शंकरगढ़ में पानी की व्यवस्था ना होने से आखिर कैसे डालें किसान धान की नर्सरी

KKK न्यूज़ रिपोर्टर

        नैनी

  सुभाष चंद्र

प्रयागराज जमुनपार  जसरा शंकरगढ ब्लॉक  सिंचाई व्यवस्था के उद्देश्य से अगर अध्ययन किया जाए तो यह स्पष्ट है कि शंकरगढ में  पानी नहीं हैं सूख गए हैं। सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने में इसका कोई असर नहीं दिखा  इसके लिए लाखों रुपए खर्च करके छोटी छोटी नहर भी निकाली गई थी यह सारी व्यवस्था देख कर किसानों के चेहरे भी खिल उठे थे।किसानों में उम्मीद जगी थी की इन नहरों से अब उनके खेतों की प्यास बुझ जाएगी।परन्तु समय के साथ यह नहर उदासीनता की भेंट चढ़ गया पानी के अभाव में अब  का हलक भी सूख रहा है।वही किसान नहर निर्माण के लिए अपने खेत देकर भी प्यासे हैं।एक दशक से इस नहर की  सूखी पड़ी है, कभी खुशी के साथ नहर निर्माण के लिए खेत देने वाले किसान अब पानी के लिये सिर पर हाथ धरे बैठे हैं। उनके पास खेती के लिए ना तो पर्याप्त जमीन है और ना ही बचे हुए खेत की सिंचाई के लिए नहरों में पानी खुश चेहरे *शंकरगढ मे कहीं तो नाहर की भी व्यवस्था नहीं* हुई वस्तुएं अब मुरझा चुके हैं। पानी के अभाव की नगदी फसल की खेती करने के लिए किसानों को पंपिंग सेट का सहारा लेना पड़ रहा है। जो काफी महंगा तो है ही साथ ही समय के साथ डीजल उपलब्ध ना होने के कारण काफी परेशानियो भरा भी है।ऐसे में किसानों ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए सूखे नहार व तालाब में पानी पहुंचाने की मांग की है। *और जहां नाहर नहीं है वहां नाहर की व्यवस्था कराई जाए* जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सके और किसान पानी के लिये दर दर ना भटके को मजबूर हैं।
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