राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मदद से मयंक की भेंगेपन की परेशानी दूर हुई

Kkkन्यूज खण्डवा-  जिले की पंधाना तहसील के ग्राम गरणगांव निवासी श्री दिनेष दांगोडे के 4 वर्षीय पुत्र मंयक की आंखों में जन्म से ही भंेगापन था, इस जन्न्मजात विकृति की वज़ह से मंयक को साफ दिखाई देने में परेषानी होती थी और आस-पास के बच्चे भी उसका मजाक उडाते रहते थे। एक दिन स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डॉ. माधुरी सिंह, डॉ. अखलाक अंसारी की टीम गरणगांव पहंुची जहां मंयक की आर.बी.एस.के टीम द्वारा जांच की गई। जांच के बाद चिकित्सकों ने बच्चे के पिता श्री दिनेष दांगोडे को बताया की आपके बच्चे का ऑपरेषन निःषुल्क हो सकता है व ऑपरेषन के बाद बच्चे की विकृति भी दूर हो जाएगी और बच्चा ठीक देख सकेगा। यह सुनकर दिनेश को भरोसा ही नही हो रहा था कि ऐसा भी हो सकता है। लेकिन जब डॉक्टर अंसारी ने दिनेश को भरोसा दिलाया कि ऑपरेशन के बाद बच्चा पूरी तरह से सामान्य हो जायेगा, तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा।राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला समन्वयक श्री विनोद पंवार ने दिनेश को सलाह देकर मयंक का अस्पताल में पंजीयन कराया और आर.बी.एस.के योजना अतंर्गत बच्चे की आंखों की जांच जिला अस्पताल के नेत्र रोग विषेषज्ञ से करवाई। उपचार के लिए बच्चे को इंदौर चौईथराम नेत्रालय अस्पताल इन्दौर रेफर कर वहां उनकी सभी जांचे योजना अंतर्गत निःषुल्क की गई। ऑंख के ऑपरेशन के लिए प्रकरण तैयार कर जिला स्तरीय समिति का अनुमोदन प्राप्त कर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.एस चौहान द्वारा ऑपरेषन हेतु आदेष जारी किये गए। मंयक की आंखो की सर्जरी चौईथराम नेत्रालय इंदौर में सफलता पूर्वक की गई। अब मंयक की आंखे भी सामान्य बच्चों की तरह बिल्कुल ठीक हो गई है। बच्चे के पिता श्री दिनेष दांगोडे बताते है कि बच्चे के जन्म के समय से ही वे हमेशा चिंतित रहते थे कि बच्चे का भविष्य कैसा होगा। वह कैसे पढ़ लिख पाएगा, लेकिन अब निःशुल्क ऑपरेशन हो जाने के बाद बच्चा मयंक बिल्कुल सामान्य बच्चे की तरह से ही देखने लगा है। दिनेश वह उसका पुत्र मंयक दोनों अब बहुत खुष है। 


सोनू त्रिपाठी रिपोर्टर
कलयुग की कलम
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