राजस्व अधिकारियों की बैठक सम्पन्न

कटनी - कलेक्टर शशिभूषण सिंह ने कहा कि राजस्व अधिकारी अपने मूल दायित्व के कार्यों में राजस्व प्रकरणों का निराकरण उच्च प्राथमिकता के साथ करें। प्राकृतिक आपदा में आरबीसी सहायता और राहत के प्रकरण लंबित नहीं रहने चाहिये। गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिले के राजस्व अधिकारियों की बैठक में कलेक्टर ने आरसीएमएस के दर्ज प्रकरण, सीमांकन, बंटवारा, डायवर्सन, राजस्व वसूली सहित सीएम हेल्पलाईन में राजस्व प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा की। इस मौके पर संयुक्त कलेक्टर सपना त्रिपाठी, एसडीएम बलबीर रमन, देवकी नन्दन सिंह, प्रिया चन्द्रावत, धीरेन्द्र सिंह, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें डॉ0 आर0पी0एस0 गहरवार, जिला प्रबंधक ई-गवर्नेन्स सौरभ नामदेव, जिला प्रबंधक लोकसेवा गारंटी दिनेश विश्वकर्मा सहित सभी तहसीलदार व नायब तहसीलदार उपस्थित थे।
कलेक्टर श्री सिंह ने आरसीएमएस में दर्ज राजस्व प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा तहसीलवार एवं उप तहसीलवार की। उन्होने कहा कि अधिनियम और सिटिजन चार्टर में निर्धारित राजस्व प्रकरणों का निराकरण की समय सीमा के भीतर प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होने कहा कि सीएम हेल्पलाईन में एल-1 स्तर पर राजस्व प्रकरण के आते ही तत्काल निराकरण की कार्यवाही करें और संबंधित आवेदक से शिकायत के संबंध में बात-चीत भी करें। कलेक्टर ने कहा कि 2 वर्ष से 5 वर्ष के भीतर की अवधि में प्रकरण शीघ्रता पूर्वक निराकृत करें। सीमांकन, बटवारा, नामंतरण के प्रकरणों की समीक्षा करते हुये कलेक्टर ने कहा कि टीएस मशीनों से सीमांकन कार्य को बढ़ावा दें। तहसीलस्तर पर पटवारियों को पुनः एक बार टीएसएम मशीन संचालन का प्रशिक्षण दिलायें। कलेक्टर ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के आरबीसी 6-4 के प्रकरण लंबित नहीं रहने चाहिये। इन प्रकरणों में तत्काल राहत सहायता पहुंचायें। राजस्व वसूली की समीक्षा में सभी राजस्व अधिकारियों को विशेष ध्यान देकर लक्ष्यानुसार वसूली करने के निर्देश दिये गये। इसी तरह भू-भाटक की बकाया वसूली भी करने को कहा गया। बैठक में आवासीय भू-धारक पट्टे, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में लंबित राजस्व संबंधी मामले, नजूल प्रकरण, भू-अर्जन, राजस्व भवन निर्माण आदि बिन्दुओं पर समीक्षा की गई।कलेक्टर डॉ0 सिंह ने कहा कि एसडीएम प्रत्येक माह विकासखण्डस्तर के विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर विभागीय गतिविधियों, कार्यक्रमों की समीक्षा करें। इसी प्रकार अन्य विभागों की गतिविधियों की मॉनीटरिंग और समन्वय करें। राजस्व के मामले तय समय में निपटाये जायें। जिले में निर्धारित 30 गौशालाओं की स्थापना के लिये 21 में भूमि का चयन किया जा चुका है। शेष 9 गौशालाओं के लिये स्थल चयन करें तथा विकासखण्ड स्तरीय पशु कल्याण समितिकी प्रतिमाह बैठक लेकर समीक्षा करें।


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