जनता के लिये दिल नहीं किडनी की तरह काम करूंगा-सीईओ

सिक्योरटी गार्ड से सीईओ की कुर्सी तक का सफर,बालागुरु बने युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत

पन्ना में जिप सीईओ की कुर्सी सम्हालते ही दिखने लगा बदलाव

KKK NEWS PRESS

         पन्न      

KKK न्यूज़ /मध्यप्रदेश के पन्ना जिला पंचायत के नवागत मुख्य कार्यपालन अधिकारी बालागुरु ने कहा है कि वह पन्ना की जनता के लिये दिल की तरह नहीं बल्कि किडनी की तरह काम करेगे। उन्होंने कार्यभार सम्हालने के एक सप्ताह बाद अनोपचारिक चर्चा करते हुए बताया कि अभी वह कार्य अवलोकन कर रहे है। वह दिल की तरह आवाज़ करके काम करने पर विश्वास नही करते, बल्कि वह किडनी की तरह साइलेंट मोड़ में रहकर कार्य करने पर भरोसा रखते है।सिक्योरटी गार्ड से सीईओ की कुर्सी तक का सफर तय करने वाले 31 वर्षीय बालागुरु अब युवाओं के दिलों की धड़कन बनकर उनके लिए प्रेरणास्रोत बन गए है।  पन्ना जिला पंचायत में सीईओ की कुर्सी सम्हालने के बाद से अब वहाँ बदलाव भी दिखने लगा है।कहते है कि लक्ष्य हासिल करने के लिये यदि किसी में जुनून, जज्बा और इच्छाशक्ति है तो बड़ी से बड़ी चुनौतियों ओर  बाधायें को भी वह आसानी से पार कर सकता है।उसकी द्रणइक्षा शक्ति सफलता के मार्ग को नहीं रोक सकतीं। मध्यप्रदेश के पन्ना जिला पंचायत के नये मुख्य कार्यपालन अधिकारी बालागुरू इसके जीते-जागते उदाहरण हैं। जिन्होंने पन्ना का सीईओ बनकर चरितार्थ किया है।मूलरूप से तमिलनाडु अरावकुरिची के गांव थेरापडी के निवासी इस युवा आईएएस अधिकारी की संघर्षपूर्ण जीवन गाथा बेहद दिलचस्प ओर रोमांचकारी तथा प्रेरणादायी है। बालागुरु ने पन्ना में सीईओ के रूप में  एक जुलाई को पदभार ग्रहण किया था। इसके बाद से ही जिला पंचायत कायार्लय पन्ना की कार्य प्रणाली में बदलाव नजर आने लगा है। वर्ष 2014 में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर आईएएस अधिकारी बनने वाले बालागुरू का सपना बचपन से ही कलेक्टर बनने का था, लेकिन आर्थिक तंगी और गरीबी के चलते सपने को पूरा करना सहज नहीं था। उनके पिता कुमारसामी खेतिहर मजदूर थे तथा मां मवेशी पालकर किसी तरह घर चलाती थीं। सरकारी स्कूल में शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने चार हजार रुपए वेतन के लिए एक अस्पताल में सुरक्षागार्ड की नौकरी की। रात्रि शिफ्ट में सुरक्षागार्ड की नौकरी करते हुये पत्राचार कोर्स से स्नातक की डिग्री हासिल की और इस दौरान बहन जानकी का विवाह भी कराया। यूपीएससी की परीक्षा पास करने के बाद बालागुरू संघर्ष के दिनों में  परीक्षा की तैयारी के लिये न्यूज पेपर पढऩे वे नाई की दुकान में जाया करते थे। फिर उन्होंने चेन्नई की पब्लिक लाइब्रेरी में भी जाना शुरू किया, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई युवकों से परिचय हुआ।उनको लगातार तीन बार असफलता मिली और चौथी बार कामयाब हुये।

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