भारत मे दुग्ध उत्पादन बढ़ा है।
साथ ही बढ़ी है मवेशियों की भीड़ जो दुग्ध उत्पादन के लिए उपयोगी नहीं है।
व्यवसायीकरण के दौर में जहाँ इंसानों के अंगो का व्यापार होता हो वहां गाय की इतनी चिंता, पहले तो अस्वभाविक सी लगी।

फिर लेखक मन उकसाने लगा, विषय के विस्तार में जाने के लिए। तो जो पाया और जो सोचा, वो यहाँ वर्णित है - 

गौ को हिन्दू धर्म मे माता का दर्जा दिया गया है। पुराणों में कहा गया है कि  "या श्री सा गौ"(जो लक्ष्मी /सम्पति/धन है वह गौ है)


तब तो और भी एक षड्यंत्र सा लग रहा हैं  क्योंकि मीट कंपनियों को हाल ही में भारी नफा हुआ है।
 इस पर एक बहुत बड़ी बात लिख रहा हूं यह मेरा स्वयं का विचार हैं। 
सबसे पहले गौ हत्या, गौ मांस की बिक्री पर रोक नहीं थी और लोग खा बेच रहे थे लेकिन जैसे ही इस पर हिंदू भाइयों की आस्था का विषय सामने आया और कुछ छुटपुट घटनाएं भी हुई उसको देखते हुए मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस पर रोक लगाई है और सभी मुस्लिम भाई इसका समर्थन भी कर रहे हैं जिस पर हिंदू भाइयों की आस्था है उसको खाना पीना बेचना उचित नहीं है।
 इसके साथ ही एक  घोटाला होता हुआ नजर आया। यह ज्यादा नफे के लिए किया गया एक षड्यंत्र है जो मुझे लगता है षडयंत्र भी ऐसा कि हर व्यक्ति उसका निगहबान बन गया।
 चरवाहा बन गया और जब हर व्यक्ति किसी चीज का निगरा बन जाता है तो षड्यंत्रकारी को अपने षड्यंत्र को अंजाम देना आसान हो जाता है । बड़ी कमाई हाथों पर मिलेगी बिना मेहनत के बिना मशक्कत के*


अब चलते हैं गोमांस  निर्यात की ओर जैसे ही पूरे देश के अंदर गौ मांस को लेकर तनातनी मार पीट दलित मुस्लिमो को लगातार गोमांस के चक्कर में ठोका बजाया गया, वैसे ही अब बारी पालतू पशुओं को अपने घरों में रखने वाले लोगों के ऊपर आई कि अब वह इन पशुओं को करें क्या? गांव देहात में अधिकतर गाय बैल भैंसों की जो नस्ल होती है वह देसी होती है । गायों की जो नस्ल है, वह एक पाव दूध सुबह एक पाव दूध शाम को देती है। साथ ही बैल भी कमजोर मरियल और भैंसों की भी स्थिति इतनी मजबूत नहीं होती है ।

शहरों के आसपास डेयरी वगैरह में अच्छी नस्ल की गाय भैंस पाई जाती हैं और उनका व्यापार दूध होता है 
इसके साथ ही प्रश्न उठा कि अब यह लोग इनका क्या करें?
 क्योंकि नस्ल तो बराबर बढ़ ही रही है और  साथ में किसानों की किसानी भी खत्म हो रही है।

 यह पालतू जानवर लगातार किसानों की खेतों का दोहन कर रहे हैं और सड़कें भी जाम हो रही हैं चौक चौराहे बस स्टॉप  हर जगह  मवेशी ही मवेशी नजर आ रहे हैं ।
मारपीट के चक्कर में व्यापारी भी हेड़ी वाले जो गांव-गांव घूम घूम कर गाय बैल का व्यापार करते थे उनका भी आना बंद हो गया ।जहां तक की कुछ ऐसी घटनाएं भी हुई है कि कोई व्यक्ति अपने घर में पालने के लिए या खेतों के कार्यो के लिए बैल या पड़ा लेकर जा रहा था या गाय पालने के लिए लेकर जा रहा था उसके साथ भी कुछ तत्वों द्वारा मारपीट की गई।
 ऐसी घटनाओं से लोग डर गए और आज उनकी कीमत निशुल्क तक हो गई है।
 गांव-देहात  में लोग यह बात कह रहे हैं कि मैं फ्री में अपने घर के पालतू जानवरों को दान करना चाहता हूं और लोग दान मै भी अब नही ले रहे हैं।

इन सारी घटनाओं से सीधा फायदा गौ मांस व्यापारियों को हुआ है, जो गौ मांस को विदेशों में एक्सपोर्ट करते हैं उन्हें सस्ते दामों में  पालतू जानवर मिल रहे हैं और कुछ असामाजिक तत्व तो इसका अच्छा खासा धंधा करते हैं ।

मुस्लिम नहीं कर रहा है यह तो निर्दोष सताए जा रहे हैं।
मुस्लिम तो सवाल भी कर रहे हैं कि सरकार कानून क्यों नहीं बनाती है?  यह सब भी वही लोग कर रहे जो इसके निगरा हैं क्योंकि अगर सरकार चाहती तो हिंदुस्तान से मीट का निर्यात सबसे पहले रोकती।
 इसलिए इन सब चक्कर में पड़कर अपने आस्था और श्रद्धा को खराब ना करें और  देश की एकता और सौहार्द को बनाए रखें।
 एकता बनी रहे, सच्चाई को तलाश करने की कोशिश करें।

 और जिन चीजों में किसी के धर्म और आस्था को तकलीफ होती है ऐसी चीजों का सेवन भी ना करें ना ही किसी धर्म संप्रदाय को गलत और बुरा कहें।।

जय हिंद विचार लेखक अब्दुल कादिर खान कलयुग की कलम
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