स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बने शौचालय हवा हवाई नहीं चली डीएम साहब की हनक नहीं मान रहे अधिकारी व कर्मचारी अधिकारी मस्त जनता  हुई त्रस्त नहीं चल पा रहा जिले में डीएम साहब का चाबुक क्योंकि जिला ओडीएफ घोषित होने के बावजूद भी ग्रामीण क्षेत्रों में यह हाल बयां करता


 हरदोई/ केंद्र की सरकार  व सूवे के योगी सरकार द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायतों में सचिवालय का निर्माण कराने किसके लिए कंप्यूटर तथा ग्राम पंचायतों  के कार्यों  की फीडिंग के लिए समय से सचिवालय खुलना अति आवश्यक किया गया था। लाखों रुपए की बिल्डिंग सरकार के माध्यम से बनाने का आदेश जारी किया गया था उसके बाद में जिलाधिकारी  द्वारा बड़े सक्रियता से बनवाने का जिम्मा लिया गया ।और बिल्डिंग का निर्माण भी कराया गया कुछ भ्रष्ट प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी तथा ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से इन सभी बातों को जनता  की जनकल्याणकारी योजनाएं वे शासन द्वारा प्रतिमाह मासिक बैठक अनिवार्य व उनकी समस्याओं को  ध्यान में रखते हुए निराकरण हेतु योजनाओं से वंचित ना हो सके इसलिए बैठक अनिवार्य हुआ था लेकिन कुछ भ्रष्ट अधिकारी इन सब बातों को भुलाकर आंख कान बंद किए बैठे ग्राम पंचायतों में गरीब जनता के लिए न तो समस्या के निराकरण कराया जा रही है  ना ही उस पर अमल किया जा रहा। क्योंकि लाखों रुपए  का बना सचिवालय सभी ग्राम पंचायत ताला ही लगा नजर आ रहा है। आप को बताते चले के विकास  खंड अहिरोरी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत बक्सापुर में सचिवालय तो बना लेकिन ताला ही झूलता रहता है।तथा ग्रामीणों का  कहना   है  ।    कि सचिवालय जब से बना है आज तक ना ही कोई कर्मचारी  व अधिकारी  यहां आया और सचिवालय  बंद ही रहता है।
ग्राम प्रधान के मनमानी के चलते यहां शौचालय अपने मर्जी के मुताबिक प्रधान द्वारा बनवाए  गए जिसमें प्रत्येक लाभार्थी से  ₹2000 की वसूली की गई तथा जिन लाभार्थियों ने रुपए दिए तो उनका जिम्मा प्रधान ने  ले लिया हर लाभार्थियों को घटिया सामग्री पीला ईट तथा  कम सामग्री में बनवाकर शौचालय खड़ा कर दिया जो आज तक पूर्णता चालू नहीं हो सके और उसका लाभार्थियों ने पूर्ण रूप से लाभ नहीं ले पाए न तो  सुचारू रूप से  चल पा रहे हैं क्योंकि  किसी में प्लास्टर नहीं है तो किसी में सीट नहीं रखी हुई है और अगर बने हुए भी हैं तो उसमें कुछ लोगों ने इंधन वह लकड़ी इत्यादि सामग्रियों से भरी हुई है।  जिससे लगता है, कि स्वच्छ भारत के मिशन की धज्जियां उड़ती नजर आ रही है ।लोगों को कहना था, कि लगभग हमारे गांव में 80% शौचालय वह नहीं चल रहे हैं और हम सभी लोग बाहर ही शौचालय करने जाते हैं।
 डीएम साहब के आदेशों पर प्राथमिक विद्यालयों में  वॉल बाउंड्री बनाए जाने का निर्णय लिया गया था उन पर भी दीमक की तरह प्रधान व सचिव द्वारा घटिया सामग्री व पीला ईंट से निर्माण कराया जा रहा है और  मजदूरों को प्रधान द्वारा नगद भुगतान किया जाता रहा है तथा  नाबालिक बच्चों से वॉल बाउंड्री में मजदूरी कराई जाती है जिनकी उम्र पढ़ने की है। उनसे प्रधान द्वारा मजदूरी कराई जा रही है। सीमेंट की भारी बचत की  जा रही है जो हाथ लगाने से ही ईटें गिर जा रही हैं मसाले में बिल्कुल मजबूती नहीं है क्योंकि खाने और कमाने के चक्कर में प्रधान व सचिव लगे हुए है
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