वट वृक्ष का धार्मिक महत्व तो है ही वैज्ञानिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है


 ये हिंदू धर्म इतना सहिष्णु माना गया है कि वह प्रकृति तक से कृतज्ञता ज्ञापित करता है। सूर्य, चंद्र, वायु, जल, पृथ्वी जो भी कुछ देता है उसे देवता तुल्य माना गया है। इसी प्रकार बरगद के वृक्ष को भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। भारत का राष्ट्रीय वृक्ष होने के साथ यह धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इस पेड़ के पत्ते, फल और छाल शारीरिक बिमारियों को दूर करने के काम आते हैं।
वट वृक्ष का धार्मिक महत्व
इस वृक्ष को वट के नाम से भी जाना जाता है। इसकी जड़ें जमीन में दूर-दूर तक फैल जाती हैं। मान्यता है कि इसकी छाल में विष्णु, जड़ों में ब्रह्मा और शाखाओं में शिव विराजते हैं। जैन धर्म में मान्यता है कि तीर्थंकर ऋषभदेव ने अक्षय वट के नीचे तपस्या की थी। यह स्थान प्रयाग में ऋषभदेव तपस्थली के नामसे जा ना जाता है।
उपचार में भी है मददगार
पेड़ की पत्तियां एक घंटे में 5 मिली लीटर ऑक्सीजन देती हैं। यह वृक्ष दिन में 20 घंटे से ज्यादा समय तक ऑक्सीजन देता है। इसके पत्तों से निकलने वाले दूध को चोट, मोच और सूजन पर दिन में दो से तीन बार मालिश करने से काफी आराम मिलता है। यदि कोई खुली चोट है तो बरगद के पेड़ के दूध में आप हल्दी मिलाकर चोट वाली जगह बांध लें, घाव जल्द भर जाएगा।
Share To:

Post A Comment: