KKK न्यूज़ ब्यूरो रिपोर्ट
        प्रयागराज
 विकास कुमार पटेल

प्रयागराज ग्राम पंचायत महरुडीह में जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन अभियान का हुआ शुभारम्भ
जल संचयन अभियान में मा. सांसद फूलपुर श्रीमती केशरी देवी के साथ जिलाधिकारी प्रयागराज सहित प्रशासनिक अधिकारी रहें उपस्थित
जिलाधिकारी प्रयागराज ने जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन अभियान में फावडा उठाकर किया श्रमदान
22 जून 2019 प्रयागराज।
आज जनपद प्रयागराज के विकास खंड कौड़िहार की ग्राम पंचायत महरुडीह में जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन अभियान का शुभारम्भ किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मा. सांसद फूलपुर श्रीमती केशरी देवी पटेल ,विशिस्ट अतिथि मा. विधायक श्री विक्रमाजीत मौर्य, जिलाधिकारी प्रयागराज श्री भानु चंद्र गोस्वामी, मुख्य विकास अधिकारी श्री अरविंद सिंह, उपायुक्त श्रम रोजगार श्री तेजभान सिंह, उपायुक्त एनआरएलएम, विकास खंड के खंड विकास अधिकारी, समस्त ग्राम सचिव, विकास खंड के अन्य समस्त स्टाफ, विकास खंड स्तर पर संचालित विभिन्न समूह की महिलाएं, आगंनवानी कार्यकर्ती महिलाये तथा ग्राम पंचायत के 300 लोगो द्वारा योगदान किया गया। मा. मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश महोदय के इस अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम का संकल्प पत्र पढ़कर  उपस्थित समस्त लोगो को  सुनाया गया। तथा इस अभियान को सफल बनाने हेतु सब को प्रेरित किया । उपस्थित समस्त मा. अतिथियों तथा समस्त उच्चाधिकारी महोदय द्वारा इस अभियान के प्रभावी संचालन एवं सफल बनाने हेतु अपने-अपने विचार उपस्थित लोगो के समक्ष रखा गया। उपस्थित समस्त लोगो द्वारा इस अभियान को सफल बनाने हेतु दृढ़संकल्प के लेने के साथ समापन हुआ।
मा. सांसद फूलपुर ने कहा कि जल जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। मा0 प्रधानमंत्री जी ने इसे जनआंदोलन का रूप दिया है। सभी से अपील है कि कम से कम दो-दो तालाब प्रत्येक ग्रामपंचायतों में खुदवाकर जल का संरक्षण करें।
जिलाधिकारी ने कहा कि पूर्व में पर्याप्त वर्षा होती थी। जल के संरक्षण का दबाव कम था, किन्तु बढ़ते जनसंख्या दबाव, ग्लोबल वार्मिंग एवं जल के अंधाधुंध दोहन से भूगर्भ का जल स्तर निरन्तर नीचे गिरता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि तालाबों की खुदायी कराकर, चकडैम बनाकर, नदियों की सफाई कराके, अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर प्राकृतिक पर्यावरण का संतुलन बनाना है एवं जल स्तर को ऊपर उठाना है। इस अभियान में स्वयं फावडा उठाकर श्रमदान किया तथा लोगों को जल संचयन के प्रति जागरूक होने का आवाहन भी किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान से जल संचयन में काफी सफलता मिलेगी। उन्होंने कहा कि खेतों में मेड बनाकर वृक्षारोपण किया जाय जिससे खेतों का पानी खेतों में रहें। उन्होंने कहा कि जल संचयन के इस अभियान को जन आन्दोलन के तहत कार्य किया जाय। उन्होंने कहा कि इस अभियान में ग्रामीण लोगों को भी जोडा जाय।
डी0सी0 मनरेगा ने कहा कि धरती पर उपलब्ध जल का 97.2 प्रतिशत जल खारे पानी के रूप में समुद्र एवं महासागर में है। 0.1 प्रतिशत पानी तालाबों, नदियों, जलाशयों में तथा 2 प्रतिशत वर्षा के रूप में जाता है तथा 0.6 प्रतिशत पानी भूगर्भ में है, किन्तु हम कृषि पर अधिक दबाव वाली पानी वाली फसले एवं बोरिंग से अधिक मात्रा में जल का दोहन करने से जलस्तर लगातार गिर रहा है, जिससे तालाब व कुएं सब सुख रहे है। अतः अविलम्ब इस संकट से निकलने के लिए जल का संरक्षण अत्यंत जरूरी है।
उल्लेखनीय है कि देशभर में स्वच्छता अभियान की अपार सफलता के बाद मा. प्रधानमंत्री ने ज्यादा से ज्यादा बारिश के जल के संचयन पर बल दिया है। उन्होंने इस बाबत पंचायतों को पत्र के माध्यम से आग्रह किया है कि वे स्वच्छता अभियान की तर्ज पर जल संचयन को जन-आंदोलन का रूप दें। यह पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय से जिला मुख्यालय के माध्यम से पंचायतों के सरपंच-मुखिया को भेजा जा रहा है। पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिक्र किया है कि वर्षा ऋतु का आगमन होने वाला है। हम भाग्यशाली हैं कि ईश्वर ने देश को पर्याप्त वर्षा जल प्रदान किया है परंतु ईश्वर की इस भेंट का आदर करना हमारा कर्तव्य है। बारिश का मौसम प्रारंभ होते ही हमें ऐसे इंतजाम करने हैं कि बारिश के पानी का हम ज्यादा से ज्यादा संचयन कर सकें। खेतों की मेड़बंदी, नदियों और धाराओं में चेकडैम का निर्माण और तटबंधी, तालाबों की खुदाई एवं सफाई, पौधरोपण, वर्षा जल के संचयन के लिए टांका, जलाशय आदि का बड़ी संख्या में निर्माण करें ताकि खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में संचयित किया जा सके। पीएम ने पत्र  में लिखा है कि अगर हम ऐसा कर पाएं तो न केवल पैदावार बढ़ेगी बल्कि हमारे पास जल का भंडार होगा जिसका हम अपने गांव के कई कार्यों में सदुपयोग कर पाएंगे। प्रधानमंत्री ने आग्र्रह किया है कि ग्रामसभा की बैठक बुलाकर मेरे इस पत्र को सभी को पढ़कर बताएं और इन मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श करें। मुझे पूरा भरोसा है कि ग्रामीण स्तर पर हम सब मिलकर जल की हर एक बूंद का संचयन करेंगे और अपने परिवेश को और परिष्कृत बनाएंगे।
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