कटनी जिले  का मामला जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा क्षेत्र में भी नहीं हुई अतिथि शिक्षकों की पेमेंट

सवाल तो बनता हैं? 

अतिथि शिक्षकों को क्यों नहीं मिल रही पगार जबकि दूसरा सत्र चालू हो चुका है  ऐसे में वह अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करें  स्वयं भी  आवश्यकता  को कैसे पूरा करें  क्योंकि कोई भी व्यक्ति जब कहीं नोकरी या मजदूरी करता है  उसके पीछे उसकी आवश्यकता लगी होती है  अतिथि शिक्षकों को लेकर सरकारों का रवैया कुछ ठीक नहीं अतिथि शिक्षक बेरोजगार युवा अपना समय अतिथि शिक्षक के रूप में क्षेत्रीय निकटतम शालाओं में देते हैं ऐसे में कई अतिथि  नियमित स्कूल जाकर शिक्षा दे रहे है लेकिन सोचनीय विषय है की लगन और ईमानदारी के साथ विद्यालय जाकर स्कूल के छात्रों को सेवाएं देने का कार्य अतिथि शिक्षकों द्वारा निरंतर किया गया लेकिन अब तक अतिथि शिक्षकों को उनके इमानदारी से कार्य करने कि पगार नहीं मिली इसके साथ ही अतिथि शिक्षकों ने निशुल्क तक पढ़ाने का कार्य किया क्योंकि पहले ही एक दो महीने निशुल्क पढ़ा चुके हैं  जिसे  संकुल द्वारा या स्कूल  के  शाला प्रबंधन द्वारा  निशुल्क बता दिया गया है अब उनके सब्र का बांध टूटने ही वाला है जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा क्षेत्र के कई स्कूलों में नहीं मिला अतिथि शिक्षकों की पगार अतिथि शिक्षकों  नियमितीकरण की मांग को लेकर  सारे प्रयास कर लिए धरना प्रदर्शन सड़कों पर निकलना महिला शिक्षकों ने सभी सर भी मुड़वाय थे लेकिन उनकी मांगों में किसी ने अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी जैसे ही स्कूल चालू होने वाले होते हैं अतिथि शिक्षकों की मांगे और अतिथि शिक्षकों को लेकर चर्चा गर्म हो जाती हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है? कि अतिथि शिक्षक बेरोजगारी के आलम में स्कूलों में बराबर शिक्षा दे रहे हैं लेकिन उनकी पगार मिलने में देरी क्यों? इसके साथ ही मध्य प्रदेश में सरकार बदली है और कांग्रेस पार्टी को जिताने के लिए अतिथि शिक्षकों का बहुत बड़ा हाथ रहा है ऐसे में अतिथि शिक्षकों की नजरें कमलनाथ जी पर टिकी हुई हैं, जरूर कोई सटीक फैसला आएगा अगर नहीं आया तो तो फिर से सड़कों में प्रदर्शन करने की चेतावनी भी अतिथि शिक्षकों ने दी हैं, मांग नियमितीकरण का है या फिर गुरु जी की तर्ज में उनकी भर्ती की जाए! जय हिंद

       लेखक 
अब्दुल कादिर खान
 कलयुग की कलम
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