शिक्षा को निजी क्षेत्र से हटाकर पूर्णता सहकारी किया जाए

क्या वजह है कि ग्रामीण क्षेत्र के  पालक नहीं लेते बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए रुचि क्यों होते हैं ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे जादा फेल

प्राथमिक माध्यमिक शिक्षा के आगे क्यों नहीं पढ़ पाते ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे ऐसे कुछ सवालों के जवाब के लिए पढ़िए लेखक अब्दुल कादिर खान की कलम से एक महत्वपूर्ण लेख  कलयुग की कलम के लिए

आज का विषय शिक्षा में बृद्धि के लिए क्या किया जाए 80%बच्चे  10 वी में  फेल हुए ग्रामीण छेत्र में सरकार को क्या चिंता है 

अपनी खुली राय।एक मंच के माध्यम से प्राप्त हुई

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Neha Ji: केंद्र सरकार ने बजट में शिक्षा के विषय को हाशिए पर रख दिया है।

यहाँ तक कि निर्यातित विदेशी किताबों के मूल्य में भी बृद्धि हुई है

Neha Ji: जब केंद्र सरकार प्रयासरत है कि शिक्षा सुलभ न हो तो आम जनता क्या कर सकती है

Neha Ji: शिक्षा के सुधार के लिए केंद्र सरकार के बदलाव के लिए प्रयास किया जाना चाहिए

 92767 67670: जो बच्चे फेल हुए उनके दैनिक जीवन की दिनचर्या ओर आसपास के माहौल पर रिसर्च होना चाहिए। 

क्या सब के हालात एक जैसे है या उनके खान पान में कोई कमी है। सब बातों का बारीकी से अध्ययन जरूरी है

Neha Ji: सरकारी स्कूलों में बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। कॉपी-किताबें और दोपहर का भोजन दिया जाता है, स्कूल यूनिफॉर्म के साथ साथ छात्रवृत्ति भी दी जाती है।

 92767 67670: बच्चे सब स्कूल से लेते है सिर्फ शिक्षा ही नही लेते!!

 78285 31958: सारा दिन टीचर मस्ती काटते

 78285 31958: भोजन की कोई गुडवत्ता नहीं


Abdul Kadir Khan: 
क्या शिक्षकों से अन्य कार्य लिए जाते हैं वह बंद होना चाहिए

 Neha Ji: लेकिन जिस प्रकार वर्तमान सरकार, सरकारी नॉकरियों को अनिश्चितता पूर्ण एवं पारम्परिक पेन्सन विहीन बना रही है सम्भव है काबिल लोग इस तरह दूर होते जाएँ। 

शिक्षक कहाँ से मिलेंगे

 92767 67670: निजी स्कूल से ज्यादा अनुभवी शिक्षक सरकारी स्कूल में रहते है।
किन्तु निजी स्कूल की तरह शिक्षकों की मॉनिटरिंग नही होती जिससे वे भी सरकारी स्कूल के बच्चो की तरह  डब्बू हो रहे।

Neha Ji: सरकार की चाकरी नही करेंगे तो उनको असक्षम बोल कर निकाल देगा वो

 78285 31958: हमने कई बिद्यालयों का पूर्व मे निरिक्षण किया था इसलिए हमें पता है स्थिति का
 Abdul Kadir Khan:
 क्या भोजन के अलावा बैठने पंखे और स्कूल परिसर के आसपास की व्यवस्था भी सही होना चाहिए

 78285 31958: 
सही होना थी पर अब नहीं सारा घोटाला

Abdul Kadir Khan:
 क्या शिक्षा में सुधार करने के लिए राज्य सरकार भी कुछ बेहतर प्रयास कर सकती है

Abdul Kadir Khan: 
किया शिक्षा को नौकरी से जोड़ना उचित है

 92767 67670: 

बिना डिग्री की नोकरी नही मिलती

  78285 31958: 
राज्य सरकार पहले भर्ती करे जो रोकी हुई है

 Neha Ji: 
अगर शिक्षा बजट का जायजा लिया जाए तो हम पाएंगे कि हर वर्ष सरकारी स्कूलों के लिए प्रदेश सरकार अरबों रुपए का बजट देती थी।

इसके बावजूद सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। क्योंकि 15 साल से मध्यप्रदेश वनवास जैसे ही रहा

केंद्र की बात करें तो ,वित्त मंत्री ने इस बार के शिक्षा बजट में शिक्षा के लिए बजट नही बढ़ाया है, इससे इस क्षेत्र को क्या उपलब्ध कराने की मंशा है, ईश्वर जाने।

 Abdul Kadir Khan
: क्या सरकारी स्कूलों में भी ज्यादा दूरी के कारण बच्चों को असुविधा होती है उन्हें
बस और गाड़ियों की सुविधा उपलब्ध  कराना चाहिए सरकारों को
 78285 31958: अधिकांश लड़कियो की समस्याए देखने को मिली है
Abdul kadir khan
 क्या गांव के बच्चों को शहर के  शिक्षकों से इंटरनेट के जरिए जोड़ा जाना चाहिए जिससे शहरी शिक्षा का भी ग्रामीण बच्चों को लाभ मिल सके

Neha Ji: गाँव के बच्चों को शहर के शिक्षकों से इंटरनेट के जरिए जोड़ना बहुत अच्छा विचार है।

Neha Ji: इंटरनेट क्लास से एक बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है

 Abdul Kadir Khan
: क्या बेटियों के लिए अलग से महिला गार्ड की व्यवस्था करना सही रहेगा जो  उनकी अवस्थाओं का ध्यान रखें

 Neha Ji: देश में 10,14,491 सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जगह खाली है। माध्यमिक स्तर पर 14.9 प्रतिशत और प्राइमरी स्टार पर 17.5 प्रतिशत अध्यापकों की कमी है पहले तो इसकी पूर्ति पर ध्यान देना आवश्यक है

 Neha Ji: आज से 46 वर्ष पहले जब इस विषय की शुरुआत हुई, तब साक्षरता की बहुत कमी थी


 78285 31958: लेकिन महाविद्यालय  विश्वविद्यालय तो जुड़ नहीं पाए अभि तक इंटरनेट से

Neha Ji: डिजिटल इंडिया


 Abdul Kadir Khan: 
क्या स्कूलों में पुरुष शिक्षकों के साथ साथ महिलाओं का शिक्षक होना भी अनिवार्य होना चाहिए

 78285 31958: 
नई भर्ती तो सरकार कर नहीं रही है क्या अब पुरुषों को हटाना चाहते हैं आप

 Abdul Kadir Khan: 
क्या प्राथमिक शिक्षा का स्तर ज्यादा गिरा हुआ है हाई स्कूल हाई सेकेंडरी के  स्तर के हिसाब  से
क्या प्राथमिक स्तर में सही शिक्षा ना मिलने की वजह से आगे बच्चों का ग्रोथ नहीं हो पा रहा है

Abdul Kadir Khan: क्या  स्कूलों में बच्चों की मौखिक परीक्षा होना चाहिए जिससे उनके अंदर  की प्रतिभा और शैली समझ मैं आए

 78285 31958: मौखिक परीक्षा नहीं पाठ्यसहगामी क्रियाए होना चाहिये

Abdul Kadir Khan: क्या ग्रामीण क्षेत्रों में पालकों के अंदर भी बच्चों के पढ़ाने के लिए उत्सुकता बढ़ाने हेतु चौपाल लगाकर समझाने की भी कोई योजना बनाने की आवश्यकता है

 78285 31958: 
स्कूल चले हम

Neha Ji: 
गांवों में स्कूली शिक्षा को बेहतर करने के सरकारी वादों और दावों के बावजूद सच यह है कि आधे छात्र अपनी कक्षा से निचली कक्षाओं की किताबें पढ़ने और गणित के मामूली सवाल हल करने में अक्षम हैं.   

 महेन्द्र पटेल जी: कुछ गरीब माता-पिता बच्चों की पढ़ाई लिखाई में कर्ज़ करके पैसा लगाते हैं और उनको पढ़ा लिखा कर दे एक होनहार और काबिल व्यक्ति बनाते हैं परंतु मैंने अक्सर देखा कि जब वह बच्चा पढ़ लिख कर के बड़ा हो जाता है तो उन माता-पिता ओं का भी सगा नहीं होता पता नहीं यह शिक्षा और बच्चा कहां से प्राप्त करता है

 Abdul Kadir Khan: 
क्या पढ़े लिखे लोगों को नौकरी ना मिलने से बच्चों को आगे पढ़ाने के लिए लोगों के अंदर का मनोबल टूट रहा है

 Neha Ji: 
बजट ही नही है, शिक्षकों की भर्ती पेन्सन आदि की व्यवस्था नही है, कैसे होगा?

 78285 31958: 
नैतिकता समन्धित पाठ पाठ्यक्रम निर्माताओ को समाहित करना चाहिए सामाजिक जीवन दिनचर्या पाठ संदेश

 Neha Ji: भले ही कुछ मामलों में गिने-चुने राज्यों के आंकड़े देश के अन्य हिस्सों से बेहतर हैं, पर निचली कक्षाओं में मामूली सुधार को छोड़ दें, तो पूरे देश में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है. ग्रामीण भारत सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्तर पर भयावह पिछड़ेपन से लगातार जूझ रहा है  
 Neha Ji: सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा के अधिकार कानून, शिक्षा अधिकर की वसूली जैसे उपायों के बावजूद अगर ग्रामीण छात्र शिक्षित नहीं हो पा रहे हैं, तो यह सरकार और समाज की सोच और दिशा पर बड़ा सवालिया निशान है.   

सतेंद्र सिंग
बच्चों के भविष्य के साथ  खिलवाड हो रहा है. नाम के लिये स्कूल है, नेताओं के बेटे विदेश मे पढते है. ✍

 Neha Ji: 
आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों- बिहार, झारखंड, बंगाल, असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि- में समस्या तुलनात्मक रूप से अधिक गंभीर है.    

झारखंड, बंगाल, बिहार, गुजरात, राजस्थान और तमिलनाडु में तो पढ़ने की क्षमता पिछली रिपोर्ट के आंकड़ों से भी कम हुई है. 

Abdul Kadir Khan:

 क्या बच्चों को दैनिक दिनचर्या से संबंधित पारिवारिक संबंधों से संबंधित भी शिक्षा देने की आवश्यकता है

 बच्चों को मां बाप के साथ पड़ोसी के साथ और समाज में रहने बातचीत करने और धर्म से रिलेटिव पढ़ाई भी जरूरी है और इसकी व्यवस्था होना चाहिए

Neha Ji: 
सौचालय सौचालय करने वाली सरकार के लिए चिंताजनक है।

 कि केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी स्कूलों में बच्चियों के लिए शौचालय की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है. 

सरकारी स्कूलों की बदहाली का एक नतीजा बच्चों के निजी स्कूलों की ओर रुख करने के रूप में सामने है.   

महेंद्र पटेल जी 98932 22114: कभी-कभी गांव के रहने वाले माता पिता उन बच्चों को उच्च शिक्षा हेतु किसी बड़े शहर में या बाहर भेजते हैं और एक लिमिटेड पैसा उनको खर्च हेतु दिया जाता है परंतु मैंने देखा है कि बड़े शहरों में वह बच्चे कुछ गंदी लतों  में लग जाते हैं जिससे भी से वंचित रहते हैं और अपना भविष्य गलत काम करके खराब कर लेते हैं ऐसे में उन माता-पिता की सोच पर पानी फेर देते हैं ।
इस मे माता पिता का मैं कोई दोष नहीं समझता हूं क्योंकि वह गांव में रहते हैं वह शहर की हवाओं से वाकिफ नहीं होते हैं।
आवश्यकता है  सारे मूल्यों को पाठ्यसहगामी क्रियाओ मे कौशल परिपूर्ण कारने की  

Neha Ji: हमारा देश  उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार था।

अब शिक्षा पर अपने सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) का मामूली हिस्सा ही खर्च करने का निर्णय ले चुका है. इसे बढ़ाने की जरूरत है.

 इसके बिना शिक्षकों को जरूरी प्रशिक्षण देना और समुचित संसाधन उपलब्ध कराना संभव नहीं हो सकेगा.  

अच्छे काबिल लोगो का इस ओर रुझान भी नहीं रहेगा

 Neha Ji: काबिल लोग कोम्प्रोमाईज़ नही करते, देश में ब्रेन ड्रेन की गम्भीर समस्या बनने जा रही है।

 78285 31958: समय समय पर अभिभावको का दायुत्व बनता है की अपने बच्चो के संदर्भ मे गुरुजनो से मिलते रहे और प्रत्येक बिद्यालय के लीडर को भी मिलने का कार्यक्रम सुनियोजित करना चाहिए

Abdul Kadir Khan:
 क्या वजह है कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे दसवीं तक ही पहुंच पाते हैं आगे पढ़ाई की रुचि नहीं रह जाती और फेल भी हो जाते हैं ज्यादातर लोगों की राय है प्राथमिक माध्यमिक शिक्षा का स्तर बहुत खराब है आपकी क्या राय

 78285 31958: बहुत सारे कारण हो सकते जानने के लिए प्रश्नवली ब्यक्तिगत परिछड के अंतर गत रखा जाता

 88251 76370:
 हाई स्कूल मैं ही दिक्कत है।
वहीं प्रत्येक दिन पढ़ाई होनी चाहिए।
 88251 76370:
 10th में अलग से  कोचिंग की भी जरूरत हैं
लेकिन कोचिंग के लिए ग़रीबों के बच्चे पैसे देने में अष्क्षम होते है

 88251 76370: 
इस वजह से नहीं जा पाते

Neha Ji:
 जब तक बजट नही होगा कुछ भी मुमकिन नही है।

पाठ्यक्रम पूरा करने की जगह सीखने की क्षमता बढ़ाना पढ़ाई की प्राथमिकता बने. 

बढ़ती युवा आबादी को रोजगार और जीवनयापन के बेहतर मौके उपलब्ध कराना फिलहाल एक गंभीर चुनौती बनी हुई है. 

ऐसे में आज प्रारंभिक स्कूलों में पढ़ रहे 18 करोड़ छात्रों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो अर्थव्यवस्था इस दबाव को बर्दाश्त नहीं कर सकेगी.   


भीख मांगना और पकोड़े तलना रोजगार नही है।

केकड़े के डंक मारने से बांध में छेद नही होता है।।

जब तक काबिल, परिश्रमि और बुद्धिमान को अमीर बनते, सफल होते बच्चे नही देखेंगे, और कोई बात करना बेमानी है।


कलम की ओकात दिखे तो विद्ययर्थिओं औऱ पालकों में शिक्षा के प्रति रुचि जाग जाएगी।


सर्व शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा का प्रचार छोड़कर नमो चल रहा है। दूरदर्शन पर चार्ज लग रहा है।
विषय ही बेमानी है।
पहले सरकार बदलनी होगी 

विश्लेषण अब्दुल कादिर खान कैसे शिक्षा से समझौता कर लें हम? ज्ञान ही अंधकार को दूर कर सकता है ज्ञान ही श्रेष्ठ बनाता है शिक्षा सबसे बड़ी आवश्यकता है देश को उन्नति शील बनाने के लिए समाज को व्यवस्थित करने के लिए देश की सुरक्षा के लिए  देश की उन्नति और विकास के लिए 

            लेखक
 अब्दुल कादिर खान  
    कलयुग की कलम 
mobile number 9753 687 489
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