बिना अवगुण त्यागे रहती कांवर अधूरी

नशा छोड़ने के भोले नाथ सभी मनोकामनाएं करते है पूरी

माधौगंज , हरदोई। 

विकास खंड के गांव पिपरावां से रविवार के दिन हर हर महादेव के जयकारों के बीच बाबा भोले नाथ मंदिर से कंवर लेकर मां गंगा धाम मेंहदी घाट के लिए कावड़िये रवाना हुए।
सावन के पवित्र महीने मेम शिव भक्त नंगे पैर कंधे पर गंगाजल की कांवर लेकर भगवान को श्रद्धा व भक्ति के साथ जल अर्पण करके इतिश्री कर लेते हैं। उन्हें लगता है कि हमारे पाप कट गए और कई जन्मों का पुण्य मिल गया। पर क्या ऐसा सोचना समझना उचित है? सिर्फ गंगाजल को श्रद्धा पूर्वक पूर्ण मान सम्मान के साथ भोलेनाथ को अर्पण कर देना ही हमारी सच्ची भक्ति की निशानी व जिम्मेदारी नहीं है। पूरे साल भर पाप की दरिया में गोते लगाते रहने के बाद चंद दिनों के लिए संजोई गई भक्ति और पवित्रता प्रभु को  खुश कर लेने अथवा सारे पापों से मुक्त होने का प्रयास मात्र हमारे बाहरी  आडंबर भक्ति, झूठी बनावटी आदतें सिर्फ समाज में उपहास  की किरणों को जन्म देती हैं।
प्रायः देखा जाता है कि भगवान शंकर के द्वारा सेवन किए जाने वाले गांजा ,भांग जैसे नशीले पदार्थों का सेवन भक्त गण स्वयं करके अपने को गौरवान्वित महसूस करते हैं। लेकिन नशीले पदार्थों का सेवन हमारी उपासना के मार्ग की शुरुआती रूपरेखा व संतुलन बिगड़ देता है। भक्तों को सर्वशक्तिमान महाकाल भोलेनाथ के रंग रूप खानपान व उसके सम्मान से स्वयं की तुलना व बराबरी न करके गांजा भांग धतूरे जैसे नशीले पदार्थों की तरह तन में विद्यमान विषैले अहंकार आलस्य,  कटुता,  झूठ, फरेब चोरी, हिंसा, क्रोध आदि को प्रभु पर गंगाजल की प्रत्यक्षता एवं प्रभु को साक्षी मानकर  उन्हें अर्पण कर देंगे तभी सच्ची पुण्य-सफल कांवर होगी। जीवन में सुख शांति, अनुपम खुशी की सच्ची अनुभूति संभव हो सकेगी।
कंवर भक्त मुन्नेन्दर पटेल, बसंत राम, टीटू उर्फ दिवाकर, पत्रकार समाजसेवी रामकिशोर शर्मा, सुरजीत सिंह, अनूप सिंह, राम जी शर्मा, रजनीश पटेल, सुनीत सबिता, मटरु, सर्वेश शर्मा आदि कई कंवर भक्त सोमवार को बाबा सुनासी नाथ मंदिर में पूजा अर्चन करके करेंगे जलाभिषेक।
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