इस बार गांव से टेंपो पकड़ कर ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जाने की मेहनत भी नहीं करनी पड़ी।

पिछली बार जब गुड्डू के पिता राजेश उसे दिखाने ब्लॉक पर पहुंचे, तो जानकारी मिली की डॉक्टर साहब भी उस ही दिन छुट्टी पर थे। फिर क्या था ब्लॉक से बस पकड़कर कर, तपते शरीर वाले गुड्डू को लिए, जिला अस्पताल तक की दौड़ लगी थी।

खर्चा तो खर्चा, दिहाड़ी का नुक्सान अलग हुआ था। 

अब इस बार तो राजेश भी काम से लखनऊ गया हुआ था। अब कैसे सारी दौड़ होगी सोच सोच कर झुमकी का माथा भी गर्म हुआ जा रहा था।

दरवाजे पर दस्तक हुई।

ए. एन.एम. दीदी को फोन तो लगाया था भोर में, शायद वही होंगी।

पट्टी करी, नव्ज़  देखी और फिर झुमकी के चेहरे पर राहत से चिंता की कुछ लकीरें कम हुयीं। 

क्योंकि इस बार ए. एन.एम दीदी ने उसे बताया की अब गांव की सड़क पार कर खुले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ही मुंबई के डॉक्टर सीधे स्क्रीन से मरीजों को देख रहे हैं।

गुड्डू को मुंबई के नानावती अस्पताल की डॉ अंजली ने टेलीमेडिसिन (दूरस्थ उपचार) सेवा के जरिए देखा। हाल -चाल और लक्षण स्क्रीन से सीधे पूछे।जाँचें सीधे मशीन से नापी। दवाइयां वही बताईं जो निशुल्क वहीं केंद्र पर मिल गयीं। एक मुस्कान के साथ गुड्डू ने डॉ अंजली को "बाय" बोला। दवा लेकर वो झुमकी के साथ सड़क पार कर घर पहुंचा।

गुड्डू लखनऊ से 110 किलोमीटर दूर जिला हरदोई के गांव झरोईयाय (बेनीगंज) में रहता है।

डॉक्टर अंजली हरदोई से 1376 किलोमीटर दूर मुंबई के विश्व प्रसिद्ध नानावती हॉस्पिटल में कंसलटेंट हैं। 

कभी टेलीमेडिसिन के बारे में सिविल्स की पढ़ाई के समय किताबों से जाना था, आज उस टेक्नोलॉजी की अद्भुत क्षमता से इलाज होता अपनी आंखों से देखा।

डॉक्टर अंजली से बात की, सराहा। 

झुमकी से उसकी कहानी को जाना, समझा।

बदलाव संभव है

(हरदोई के बेनीगंज में प्रदेश के पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तरीय टेलीमेडिसिन सुविधा के उद्घाटन के समय का वृतान्त। 

प्रदेश सरकार और HCL Technologies का धन्यवाद जिन्होंने CSR से यह संभव कर दिखाया।)


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