आपको बताते चलें कि नगर पंचायत अमेठी को आदर्श नगर पंचायत का दर्जा मिल चुका है तो कारगुजारियां भी इसके साथ आदर्श हो गईं।बीते साल रसीदों से नकद का लेन तो किया गया लेकिन रसीदों के साथ नगर पंचायत के बैंक खाते में नकद देन न कर काफी नकद रकम व्यक्तिगत खाते में जमा कर ली गयी। जब ऑडिट हुआ तो मामले का खुलासा 10 लाख 43 हजार 7 सौ 83 रुपये के हेरफेर का निकला। उस समय के तत्कालीन पटल बाबू विपुल तिवारी व निशांत तिवारी रहे जिनकी कलम से ये कारनामा हुआ।

वित्तीय वर्ष 31 मार्च 2018 तक परिशिष्ट में उपलब्ध अभिलेखों व रसीदों के अनुसार कुल नकद वसूली 36 लाख 51 हजार 3 सौ 61 रुपये की हुई जिसमें नगर पंचायत के एसबीआई व ओबीसी के खाते में 6 लाख 54 हजार और 3 लाख 89 हजार 7 सौ 83 रुपये व जमा ही नहीं किया गया जबकि नगर पंचायत के बुक संख्या 32 के क्रम संख्या 57 से 83 तक काटकर वसूला गया था। मामले को छिपाने व दबाने के लिये तिथिवार वसूल की गई धनराशि के सापेक्ष जमा धनराशि का विवरण व पंजिका भी बनाई ही नहीं गयी।

फर्जीवाड़ा यहां तक कि वसूली गई धनराशि को बैंक जमा पर्ची के अनुसार तो जमा दिखा दिया गया लेकिन जब बैंक अभिलेखों से मिलान किया गया तो उपरोक्त धनराशि जमा नहीं पाई गई। इस तरह से फर्जीवाड़ा कर सरकारी धनराशि को हजम करने की बेहद नाकाम कोशिश की गई।

इस संबंध में जानकारी के लिये प्रभारी अधिशासी अधिकारी रेणुका एस कुमार से फोन पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने चौंकते हुए इस संवाददाता से ही पूंछ लिया कि आप लोगों को कैसे जानकारी हो गयी। हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि कार्यवाही की जा रही है। मामले की जानकारी जब नगर पंचायत अध्यक्षा चन्द्रमा देवी को हुई तो उन्होंने तत्काल अभिलेखों की जांच पड़ताल की जिसमे मामला सही पाते हुए आरोपी लिपिक विपुल तिवारी के विरुद्ध अमेठी कोतवाली में जालसाजी व सरकारी धन के गबन का मुकदमा दर्ज करा दिया। प्रभारी इंस्पेक्टर कोतवाली डीके सिंह ने बताया कि तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांचकर आगे की कार्यवाही की जा रही है। 

रिपोर्ट अशोक कुमार पाण्डेय पत्रकार अमेठी
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