विजयवर्गीय की जमानत पर विशेष कोर्ट आज कर सकती है सुनवाई, सैल्यूट आकाश के लगे पोस्टर

विधायक समर्थकों ने  शहर में कई जगह पर आकाश सैल्यूट के पोस्टर लगाए गए, निगम ने हटाए

विधायक ने निगम की कार्रवाई के दौरान आधिकारी के बल्ले से पिटाई कर दी थी

इंदौर. नगर निगम अधिकारी की बल्ले से पिटाई करने वाले विधायक व भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश के मामले में शुक्रवार को भोपाल की विशेष अदालतसुनवाई करसकती है। गुरुवार को उनकी तरफ से अपर सत्र न्यायालय में जमानत अपील दायर की गई थी।

कोर्ट ने यह कहते हुए अपील खारिज कर दी कि मंत्री, विधायकों से जुुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए भोपाल में एक कोर्ट निर्धारित कर दी गई। इस कोर्ट को जमानत अर्जी पर सुनवाई का अधिकार नहीं है। उधर, नगर भाजपा ने गिरफ्तारी के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। शुक्रवार को भाजपा नेता राजवाड़ा पर धरना देंगे। वहीं अकाश के समर्थन में शहर में जगह-जगह लगे सेल्युट आकाश के पाेस्टरों को निगम ने हटा दिए हैं।क्या कहते हैं कानून के जानकार?

उधर, विधि के जानकारों के मुताबिक अधिनियम 1951 (रिप्रेजेंटेशन आॅफ द पीपल एक्ट) के तहत यदि विधायक आकाश विजयवर्गीय के खिलाफ जिन धाराओं में केस दर्ज हुआ है वह ट्रायल के दौरान साबित हो जाती हैं तो वह चुनाव लड़ने के लिए छह साल के लिए अयोग्य हो सकते हैं।

इस मामले में फैसला आने के वक्त वह विधायक रहे तो फैसले पर तीन महीने तक अमल नहीं होगा। इस अवधि में वह फैसले को चुनौती दे सकते हैं। चुनौती देने के बाद भी राहत नहीं मिलती तो जितनी सजा होगी उसे भुगतने के बाद अगले छह साल तक वह कोई चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। जहां तक अधिकतम सजा की बात है तो धारा 147 और 148 के तहत कम से कम दो वर्ष और अधिकतम सात साल की सजा हो सकती है।

16 केस इंदौर से ट्रांसफर किए जा चुके हैं

पिछले साल सेविधायक, सांसद और राजनीतिज्ञों से जुड़े 16 मामले इंदौर जिला व सत्र न्यायालय से भोपाल भेजे गए हैं। इनमें चक्काजाम, मारपीट, धरना, चेक बाउंस से लेकर अन्य मामले हैं। कांग्रेस के पूर्व मंत्री रामेश्वर पटेल, सीपी शेखर सहित अन्य नेताओं के मामले शामिल हैं। पिछले साल चुनाव सेे पहले मंत्री जीतू पटवारी को भी भोपाल न्यायालय से ही बरी किया गया था। चंदन नगर में चक्काजाम व अन्य धाराओं में उन पर केेस दर्ज किया गया था।

कांग्रेस नेता की जमानत का हवाला दिया आकाश ने

आकाश की ओर से पेेश जमानत अर्जी में धार के पूर्व विधायक व कांग्रेेस नेता बालमुकुंद सिंह गौतम को इंदौर कोर्ट से दी गई जमानत का हवाला दिया गया। अर्जी में लिखा कि उन्हें भी जमानत इंदौर से ही मिली। इस मामले में इंदौर की कोर्ट सुनवाई कर सकती है। लेकिन आकाश की दलील को कोर्ट द्वारा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि गौतम को जमानत मप्र हाई कोर्ट के 26 फरवरी 2018 को जारी हुए नोटिफिकेशन से पहले दी गई थी इस वजह से आकाश की अर्जी को सुुना नहीं जा सकता।

सीएम कमलनाथ बोले- यह बड़े दुख की बात है। भाजपा नेताओं के ऐसे काम को पूरा प्रदेश देख रहा है। इस मामले में अब पुलिस को साबित करना है कि उसकी कार्रवाई सही है।

कमलनाथ, मुख्यमंत्री 

भाजपा को विश्वास नहीं

दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया- पहले आवेदन, फिर निवेदन और फिर दनादन। क्या इससे स्पष्ट नहीं होता कि भाजपा को न नियम, न कानून, न संविधान पर विश्वास है।

हत्या और दुष्कर्म के दोषी के साथ कैद विधायक

आकाश विजयवर्गीय जिला जेल की वार्ड नंबर 6 के सेल में है। उनके साथ सजायाफ्ता कैदी धनपाल व सुरेश हैं। धनपाल को हत्या के आरोप में 10 साल और सुरेश को दुष्कर्म के अारोप में 7 साल की सजा हुई है।

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