KKK न्यूज़ रिपोर्टर
           नैनी
        सुभाष चंद्र

 प्रयागराज,  नैनी, प्रयागराज किस बहुप्रतीक्षित अनुपयुक्त बांध की औपचारिक जांच आज पूरी हो गई परन्तु इसकी तकनीकी जांच की अभी भी प्रतीक्षा है।
    जानकारी के अनुसार प्रयागराज शहर के नैनी थानांतर्गत शुआट्स एग्रीकल्चर से सटे लगभग एक किमी लम्बे बांध के निर्माण में हुए भ्रष्टाचार व घोटाले की शिकायत के बाद शिकायतकर्ता राजाराम कोटार्य निवासी नौगवां, कौंधियारा के आवेदन अंतर्गत आरटीआई ऐक्ट,2005 का निश्चित समय मे जवाब न मिलने पर आवेदक ने सूचना आयोग में अपील की थी जिसपर आयोग के संज्ञान लेने के बाद आज जांच टीम ने शिकायतकर्ता की उपस्थिति में स्थलीय भौतिक सत्यापन के साथ जांच की है।
    बता दें कि प्रयागराज में यमुना नदी के किनारे पहले से ही बने तीन बांध बाढ़ को रोकने में समर्थ है इसके बावजूद पिछली सरकार में सत्ता में ऊंची पकड़ का लाभ उठाकर शुआट्स एग्रीकल्चर नैनी के लोगों ने अपनी सुविधा के लिए  एक सम्पर्क मार्ग व सुरक्षा घेरा की मानसिक योजना के तहत 01 किमी लम्बे, लगभग 04 मीटर चौड़े व लगभग 04.5 मीटर ऊंचे बांध का निर्माण तत्कालीन सरकार में सरकारी विभाग से कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उपरोक्त निर्माण केवल कागज में हुआ है व उसकी शिकायत पर कोई कार्यवाही न होने पर आरटीआई ऐक्ट,2005 के जरिये सूचना मांगी गई परन्तु सूचना न मिलने पर प्रथम अपील के बाद द्वितीय अपील की गई जिसपर संज्ञान लेकर आयोग ने समयवद्ध जांच करके सूचना उपलब्ध कराने को कहा था। 
    उल्लेखनीय है कि कार्यदायी संस्था बाढ़ कार्य खण्ड प्रयागराज के ई-टेंडरिंग व्यवस्था में कार्यकारी संस्था स्वयं बाढ़ कार्य खण्ड प्रयागराज की टीम बसन्त लाल जेई, दिनेश कुमार मौर्य जेई व प्रमोद कुमार सरोज जेई ने कागज पर इस बांध का निर्माण कराया था व इसी प्रकरण में आज शिकायतकर्ता की उपस्थिति में अनिल कुमार यादव ऐई, राम बली जेई, ज्ञान प्रकाश जेई व दिनेश कुमार मौर्य जेई की जांच टीम ने स्थलीय भौतिक सत्यापन के साथ जांच की जिसमे औपचारिक जांच पूरी हुई परन्तु तकनीकी सहायक व लेबर उपलब्ध न होने के कारण तकनीकी जांच व नाप-जोख नही हो सका। जांच के दौरान पूरे बांध के एक किनारे एकदम ताजी मिट्टी व दूसरे तरफ एकदम नए व बेतरतीब पत्थरो तथा लगभग 800 मीटर लम्बे व 04 मीटर चौड़े मार्ग पर इंटरलॉकिंग को देखकर प्रथमदृष्टया यह दिखाई दिया है कि शिकायत, सूचना की मांग व आयोग के संज्ञान लेने के बाद मात्र पिछले एक सप्ताह में ही आनन-फानन में यह बांध बनाकर दिखा दिया गया। जांच से शिकायतकर्ता असंतुष्ट नजर आया व उसने तकनीकी सहायक व लेबर से नाप-जोख करने व गुणवत्ता के परख की बात रखी जिसे जांच टीम में तकनीकी सहायक व लेबर के अनुपलब्ध होने के कारण टाल दिया। यह बेहद चौंकाने वाला रहस्य बरकरार है कि आखिर बाँध की जांच के दौरान नाप-जोख व गुणवत्ता की परख क्यों नही की गई है जिससे दाल में सब काला नजर आ रहा है। जांच टीम ने साक्ष्य के रूप में रेखाचित्र, प्रोजेक्ट रिकॉर्ड व एमबी दिखाया एवं उसकी प्रति भी शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराया परन्तु मुख्य मांग अनुबंध संख्या उपलब्ध कराने में टीम असफल रही। जांच टीम के पेपर्स के हिसाब से रु0 33.77990, 33.23612, 36.4848 तथा 35.40353 का ही ब्यौरा उपब्ध कराया जा सका जबकि कार्य मे अधिक व्यय बताया गया वही दूसरी तरफ लगभग 34 मीटर तो राष्ट्रीय राज्यमार्ग में ही सन्निहित है। आज सवाल तो इस बात पर भी उठा है कि कार्यकारी संस्था की टीम के एक सदस्य दिनेश कुमार मौर्य जेई को ही जांच टीम में शामिल क्यों किया गया जबकि वह आरोपीगणों में शामिल है व मुख्यसचिव उ0प्र0 के फरवरी 2018 में जारी पत्र व न्यायिक पारदर्शिता के सिद्धांत के अनुसार एक आरोपी स्वयं पर लगे आरोपो की जांच खुद कैसे कर सकता है?  उधर शिकायतकर्ता का कहना है कि वह इस बांध की सही व तकनीकी जांच के लिए पुनः शिकायत करेगा व अगली सुनवाई की तिथि में आयोग के समक्ष यह प्रकरण मजबूती से उठाएगा।
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