देखा जा रहा है कि बलात्कार के  अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं हमारे देश के अंदर क्यों नहीं ऐसे कानून बनाए जाते हैं जिससे ऐसे अपराधों पर जल्द कार्रवाई हो सज़ा हो फॉरेन अपराधों के समर्थक व बचाव करने वालों के ऊपर भी  कठोर कार्यवाही हो वह किसी भी धर्म संप्रदाय के हो अपराध को अपराध के नजरिया से रखा जाए और उन पर सख्त कार्रवाई हो मुजरिम पकड़े जाने के बाद भी जुर्म साबित होने के बाद भी कोर्ट मै कार्यवाही चलती रहती है और निर्दोष बच्चियों के परिजन थक हार कर बैठ जाते हैं या उन दोषियों के दबाव में आकर अपना केस वापस ले लेते हैं ऐसा कब तक चलेगा आज एक निर्दोष  बच्ची की इज्जत तार-तार हुई है हां हां मैं उसी  बेटी की बात कर रहा हूं ट्विंकल शर्मा जिसके साथ घिनौना अपराध हुआ है ऐसे ही कढुआ  जम्मू कश्मीर की आसिफा के साथ और इस जैसी सैकड़ों बेटियों के साथ ऐसी घटनाएं हो चुकी लेकिन इस देश की कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था को देखकर  अपराधियों के हौसले और बुलंद होते चले जा रहे है इन अपराधों में क्या कहता है इस्लामी कानून

टुवीन्कल शर्मा के साथ हुई इस घटना पर लोग इस्लाम पर तंज कस रहे हैं जबकि इस्लाम धर्म और इस्लाम धर्म  को मानने वाले तो स्वयं ही फांसी की मांग कर रहे हैं इस्लाम धर्म में जो सजा बताई गई है दुष्कर्म बलात्कार की वह बड़ी सख्त है अगर ऐसे कानून देश के अंदर बन जाए तो निश्चित तौर पर ऐसी घटनाओं में काफी प्रतिबंध रोक लगेगी और लोग  ऐसा करने में घबराने मजबुर होंगे इस्लाम  में कहा गया है कि जब कोई व्यक्ति ऐसा कुकर्म करें तो उसे जमीन में गाड़ कर पत्थरों से मार मार कर संगसार किया जाए और अगर ट्विंकल शर्मा के साथ किए गए कुकर्म में कोई मुसलमान पकड़ा गया है और गुनाह साबित हो रहा है तो देश के अंदर अगर सबसे पहले कानून बने तो उन्हीं दोषियों के ऊपर इस कानून का सबसे पहले उपयोग हो और उन्हें फांसी की सजा दी जाए हजारों और बेटियों की इज्जत बचाई जा सके इस्लाम को मानने वाले कभी ऐसी घटनाओं के समर्थन में खड़े नहीं होंगे बल्कि हम तो चाहते हैं कि ऐसे कानून देश के अंदर लाए जाएं ऐसी शर्मसार करने वाली घटनाओं पर प्रतिबंध लगे यहां तक कि इस्लाम में तो यह भी है कि अगर किसी की बेटी  किसी की बीवी किसी की बहन की किसी की भाभी किसी की पत्नी किसी की मां  पर नजर पड़े तो अपनी नजरों को झुका ले  क्योंकि नजरों का भी पर्दा है  और कैसे जुर्म में किसी धर्म विशेष को टारगेट करना उचित नहीं ऐसे कुकर्म व्यक्ति विशेष ही कर सकता है और हमारा तो यह कहना है कि अगर इस जुर्म को करने वाला मुसलमान है तो सबसे पहले उसे फांसी की सजा दी जाए हां मैं मुसलमान हूं लेकिन बलात्कारियों के साथ नहीं हां मैं मुसलमान हूं लेकिन कातिलों के साथ नहीं हां मै मुसलमान हुं मगर आतंकवादियों के साथ नहीं हां मैं मुसलमान हुं सच्चों के साथ और सच्चाई के साथ

 जय हिंद लेखक विचारक अब्दुल कादिर खान कलयुग की कलम

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