KKK न्यूज रिपोर्टर
          नैनी
      सुभाष चंद्र

 प्रयागराज घूरपुर थाना क्षेत्र के भीटा ग्राम सभा में आज एक ऐसा प्रकरण सामने आया । जिसमें नवविवाहिता दुल्हन अपने पति के साथ अपनी ससुराल भीटा गांव पहुंची जहां पर दूल्हे पक्ष के लोगों ने दुल्हन को अपने साथ दहेज में कम रुपए और कम सामान लाने की वजह से नई नवेली दुल्हन को दूल्हे के परिजनों ने घर के अंदर आने से मना कर दिया । जिसके कारण दुल्हन घन्टों दूल्हे के साथ बाहर गाड़ी में ही बैठी रही। वही इस बात की जानकारी जब आसपास के लोगों को हुई तो उनके द्वारा ही घूरपुर थाने की पुलिस को भी सूचना दी गई । सूचना पर पहुंचे थाना प्रभारी घूरपुर ने दूल्हे के परिजनों को बहुत समझाया बुझाया लेकिन दूल्हे के परिजन दहेज की डिमांड पूरी न होने के कारण दुल्हन को घर में आने से मना ही करते रहे। जिस पर थाना प्रभारी ने दूल्हे और दुल्हन को अपने  साथ थाने पर बुला लाए । सूचना पाकर वही दुल्हन के परिजन भी मौके पर पहुंचकर दूल्हे पक्ष के लोगों से विम्रता पूर्वक निवेदन करने लगे । लेकिन बात बिगड़ती देख दोनों पक्षों को बुलाकर के थाने पर ही बैठाया गया है । वही खबर लिखे जाने तक दोनों पक्षों के द्वारा बातचीत कर आपसी सहमति बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है । फिर भी नवविवाहिता दुल्हन और दूल्हा को अपने घर जाने के लिए थाने में ही बैठे इन्तजार कर रहे हैं ।जबकि दुल्हन पुष्पा देवी ने कहा कि मैं भी इसी गांव की बहुत ही गरीब परिवार की बेटी हूं और मेरे पति संदीप मिश्र गांव के ही निवासी हैं और संदीप के पिता सरकारी नौकरी करते थे और उनके निधन के बाद संदीप के बड़े भाई प्रदीप को नौकरी मिल गयी और दुसरे भाई बिपीन को घर की जिम्मेदारी सौंपते हुए मालिक बना दिया गया । जिसके कारण दोनों भाईयों के मन में लालच समा गई और पिता के निधन के बाद शासन द्वारा मिलें पैसे में संदीप को हिस्सा ना देना पड़े इस लिए संदीप को कुछ दिन बाद घर से बाहर निकाल दिया और कहा कि तुम्हारा घर में किसी प्रकार हिस्सा नहीं है आज के बाद हमारे घर के पास दिखाई ना पड़ना नहीं तो हाथ पैर तोड़कर जेल भेजवा दूंगा। वर्षों से संदीप दर- दर ठोकर का खा रहा था और इसी दरम्यान हमारा और संदीप के बीच में प्रेम हो गया । इस बात को हमने अपने घर वालों को बताया तो हमारे घर वाले भी हमारी और संदीप की शादी तय कर दिया । जबकि हमारी और संदीप की शादी  हिन्दू रिती रिवाज के साथ बड़ी धूम धाम से 16 जून को सम्पन्न हुई जिसमें दोनों ओर से रिश्तेदार भी शादी में शमील हुए । लेकिन 17 जून की सुबह जब मेरी बिदाई होकर संदीप के घर पहुंची तब घर में हगांमा होने लगा और  मेरी सास और जेठ जेठानी ने मांग किया कि इनको घर में जगह तभी मिलेगी जब चार लाख रूपये और एक कार दहेज में मिलेगी तभी घर में रहने दिया जाएगा नहीं तो हमारे घर में इनके लिए कोई जगह नहीं है । यह हगांमा सुनकर रिश्तेदारों ने मेरे ससुराल पक्ष के लोगों को समझाने भर्सक प्रयास किया लेकिन कोई मतलब नहीं निकला । वहीं संदीप ने कहा कि जहां नई नवेली दुल्हन के आने पर ससुराल में खुशियाँ मनाई जाती है वहीं मेरे भाइयों के मन पैसे के लालच में अन्धे हो गये हैं कि नात रिश्तेदार और समाज का मतलब नहीं रह गया है जबकि इनकी लालच के कारण आज पूरा परिवार खुशियाँ मनाने के बजाय थाने में बैठ कर घड़ियाली आंशु बहा रहा है ।    



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