प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की कमी व सुविधाएं जुटाई नहीं। कई क्षेत्र में एक भी महिला डॉक्टर नहीं

मुख्यमंत्री ने आते ही एलान किया था कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों के डयूटी टाइम में वृद्धि होगी। धन्यवाद कमलनाथ जी।

आपने हमीदिया अस्पताल में अपना इलाज करवाकर एक स्वागत योग्य उदाहरण प्रस्तुत किया है।

लेकिन प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत खराब है। जिला अस्पताल हो या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या फिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सभी जगह स्टाफ की कमी और डॉक्टरों का टोटा है।

कुछ बड़े शहरों के अस्पतालों को छोड़ कर, छोटी जगहों में तो किसी तरह काम चल रहा है जबकि कई पीएचसी में तो डॉक्टर ही नहीं हैं। पीएचसी में डॉक्टर व स्टाफ की पदस्थापना और सुविधाओं की कमी के बावजूद शासन स्तर से कई ग्रामो में  नए पीएचसी मंजूर किए गए हैं। पहले से स्थापित स्वास्थ्य केन्द्रों पर स्टाफ की कमी से आमतौर पर ताला ही लटका रहता है। इस तरह से इस तरह कई अंचलो में स्वास्थ्य सुविधाएं नाकाफी हैं। मजबूरी में लोग अपना इलाज नीमहकीमों के भरोसे कराते हैं।
आजादी के पहले बने स्वास्थ्य केन्द्र अभी भी हैं। मध्यप्रदेश के कुछ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना साल 1940 में की गई थी। तब से अब तक यहां समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। न ही लोगों की मांग के अनुसार पीएचसी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन हो पाया है।

जबकि कई पीएचसी पर 150 या 300 से अधिक ग्राम पंचायतों के ग्रामीण इलाज के लिए निर्भर हैं।

 एक पीएचसी के अंतर्गत ग्रामो में एएनएम और एमपीडब्ल्यू को तैनात किया गया है, लेकिन ये इन गांवों में यदाकदा ही पहुंचते हैं।
 जिससे बच्चों और गर्भवती माताओं का टीकाकरण समय से नहीं हो पाता है। साथ ही ग्रामीणों को इन गांवों में ही स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता है।

जो सुविधाए पुरानी है उनके उन्नयन की मांग पर विचार किया जाना चाहिए।

जानकारी के अनुसार कई पीएचसी में एक डॉक्टर केवल एक ही कंपाउंडर, एक ही लैब टेक्नीशियन, एक दो नर्स, कहीं कहीं सुपरवाइजर, कुष्ठ रोग एनएमए कहीं है कहीं नदारद, दो तीन भृत्य और दो चार वार्ड ब्वॉय  हैं। इनके भरोसे ही 6 से 12 बिस्तर वाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र साधन सुविधाओं के अभाव में किसी तरह संचालित होते हैं है।

पीएचसी के उन्नयन, पीएचसी में डॉक्टर व स्टाफ की पदस्थापना और सुविधाओं की कमी के बावजूद शासन स्तर से ग्रामो में नए पीएचसी मंजूर किए गए हैं।

 ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व में कई बार अंचल में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने और पीएचसी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन कराने के लिए आवाज उठाई गई, लेकिन न उन जगहों के जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया न अधिकारियों ने सुनवाई की। संचालित अस्पतालों में जब सुविधाएं नहीं मिल रही हैं तो नए पीएचसी खोलकर वहां सुविधाएं कैसे जुटाई जाएंगी।


वर्षो से है महिला डॉक्टर की मांग
कई पीएचसी में है।
काफी लंबे समय से महिला डॉक्टरों की पदस्थापना की मांग रही है, जो आज भी है।

महिला डॉक्टर न होने से महिला रोगों से पीडि़त महिलाओं, प्रसूताओं को सबसे अधिक परेशानी होती है। नीरधन व मध्यम वर्ग की महिला मरीजों को स्थानीय सुविधाओं से ही इलाज कराना पड़ता है। मजबूरी में लोग उन्हें बाहर ले जाते हैं। ऐसे में कई बार महिला मरीज शर्म व संकोच के कारण अपनी बीमारी पुरुष डॉक्टर को न बताकर और बीमार हो जाती हैं। वहीं उच्च वर्ग की महिलाओं को इलाज के लिए  अन्य स्थानों तक ले जाया जाता है। लोगों का कहना है कि जब-जब चुनाव आते हैं तब-तब लोगों को पीएचसी के उन्नयन व स्वास्थ्य सुविधाएं सुचारु बनाने का आश्वासन देकर जनप्रतिनिधि वोटों के सहारे चुने जरूर जाते हैं, लेकिन चुनने के बाद वे अपना वादा भूल जाते हैं।

कई जगह मैदान में पर्दे लगाकर पोस्टमार्टम आज भी होता है।

कई पीएचसी में पोस्टमार्टम के लिए जो भवन बनाए गए थे, उनकी समुचित देखरेख न होने से वह जर्जर होता चले गए और अब तो वह खंडहर में तब्दील हो गये है। उन क्षेत्रों में हादसे में मौत या हत्या जैसे मामलों में शव के पीएम के लिए मैदान में ही पर्दे लगाकर खुले आसमान के नीचे पोस्टमार्टम किया जाता है। यह नजारा आसपास रहने वालों के लिए दहशत से कम नहीं है। पीएम हाउस की मरम्मत या नया पीएम हाउस बनवाने के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कई बार कहा गया, लेकिन कोई हल नहीं निकला है। इसके साथ ही कई अस्पतालो की बाउंड्रीवॉल ही पूरी तरह से कवर नहीं है।

उम्मीद है कि इस दिशा में नई सरकार द्वारा प्रयास किए जाएंगे।


छोटी जगहों के पीएचसी के उन्नयन, स्वास्थ्य सुविधाएं सुचारु बनाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।

नवनिर्वाचित सनसद के समक्ष ये प्रस्ताव रखकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के उन्नयन व सुविधाएं जुटाने की हरसंभव कोशिश की जानी चाहिए।

नगर परिषद अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे
विधानसभा में मुद्दा उठाएं।

हर जगह पीएचसी का, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन होना जरूरी है। इस संबंध में आगामी दिनों में विधानसभा सत्र के दौरान मैं प्रमुखता से ध्यानाकार्षण लगाना चाहिए और सवाल उठाना चाहिए। इस दिशा में प्रमुखता से हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए।
वर्तमान स्थिति में, यह हर विधायक के लिए, पत्रकार बंधुओं के लिए और जिम्मेदार नागरिक के लिए सुधारात्मक सजगता का आवश्यक विषय होना चाहिए
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