सतना के बलराम की तर्ज पर कर रहा पाकिस्तानी अातंकी संगठन की मदद

पाकिस्तान के लिए टेरर फंडिंग कर रहा सीधी का सौरभ एटीएस की गिरफ्त में

मध्यप्रदेश के सीधी से मिल रही थी पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर को मदद

सतना. :  पाकिस्तानी अातंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा के लिए धन राशि जुटाने वाला टेरर फंडर सौरभ गिरफ्तार कर लिया गया है। सीधी निवासी सौरभ को यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। सौरभ पाकिस्तान से फोन और इंटरनेट के अपने नेटवर्क के सदस्यों के साथ पाकिस्तान में बैठे लश्कर के हैंडलर के संपर्क में था।

भेजा गया जेल

टेरर फंडिंग के आरोपी सौरभ शुक्ला को यूपी एटीएस प्रयागराज से गिरफ्तार कर लखनऊ ले गई। जहां उससे आवश्यक पूछताछ करने के बाद कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट से रिमांड मांगी गई थी लेकिन कोर्ट ने उसे 9 अगस्त तक के लिये जेल भेज दिया है। प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि वह फरारी के दौरान पढ़ाई के नाम पर उत्तर प्रदेश चला आया था और यहां रहकर वह टेरर फंडिंग के कारोबार में जुट गया था। यहां पाकिस्तानी हैण्डलर्स के इशारे पर आपराधिक षडय़ंत्र और कोडिंग करते हुए विभिन्न बैंकों खातों में देश के अलग-अलग स्थानों से भारी धनराशि मंगाकर आतंकियों के पास तक भेजते थे। सौरभ लोगों को झांसा देकर बैंकों में खाते खुलवाता था और उनके एकाउंट नंबर, एटीएम कार्ड लेकर इन खातों से पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर उनके बताए खाते में ट्रांसफर करता था।

पिता से 500 रुपये लेकर निकला था सौरभ

सौरभ के परिजनों ने बताया है कि सौरभ शनिवार की सुबह घर से निकला था। उसने पिता से 500 रुपये लिये थे और त्यौंथर जाने की बात कह कर निकला था। इसके बाद शनिवार की देर रात मोबाइल पर बताया गया कि बेटे को एटीएस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके पिता ने सौरभ की गिरफ्तारी के बाद आम लोगों से खुद को दूर कर लिया है। परिजनों की माने तो पिता यही कह रहे हैं कि उनका बेटा ऐसा काम करेगा विश्वास ही नहीं था। उसने देश द्रोह का काम किया है यह जानकर आश्चर्य हो रहा है। लगातार वे ऐसा कहते हुए फूट-फूट कर रोते हैं और यह कहते हैं कि लगता है कि जमीन फट जाए और वे उसमें समा जाएं।

दो साल लगातार हुआ फेल

सौरभ के परिजनों के मुताबिक कालेज की पढ़ाई के लिये सौरभ और उसके छोटे भाई मोहित को रीवा भेजा गया था। रीवा में कालेज में प्रवेश लेने के बाद वह दो वर्ष लगातार फेल हो गया था। इस वजह से पिता ने नाम कटा दिया था। उसकी गलत संगत को देखते हुए गांव ले आए थे। परिवार के कई लोग शासकीय सेवा में है। सौरभ की हरकत से सभी अचरज में हैं और देशद्रोही के आरोप के बाद से समाज से दूरी बना लिये हैं।

टेरर फंडिंग के लिये सिम बाक्स के जरिए फेक एक्सचेंज चला रहा था सौरभ

टेरर फंडिंग के लिये बदनाम हो चुके विन्ध्य में अब सीधी निवासी सौरभ शुक्ला को यूपी की एटीएस ने पकड़ा है। इस मामले में पैनी नजर रख रही खुफिया एजेंसियों की माने तो सौरभ का काम करने का तरीका सतना से पकड़े गए बलराम की ही तरह है। सौरभ पाकिस्तान से आने वाली कॉल को फेक एक्सचेंज के जरिये भारतीय काल में बदल देता था और इसके जरिये लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया जाता था। इसके बाद जो भी उनके झांसे में आता था उन्हें ठगी से हासिल किए गए बैंक अकाउंटों में जमा करवाया जाता था। फिर पाकिस्तानी *हैण्डलर के जरिये बताए गए पते पर यह राशि पहुंचा दी जाती थी। पाकिस्तानी नसौरभ*

मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तानी आतंकी संगठनों पर नजर रख रही देश की खुफिया एजेंसियों को यह पता चला था कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा भारत में आतंकी गतिविधियों को संचालित करने के लिये भारतीयों से ही टेरर फंडिग करा रहा है। इस आतंकी संगठन ने भारत में अपने कई एजेंट कमीशन बेस नियुक्त कर लिये थे और उनके माध्यम से टेरर फंडिंग के लिये राशि की उगाही कराई जाती थी। इस काम को पाकिस्तान में बैठा इन एजेंटों का हैण्डलर अंजाम देता था। सौरभ को भी पाकिस्तान में बैठा हैण्डलर निर्देश देता था।

इस तरह होती है टेरर फंडिग

पाकिस्तानी आतंकी संगठन पहले अपने स्लीपर सेल के जरिये भारत में टेरर फंडिंग के लिये एजेंट चुनते हैं। कई महीनों तक उन्हें परखा जाता है फिर कमीशन की लालच देकर उन्हें टेरर फंडिग के काम में जोड़ा जाता है। इसके बाद एजेंट को सिम बाक्स दिया जाता है जिसके जरिये वह फेक एक्सचेंज तैयार करता है। यह एक्सचेंज इन आतंकी संगठन के भारत में बैठे तकनीकि जानकार तैयार करते हैं। इसके बाद पाकिस्तान का हैण्डलर एजेंट के पास मौजूद सिम बाक्स में काल करता है। इसके जरिये पाकिस्तान का नंबर सिम बाक्स के दूसरे सिमों में डायवर्ट होता है और वहां से रिवर्स कालिंग होती है जिससे नंबर हिन्दुस्तान का हो जाता है और लोक इस हिन्दुस्तानी काल के झांसे में आकर ठगी के शिकार हो जाते हैं और उनके बताए खातों में रकम डाल देते हैं। यह खाते सौरभ जैसे एजेंटों के खुद के होते हैं या किसी अन्य को झांसा देकर उसका संचालन करते हैं। भारत में लोगों को लाटरी और ईनाम जीतने आदि का लालच दिया जाता है।

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