दूषित पानी पीने को मजबूर हैं नगरवासी करोड़ो की योजनाएं धरातल पर शून्य

जिलासंवाददाता राजेश सिन्हा  कोरिया छत्तीसगढ़ :

 मनेन्द्रगढ़ की पूरे साल गंदगी से भरी यदि हसिया नदी को मनेन्द्रगढ़ नगर की जीवन दायनी के नाम से संबोधित करें तो बिल्कुल इसमे कोई  मजाक वाली बात नही होगी न । भले ही हसिया नाम के नाले को लोग नदी के नाम से संबोधित कर रहे हो लेकिन ये नदी पूरा वर्ष नगरवासियो के मैला गंदगी ढोने का कार्य करती है । इतना ही नही इस नदी का मुख्यद्वार हसदेव नाम की नदी में जुड़ने की वजह से सदियों हसिया नदी  हसदेव नदी के पानी को भी पूर्णरुप से दूषित करते चली आई है । परंतु इन सभी जानकारियो के बाद ही दूषित हसिया नदी के उदगम क्षेत्र से चंद  कदमो  की दूरी पर मनेन्द्रगढ़ नगर में सप्लाई द्वारा जलापूर्ति करने के लिए पानी उठाया जाता है  । जिसे जीवन जीने के लिए नगरवासी इस विषैले पानी को पीकर अपनी प्यास बुझाते है । वंही इस बीच बारिश के चलते नगर को पानी पिलाने वाली हसिया  नदी में सिल्ट व गंदगी बहकर आने से पानी मटमैला हो गया है। यही गंदा पानी नलों के जरिये लोगों के घरों तक पहुंच रहा है। उपभोक्ता गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। ऐसे में उदर संबंधी व संक्रामक रोगों की आशंका बढ़ गई है।

पिछले कुछ समय से आए दिन क्षेत्र में बारिश का क्रम चल रहा  है। ऐसे में हसिया  नदी में सिल्ट व गंदगी बहकर आ रही है।  वंही नगरीय जलापूर्ति के माध्यम  से यह गंदगी लोगों के घर तक पहुंच रही है। गंदा पानी सप्लाई होने से लोग परेशान हैं। नदी के जल में गंदगी इतनी है कि जल पूरी तरह फिल्टर नहीं हो पा रहा है। लोग यह दूषित पानी ही पीने को मजबूर हैं। कई लोग दूषित पानी से बचने के लिए दूर स्रोतों से पेयजल ला रहे हैं। पहले जलापूर्ति बाधित होने से लोग परेशान रहे, तो अब दूषित जल परेशानी की वजह बन गया। बहरहाल दूषित जल से जल जनित रोग होने की संभावना बढ़ गई है। जल संस्थान का कहना है कि नदी में सिल्ट ज्यादा बहकर आने से यह दिक्कत आई है। ज्यादा गंदगी होने से ऐलम  बस से ज्यादा पानी फिल्टर  नही किया जा सकता है । साथ ही फिल्टर की सुविधा ठीक न हो पाने के कारण बेहतर तरीके से पानी को फिल्टर नहीं कर पा रहे हैं। फिर भी शुद्ध जल सप्लाई करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।इस मौसम में जल जनित रोगों की संभावना बढ़ जाती है। दूषित जल से परहेज करना ही समझदारी है। ऐसे में उदर व संक्रामक रोगों की आशंका बलवती रहती है। पानी को उबाल कर इस्तेमाल करना ही हितकर है ।

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