देखा जा रहा है कि सरकार शिक्षा  के स्तर को बेहतर करने के लिए बड़े बड़े वादे कर रही हैं लेकिन शिक्षा का स्तर सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा है 

ऐसे में एक प्रश्न उठता है  कि सरकार  बड़े-बड़े स्कूल बना रही है  और स्कूलों का नवीनीकरण भी हो रहा है लेकिन ऐसा क्या है जो सरकार नहीं कर रही है जिसकी वजह से  शिक्षा का स्तर गिरता ही जा रहा है

ऐसा इसलिए क्योंकि बहुत सारे शिक्षक रिटायर हुए बहुत सारे शिक्षक दुनिया से विदा हो गए और रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार ने प्रयास ही नहीं किया आज 11 वर्ष हो रहे हैं अतिथि शिक्षक के रूप में बहुत सारे नौजवान ग्रैजुएट्स नौजवान युवा युवतियां स्कूलों में अतिथि शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं और उनका भविष्य का चुनाव हर वर्ष होता है क्यों क्योंकि  अतिथि शिक्षक मात्र एक मेहमान हैं और मेहमान हर साल बदले भी जाते हैं यह शिक्षा का स्तर है और शिक्षा के साथ मजाक भी है क्योंकि बच्चे भावनात्मक रूप से अपने शिक्षकों से जुड़ जाते हैं और जब वह शिक्षक बदल दिया जाता है तो बच्चों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचती है और जिस तरीके से शिक्षक ग्राम के लोगों के साथ एवं शाला परिवार में घुलमिल जाते हैं और फिर एकाएक दूसरे वर्ष में उसी स्कूल से हटा दिया जाता है तो मानसिक तौर पर यह प्रताड़ना ही कहेंगे मेरी एक अतिथि शिक्षक से मुलाकात हुई और मैंने उनसे जानकारी ली वह भावुक होकर  उन्होंने अपनी व्यथा बताई कि मैं  आज 11 वर्ष से अतिथि शिक्षक के रूप में बच्चों को शिक्षा दे रहा हूं लेकिन मेरा स्वयं का भविष्य अंधकार की ओर जा रहा है यह सब क्या हो रहा है इस देश में जहां पर शिक्षा के लिए अरबों रुपए खर्च किया जा रहा हो स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाने की बात चल रही हो बड़ी बिल्डिंगें तैयार की जा रही हो हर साल स्कूलों का नवीनीकरण हो रहा हो बच्चों को स्कूली किताबें साइकल बस्ता   छात्रवृत्ति छात्रावास जैसी समस्त योजनाएं दी जा रही हो क्या उन्हें एक बेहतर शिक्षक नहीं दिया जा सकता सोचनीय विषय है आज स्कूलों में शिक्षा का स्तर अगर देखा जाए तो इस वर्ष दसवीं क्लास का रिजल्ट देख लिया जाए जिससे शिक्षा का स्तर का सही आकलन हो जाएगा दूसरी बात यह है कि सरकार मौखिक परीक्षा क्यों नहीं कराती की एक टीम गठित कर प्रत्येक स्कूलों में जाकर बच्चों से मौखिक परीक्षा ली जावे जिससे बच्चों की पढ़ाई के स्तर के बारे में सही आंकलन होगा और वह आंकलन चौका देने वाला होगा मेरा मानना है कि सरकार इस विषय को गहनता से ले और शिक्षकों की अति शीघ्र भर्ती हो और प्रथम प्राथमिकता अतिथि शिक्षकों को दी जावे और हर वर्ष अतिथि शिक्षकों  से सारी फॉर्मेलिटी ना लेते हुए उन्हें रेगुलर एक ही स्कूल में पढ़ाने दिया जाए  पूर्व से अतिथि शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों को उसी स्कूल में रेगुलर  पढ़ाने की स्वीकृति दी जाए और वह भी योग्यता के आधार पर अतिथि शिक्षकों की एक बार भर्ती की जाए हर वर्ष अतिथि शिक्षकों को फॉर्म अपडेट कराना और बार-बार आवेदन और नियुक्ति की प्रक्रिया बंद की जाए

*   विचार लेखक
 अब्दुल  कादिर खान 
 कलयुग की कलम
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