मेरे देश में जहां हर चीज का व्यापार होता है वहां शिक्षा भी  हुआ व्यापार पूरा विचार पढ़े

 हमारा देश ऋषि-मुनियों गुरुओं से ज्ञान लेने के लिए जाना जाता था याहा निस्वार्थ भाव से बड़े-बड़े ऋषि मुनि ज्ञानी गुरु अपने शिष्यों को बेहतर ज्ञान देते।

 और जीवन को व्यतीत करने समाज में रहने और सभी धर्म का आदर सम्मान  अपने से बड़ों  का सम्मान करने की शिक्षा देते थे ।


 और जिन चीजों पर गुरुद्वारा दृढ़ संकल्प दे दिया जाता था उन चीजों को त्याग कर लोग  इस देश के बड़े-बड़े नेतृत्वकर्ता बने।


आज मेरे देश की शिक्षा व्यापार बन रही है निजी हाथों में शिक्षा  को सौंपकर शिक्षा का सम्मान कम होने लगा है ।

शिक्षा भी व्यापार बन गई लोग बड़े बड़े स्कूल खोल कर लोगों से मोटी रकम वसूल रहे हैं ।

और बड़ी कीमत देकर अपने स्कूलों में बड़े-बड़े अध्यापक रखे जा रहे हैं ।

 मेरा स्कूल दूसरे स्कूलों से बेहतर हो इसके लिए बड़े-बड़े सेलिब्रेशन किए जा रहे हैं ।

स्कूलों की चमक धमक दिखाकर फीस के नाम पर बड़ी रकम वसूली जा रही है।

 मुझे लगता है जैसे शिक्षा शिक्षा ना होकर देश का सबसे बड़ा व्यापार हो गया ।

यह आरोप नही दुख की मुझे लगता सरकारें शिक्षा को निजी हाथों पर सौंपकर गरीब शोषित वंचित मध्यमवर्गीय लोगों को शिक्षा से वंचित रखने की एक वजह बना रहे हैं।


आलोक शिक्षा से  वंचित हो रहे हैं  बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

शिक्षा को निजी हाथों में ना देते हुए अगर सरकारी स्कूलों की व्यवस्था मजबूत कर दी जाए और निजी हाथों में देने से रोकते हुए स्कूलों में अच्छे शिक्षक अच्छी व्यवस्था हो ।


जैसे बैठने की  लाइट पंखा पानी बिजली स्कूलों को देखने योग्य बनाने का कार्य हो तो देश का एक अलग ही विकास होगा इंडिया को मॉडल बनाने के लिए स्कूलों को मॉडल बनाने की आवश्यकता है ।


अच्छे शिक्षकों की व्यवस्था करना स्कूलों की सतत निगरानी हो शिक्षकों की लापरवाही पकड़ी जाए और शिक्षा हासिल करने वाले बच्चों की भी मौखिक  परीक्षा लेकर शिक्षक  वृद्धि का आंकलन हो ।

ताकि शिक्षा का बेहतर विस्तार हो सके शिक्षा सबसे बड़ी आवश्यकता है।

 इसे निजी हाथों से बचाना आवश्यक है।

समाज के अंदर बहुत से वर्ग हैं जो कि बेहतर शिक्षा से वंचित हो रहे हैं ।

लोंग इन्गलैंड ऑस्ट्रेलिया कनाडा रूस और चाइना तक अपने बच्चों को भेज रहे हैं।

 क्या वजह है क्या मेरे देश में अच्छी शिक्षा नहीं मिल सकती ?

 क्या इन्हें निजी निजी हाथों पर ही सोंपना जरूरी है ?

क्या सरकारी स्कूलों की व्यवस्था बेहतर नहीं हो सकती ?

 क्या जो व्यवस्थाएं और सुविधाएं प्राइवेट स्कूल दे रहे हैं वो शिक्षा देने में व्यवस्थाएं देने में सरकारें असमर्थ हैं ?

अगर इन व्यवस्थाओं को बेहतर कर दिया जाए तो मुझे लगता है यह देश सबसे ज्यादा प्रगति और उन्नति करने वाला एक देश बनेगा 

केंद्रीय विद्यालय, सरकारी इंजीनियरिंग एवम मेडिकल कालेज। iit, iim सब सरकारी हैं।

खर्चे से अधिक महत्व है वो बच्चे जो पढ़ाई कर के निकलते हैं उनकी क्वालिटी।

क्षमा चाहूंगा परंतु बात सत्य है
केन्द्रीय विद्यालय भारत में प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा का प्रबंध है, जो मुख्यतः भारत की केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों के लिए बनाया गया है। इस की शुरुआत 1963 में हुई तथा यह तब से भारत के केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्डसे अनुबन्धित है। इस समय भारत में केन्द्रीय विद्यालयों की संख्या 1,199 अथवा इस से अधिक है। इस के अतिरिक्त विदेश में तीन केन्द्रीय विद्यालय हैं जिनमें भारतीय दूतावासों के कर्मचारियों तथा अन्य प्रवासी भारतीयों के बच्चे पढ़ते हैं। विद्यालयों में भारत के राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के पाठ्यक्रम का अनुसरण होता है। सभी केन्द्रीय विद्यालयों का संचालन केन्द्रीय विद्यालय संगठन नाम की संस्था करती है।

जब सरकार उनकी व्यवस्था कर सकती है तो बाकी विद्यालय व्यवस्थित क्यो नही है? 

 सरकारी टीचर्स परीक्षा उत्तीर्ण कर के आती हैं। अच्छे नंबर लाने वाले टीचर्सगण ही सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं।

 टाइम पास के लिए अमीर एफसर की बीवी या कम पढ़ी खराब शैक्षणिक रिकार्ड वाले ही प्राइवेट टीचर बनते हैं।

जैसे वे होंगे वही सिखाएंगे।


नियम ध्यान से पढ़ना


 अभी ठंड के मौसम में सरकारी स्कूल की टीचर मैदान में धूप में बैठकर स्वेटर बनाएंगे ।


 और शिक्षक गण  गुरुजी धूप सकेंगे बच्चे खेलते रहेंगे यही सरकारी स्कूल की स्थिति है।

 आप ग्रामीण क्षेत्रों में इस बात को देख सकते हैं🙏

शिक्षकों के ऊपर इतना ज्यादा वर्क लोड डाल दिया गया है कि वह परेशान हाल है मीटिंग ट्रेनिंग चुनाव डांक और भी बहुत सारे ऐसे कार्य हैं जिन पर व्यस्त नजर आते हैं


 मैं भी कुछ सुझाव देना चाहूँगा.... 

विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम से शिक्षाविदों के बोनस और प्रमोशन को जोड़ देना चाहिए... 


शासकीय शिक्षण संस्थानों के इंफ्रास्ट्रक्चर में वृहद् सुधार की आवश्यकता है ।


शिक्षाण का तरीका पूर्णत बदलना चाहिए, ये 20 किलो का बैग की परम्परा बंद करनी चाहिए, 

स्पेसिफिक किताबों की जगह शिक्षा विभाग को हर कक्षा के लिए स्टैण्डर्ड घोषित करना चाहिए

कम किताबों में अच्छी शिक्षा का प्रावधान बनाना चाहिए

 पहली बार देश का दुर्भाग्य देखने मिला जब अतिथि शिक्षकों को कुटा गया वह भी तब जब स्कूलों को सबसे ज्यादा शिक्षकों की आवश्यकता थी

हमारा सरकारों से निवेदन है कि वह शिक्षा को बेहतर करने के लिए जल्द से जल्द बेहतर कदम उठाए और शिक्षा को निजी क्षेत्रों से बचाते हुए सरकारी स्कूलों की दिशा और दशा को बदलने के लिए प्रयास करें जय हिंद 

      लेखक 
अब्दुल कादिर खान 
कलयुग की कलम 
 मोबाइल नंबर 9753 687489
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