एक बार फिर किया हरदोई का नाम रोशन

मल्लावां के अरुण कुमार बने इंग्लैंड में प्रोफ़ेसर और शोधकर्ता। 

मल्लावां के अरुण कुमार को ग्रेट ब्रिटेन की सरकार ने एक बार फिर से स्थायी नौकरी देकर उनके हौसले को बुलंद किया है।  बीएन इंटर कॉलेज के छात्र अरुण कुमार को वर्ष 2018 में लंदन में उनके शोध के लिए सम्मानित किया गया था। यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय थे। इस बार की उनकी सफलता उससे भी बड़ी है। वह अब यूनाइटेड किंगडम की नॉटिंघम यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर और शोधकर्ता के रूप में तैनात होंगे। वह वहां बीए, एमए और पीएचडी के छात्रों को भारत और ब्रिटेन का इतिहास पढ़ाएंगे। अरुण कुमार का यहाँ तक का सफर बड़ा ही प्रेरणादायक है। इन्होंने अपनी आरंभिक शिक्षा गांव कल्यानपुर और मल्लावां से की। स्नातक और एमए की डिग्री दिल्ली विश्विद्यालय से पूर्ण की। उन्हें न केवल भारत के सबसे अच्छे विश्विद्यालयों में दाखिला मिला बल्कि वह अपनी मेहनत से वर्ष 2012 में दिल्ली विश्विद्यालय के टॉपर भी बने। उन्होंने अपनी पीएचडी जर्मनी से पूरी की। 28 वर्ष के अरुण कुमार अपने आप को भाग्यशाली मानते है। क्योंकि इस प्रकार की सरकारी नौकरी मिलने में लम्बा समय लग जाता है। वह मानते है कि उनकी सफलता के पीछे उनके माता-पिता श्रीमती निशा देवी और श्री महेशचंद्र व हरदोई की जनता का आशीर्वाद है। अरुण कुमार बताते है कि पिता महेश चंद्र ने सीआरपीएफ  की ड्यूटी के कारण अधिकतर समय देश की सेवा में लगा दिया। जबकि उनकी पढ़ाई का बेड़ा उनकी माता ने उठाया। उनकी सफलता में उनकी माता का अमूल्य योगदान रहा है। अरुण मानते है कि अगर हरदोई की समस्त माएँ यह ठान ले कि उनके बेटे और बेटियां पढ़कर आगे कुछ बने तो उन्हें सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। अरुण का इंग्लैंड से अपने देश भारत वापस आकर एक विश्विद्यालय चलाने का सपना है, जहाँ वह गरीब छात्रों को गुणवत्तापूर्ण, मुफ्त और समान शिक्षा प्रदान करना चाहते है।
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