ATM THEFT INDORE 
एटीएम से 21 लाख रुपए चुराने वालों ने किया खुलासा
इंदौर .तीन दिन पहले परदेशीपुरा में आईटीआई कैंपस के पास एसबीआई के एटीएम से चोरी हुए 21 लाख रुपए के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रुपए एटीएम में नोट भरने वाले एसआईएस कंपनी के दो कर्मचारियों अंकित सोलंकी और विजय जिनवाल ने ही चुराए थे। उन्होंने पुलिस को पूछताछ में बताया कि इससे पहले भी वे सुखलिया क्षेत्र में दो े एटीएम से 10.5 लाख रुपए निकाल चुके थे।
वे इन रुपयों को ब्याज पर चलाते और अपने लोन की किस्त जमा करते। जब उनके पास राशि वापस आ जाती तो पासवर्ड और की (चाबी) के जरिए एटीएम में रुपए भर देते। बैंक अधिकारी मॉनिटरिंग में सिर्फ कितने रुपए जमा हुए वह आंकड़ा देखते हैं, इसलिए कर्मचारी सिस्टम में राशि गलत फीड कर देते हैं। फर्जीवाड़े का पता भी नहीं चलता।
एएसपी प्रशांत चौबे ने बताया कि इन कर्मचारियों का काम एटीएम में रुपए भरने का काम था। इन्होंने पूछताछ में बताया कि ये दोनों कम उपयोग में आने वाले एटीएम को टारगेट कर उसमें से रुपया निकालकर मशीन में गलत जानकारी फीड कर देते थे। संयोगितागंज और भंवरकुआं क्षेत्र में भी ऐसे मामले पता चले हैं। उनकी भी पड़ताल की जा रही है।

बैंक की लापरवाही का फायदा कंपनी कर्मचारी उठाते हैं- बैंक ने भी ऑडिट लंबे समय तक नहीं करवाता था, इसलिए ये कर्मचारी बैंक के ही रुपयों को लोन चुकाने व अन्य कामों में इस्तेमाल कर लेते थे। दोनों कर्मचारियों ने पुलिस को यह भी बताया कि कई लोगों को ये बैंक का रुपया कुछ माह के लिए ब्याज पर देकर कमाई भी कर लेते थे। बाद में पासवर्ड और की के माध्यम से रुपया वापस जमा कर जाते थे। इस गंभीर लापरवाही में बैंक को इसलिए कुछ लेना-देना नहीं होता था क्योंकि बैंक जो भी पैसा एटीएम में जमा करने के लिए कंपनी को देती थी वह इंश्योर्ड (बीमित) रहता था।
पुलिस को घटना में एफआईआर तक दर्ज करवाने के लिए न तो बैंक की तरफ से कोई आया ना ही रुपया जमा करवाने वाली कंपनी की ओर से किसी ने ज्यादा रुचि दिखाई। वहीं पुलिस कंपनी के ही कर्मचारी की रिपोर्ट पर यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। मामले में रुपयों को लेकर बीमा कंपनियां चुप बैठी हैं जबकि इस तरह की वारदातों का सबसे ज्यादा नुकसान बीमा कंपनियों को ही होता है। जो वह आम जनता से वसूल लेती हैं।
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