आकाश ने अफसर को पीटकर अपने नंबर कम किये  ?


विधायक आकाश विजयवर्गीय ने जर्जर मकान तोड़ने गये निगम अफसरो को बल्ले से पीटा अफसरो ने मुकदमा दर्ज कराया कोर्ट ने जेल भेज दिया घटना घोर निंदनीय है  टीम के मुखिया यानी आकाश को अपने गुस्से पर काबू रखना था यदि कप्तान ( नेता) खुद ही गुस्से में रहेगा तो भीड़ को कैसे शांत करेगा? यदि समर्थक उग्र हो जाते और निगम अफसरो को ज्यादा लग जाती या अपने नेता को इस तरह अफसर को पीटते देख भीड़ ज्यादा उत्तेजित हो जाती और किसी की मौत अटैक ,पिटाई या और कारण से हो जाती तो पुलिस की किंतनी धाराएं बढ़ती? राजनीतिक कैरियर चौपट पिता का नाम खराब ! जिस उचाई पर कैलाशविजयवर्गीय है क्या उनके कद को देखते हुवे आकाश को यह सब करना था ? निश्चित रूप से आकाश को किसी समर्थक ने उकसाया होगा ! घटना निंदनीय है किसी अफसर को पीटकर शांत स्वभाव के आकाश ने मेरी नजर में अपने नंबर कम लर लिये जिस उचाई को पिता छू चुके उस पर भी असर पड़ा है  ? क्या सुमित्रा महाजन के बेटे ने आज तक किसी को पीटा ? वो 8 बार की सांसद रही ? कैलाश भी अपनी बात मनवाने की ताकत रखते हैं बड़े बड़े ब्यूरोक्रेट्स कैलाश का लोहा मानते आये हैं किंतु कानून हाथ मे लेना आकाश की नादानी कही जायेगी जो हुवा वह वापस नही हो सकता किन्तु इस घटना से सबक लेकर बहुत कुछ सीखा जा सकता है वरना दूसरे राजनेताओं और कैलाश के बेटे में कोई फर्क नही होगा

 (हो सकता है इस सन्देश के बाद कोई मुझसे भी पूछ लें तेरी हैसियत क्या है ? किंतु कलम सच उगलती रहेगी)* 


लेकिन फिर कलम पर पानी डाल कर आगे बढ़े।



 जनता के लिए प्रेम अपार

मुफ्त में मिला कवरेज जोरदार


सौम्य व्यवहार वाले विधायक आकाश विजयवर्गीय ने कल जो रौंद रूप दिखाया वह सभी को भौचक्का कर गया । ऐसी परिस्थिति निर्मित हुई कि उन्हें क्रिकेट का बल्ला उठाकर चलाना पड़ा । जनप्रतिनिधियों के इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जाती , खासकर सौम्य और सरल व्यक्तित्व वाले नेताओं से ।

 आकाश विजयवर्गीय को किसी ने कभी इतने गुस्से में नहीं देखा । ये पहला मौका था जिसमें ये स्थिति निर्मित हुई । जो कुछ भी हुआ उसे सही तो नहीं ठहराया जाना चाहिए पर जनता के पक्ष में इस तरह की घटना से आकाश का एक अलग रूप देखने में आया । अभी तक भाजपा सरकार थी जिस वजह से कोई दिक्कत नहीं आती थी और फोन पर ही अफसर हुक्म बजा देते थे अब सरकार बदली नगर निगम तो पहले से ही फेवरेबल नहीं है ऐसे में एक निगम के अधिकारी को इस तरह से तपाया जिसके परिणाम बाद में आएंगे और दूसरे सभी अधिकारी बगैर देर किए ही काम करने लगेंगे । हां इस एक प्रकरण में एक बात और हुई मुफ्त का प्रचार हो गया वह भी भरपूर हुआ । सोशल मीडिया के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया ने जमकर कवरेज किया । प्रचार होना जरूरी है । नेताओँ को तो चर्चा में रहना ही अच्छा लगता है फिर चर्चा केसी भी हो !

 *वैसे भी शासकीय कार्य में बाधा डालने के साथ ही मारपीट करने की धारा लगी है जो कि जमानती हैं* वह दीगर बात है कि लोअर कोर्ट ने जेल भेज दिया है ।

 विधायक की जेल यात्रा को भी खूब प्रचार मिलेगा ही । हां एक बात और,


 एक विषय पर मत भिन्नता होती ही है । समर्थक घटनाक्रम को जायज ठहरा रहे हैं और दूसरा पक्ष इसे गलत बता रहा है ।

 सरकारी अमला भी इस घटना के विरोध में है । आम जनता में अफसरों के प्रति सहानुभूति होती नहीं है इसलिए वे इस घटना को चटकारे लेकर चर्चा में बनाए हुए हैं ।
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