देश के अंदर बढ़ रही बीमारियों से लड़ने के लिए सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाओं की  कमी डॉक्टरों की कमी और दवाइयों की कमी के कारण गरीब शहर वासी और ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों की बढ़ गई समस्याएं इसके साथ मध्यम वर्गीय दवाइयों के बढ़ते दाम से त्रस्त दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सरकारों को चाहिए कि वह सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं की ओर ध्यान दें। सरकारी अस्पतालों में ज्यादा मात्रा में दवाइयां डॉक्टरों की व्यवस्था बैडो की व्यवस्था  बड़ी से बड़ी बीमारी से लड़ने के लिए जांच सुविधाएं दवाइयों की सुविधाएं मुहैया कराएं ।और प्राइवेट हॉस्पिटलों में मची लूट से जनता को बचाने का सबसे अच्छा तरीका यही है । कि सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं बेहतर की जाएं इसके साथ ही पूरे देश के अंदर बिक रही दवाइयों के दाम भी सरकार सुनिश्चित करे क्योंकि एक दवा और एक फार्मूले की दवाइयां कहीं बड़े महंगे दामों में मिल रही है । वही दवाइयां कम दामों में भी उपलब्ध है । ऐसे में गरीब व्यक्ति थक हार के बैठ रहा है। नकली दवाइयों का भी बाजार सजा हुआ है । इसके साथ ही दवाइयों में जांचों में जमकर कमीशन खोरी चल रही है प्राइवेट अस्पतालों में लुट कर वापस लौट रहे मरीजों को देखकर ऐसा लगता है । कि जैसे बीमारी नहीं बिजनेस बन रहा है । पहले जमाने में डॉक्टर सेवा भाव से इलाज किया करते थे लेकिन अब वह बिजनेस में तब्दील हो चुका है । और दवाइयों जांचों तक से कमीशन खोरी चल रही है ? मैं यह आरोप सब डॉक्टरों पर नहीं लगा रहा हूं ! लेकिन ज्यादातर  ऐसा चल रहा है ।जिसमें कुछ ईमानदार  डॉक्टर आवाज उठा रहे हैं ऐसे में सरकारों को कानून बनाने चाहिए और दवाइयों का उचित मूल्य होना चाहिए वही नकली दवाइयों का भी व्यापार धड़ल्ले से चल रहा है  कैल्शियम मल्टीविटामिंस माल्ट और अन्य टॉनिक जोकि मेडिकल स्टोर में दवाइयाँ बेची जा रही हैं जो की प्रिंट रेट से 75%  तक डिस्काउंट रेट पर मेडिकल एजेंसी मेडिकल स्टोरों में भेजी जा रही है। और वहां से प्रिंट रेट पर मरीजों को उपलब्ध हो रही हैं?  सरकारों की व्यवस्थाओं से भरोसा उठता नजर आ रहा है ! हमारा सरकारों से निवेदन है कि इस व्यवस्था को बदलने की दया करें  स्वास्थ्य सुविधाओं की ओर भी अपनी चिंता दिखाएं धन्यवाद जयहिंद


विचार लेखक

अब्दुल कादिर खान कलयुग की कलम मोबाइल नंबर 97536 87489

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