवं स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के विरोध में 4 घण्टे काली पट्टी बांध कर धरना प्रदर्शन किया। अमित जोगी ने 10 सूत्री मांगों के साथ ज्ञापन सौंपा। इसमें बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ पीड़ित परिवार को 10 लाख  मुआवजे की मांग की। उन्होंने अल्टीमेटम दिया कि 10 दिनों के भीतर मांग पूरी नहीं होने पर मुख्यमंत्री निवास के बाहर मरवाही की जनता के साथ प्रदर्शन करेंगे।
इधर मंगलवार को हालत का जायज लेने सीएमएचओ और कलेक्टर भी पहुंचे थे। जिला कलेक्टर ने मरवाही में सभी को मलेरिया, टाइफाइड ना होकर लू पीड़ित होना बता दिया।
अमित जोगी ने जिला कलेक्टर के मंगलवार को दिए बयान पर हमला करते हुए कहा कि एसी कमरों में बैठकर अधिकारी यहां लू से लोगों के बीमार होने की बात कह रहे हैं। जबकि अस्पताल में एक ही परिवार के तीन—तीन लोग टाइफाइड से ग्रसित हैं। इसका चिकित्सक प्रमाण है, यह पानी जिसे आप दूषित नहीं मानते अगर दूषित नहीं है तो कैसे लोग बीमार हो रहे हैं। मैं हेपेटाइटिस बी से पूर्व में पीड़ित होने के बावजूद इस पानी को पी रहा हूं और अपनी जान जोखिम में डाल रहा हूं और यह पानी मुख्यमंत्री को भी दूंगा। उन्होंने कहा कि न ही ये  फ्लू है ना यह लू है बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही की बू है। विधायक धर्मजीत सिंह ने साफ कहा कि यदि प्रशासन का कहना है कि मौत मलेरिया, टाइफाइड से ना होकर लू से हुई है तब भी उनका दायित्व है कि उसका इलाज किया जाता, अब मौत हुई है तो यह लड़ाई सदन तक जरूर जाएगी
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