आचार्य चाणक्य कहते हैं कि-

अर्थनाशं मनस्तापं गृहिणीचरितानि च।

नीचवाक्यं चाऽपमानं मतिमान्न प्रकाशयेत्।।

इस श्लोक में पहली बात ये बताई गई है कि हमें कभी अर्थ नाश यानी हमारे धन की हानि से जुड़ी बातें किसी पर जाहिर नहीं करना चाहिए।यदि हमें धन की हानि का सामना करना पड़ रहा है और हमारी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है तो यह स्थिति किसी पर जाहिर नहीं करना चाहिए, क्योंकि जब ये बात सभी को मालूम हो जाएगी तो धन संबंधी मामलों में कोई भी हमारी मदद नहीं करेगा। समाज में गरीब व्यक्ति को धन की मदद आसानी से प्राप्त नहीं हो पाती है। अत: इस बात को सदैव राज ही रखना चाहिए।

चाणक्य ने गुप्त रखने योग्य

 दूसरी बात यह बताई है कि हमें कभी भी मन संताप यानी दुख की बातें किसी पर जाहिर नहीं करना चाहिए। यदि हम मन का संताप दूसरों पर जाहिर करेंगे तो लोग उसका मजाक बना सकते हैं, क्योंकि समाज में ऐसे लोग काफी अधिक हैं जो दूसरों के दुखों का मजाक बनाते हैं। ऐसा होने पर दुख में और बढ़ोतरी हो जाती है।

ज्योतिषाचार्य

गुप्त रखने योग्य तीसरी बात- यहां दिए गए श्लोक में तीसरी गुप्त रखने योग्य बात है गृहिणी (पत्नी) का चरित्र। समझदार पुरुष वही है जो अपनी पत्नी से जुड़ी सभी बातें गुप्त रखता है। घर-परिवार के झगड़े, सुख-दुख आदि बातें समाज में जाहिर नहीं करना चाहिए। जो पुरुष ऐसा करते हैं, उन्हें भविष्य में भयंकर परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।

चौथी बात- यदि जीवन में कभी भी किसी नीच व्यक्ति ने हमारा अपमान किया हो तो वह घटना भी किसी बतानी नहीं चाहिए। ऐसी घटनओं की जानकारी अन्य लोगों को मालूम होगी वे भी हमारा मजाक ही बनाएंगे और हमारी प्रतिष्ठा में कमी आएगी।

कष्टं च खलु मूर्खत्वं कष्टं च खलु यौवनम्।
कष्टात् कष्टतरं चैव परगेहे निवासनम्।।
आचार्य चाणक्य के अनुसार किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा दुख है मूर्ख होना। यदि कोई व्यक्ति मूर्ख है तो वह जीवन में कभी भी सुख प्राप्त नहीं कर सकता। वह जीवन में हर कदम दुख और अपमान ही झेलता है। बुद्धि के अभाव में इंसान कभी उन्नति नहीं कर सकता।

जवानी भी दे सकती है कष्ट
आचार्य चाणक्य ने जवानी को भी एक कष्ट बताया है। जवानी भी दुखदायी हो सकती है, क्योंकि जवानी में व्यक्ति में अत्यधिक जोश और क्रोध होता है। कोई व्यक्ति इस जोश को सही दिशा में लगाता है, तब तो वह निर्धारित लक्ष्यों तक अवश्य ही पहुंच जाएगा। इसके विपरीत यदि कोई इस जोश और क्रोध के कारण गलत कार्य करता है तो वह बड़ी परेशानियों में घिर सकता है।

पराए घर में रहना भी है कष्टदायक
इन दोनों कष्टों से कहीं अधिक खतरनाक कष्ट है, किसी पराए घर में रहना। यदि कोई व्यक्ति किसी पराए घर में रहता है तो उस इंसान के लिए कई प्रकार मुश्किलें सदैव बनी रहती हैं। दूसरों के घर में रहने से स्वतंत्रता पूरी तरह खत्म हो जाती है। ऐसे में इंसान अपनी मर्जी से कोई भी कार्य नि:संकोच रूप से नहीं सकता है। आमतौर पर पराए घर में रहना कभी भी सुखद नहीं होता है, इससे कष्ट ही मिलता है I
ज्योतिषाचार्य
डॉ. प्रणयन एम. पाठक

जय माता दी.
 सुप्रभातम.
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