सुप्रीम कोर्ट का आदेश

विधायक नीना वर्मा का चुनाव शुन्य घोषित

मामला 2013 के चुनाव का
सुरेश भंडारी ने लगाई थी याचीका
माननीय  सुप्रीम कोर्ट  के आदेश
2018 का निर्वाचन रहेगा यथावत
नए सिरे से चुनाव  मे  अपीलार्थी निर्वाचित हो गया है। अपील आवेदन में सलंग्न आदेश से यह पता चलता है कि अपीलकर्ता का नामांकन सही नहीं था,  स्वाभाविक रूप से अपीलकर्ता  के लिए यह विवादित स्थिति है , अतः  जैसा  हो  वैसा ही रह सकता है।  नए निर्वाचन  होने के बाद से अब इसका कोई वास्तविक असर नहीं है।
वस्तुतः आक्षेपित आदेश के संबंध में कुछ भी कहे जाने का  कोई परिणाम नहीं होगा।

हालांकि अपीलकर्ता के विद्वान् अधिवक्ता इस बात पर जोर देते है कि अपीलकर्ता के लिए अर्जित लाभ के संबंध  में कुछ समस्या हो सकती है।  हम इस विषय पर की प्रतिवादी एक मतदाता है ,  की और जाने के लिए हम इच्छुक नहीं है। तदनुसार अपील का निराकरण  किया जाता है।

हस्ताक्षरित आदेश के संदर्भ में अपील का निपटान किया जाता है। लंबित आवेदन, यदि कोई हो, का भी निस्तारण (समाप्त) किया जाता है।                                                                                   

माननीय  सुप्रीम कोर्ट  के आदेश  के  निहितार्थ
माननीय  सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश की पुष्टि  करते हुवे हाई कोर्ट के आदेश में कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। नामांकन फार्म को गलत तरिके से स्वीकार किये जाने के कारण अपीलार्थी   का निर्वाचन नामांकन फार्म की जाँच दिनांक से ही निरस्त होकर शून्य है।  ऐसी स्थिति में " पूर्व विधायक " के रूप में मिलने वाली सुविधाएं जैसे पेंशन आदि प्राप्त नहीं होगी।  " पूर्व विधायक " कहलाने का अधिकार भी नहीं रहेगा। 
    चुकी निर्वाचन नामांकन फार्म की जाँच दिनांक से ही निरस्त होकर शून्य है,  ऐसी स्थिति में  " विधायक "    के रूप में  प्राप्त किये गए वेतन एवं मानदेय की वसूली संभावित है , जो लगभग ४० लाख रुपयों के आसपास संभावित है ,  इसके अतिरिक्त हाई कोर्ट ने प्रतिवादी श्रीमती नीना वर्मा को आदेशित किया है की वह सम्पूर्ण "वाद व्यय" और अधिवक्ता फ़ीस का भुगतान याचिकाकर्ता श्री सुरेशचंद्र भंडारी को भुगतान करे।  माननीय सुप्रीम कोर्ट   के  द्वारा अंतिम रूप से प्रकरण का निराकरण किये जाने के बाद अब प्रतिवादी श्रीमती नीना वर्मा के द्वारा याचिकाकर्ता श्री सुरेशचंद्र भंडारी को अनिवार्य रूप से सम्पूर्ण "वाद व्यय" और अधिवक्ता फ़ीस काभुगतान करना होगी।
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