घरेलू हिंसा से पीड़ित हो रही बेटियां कहीं आत्महत्या  कहीं छुट्टा कहीं तलाक तार-तार हो रहे रिस्ते मां बाप हो रहे ज़लील टुट रहे परिवार

खराब हो रहा नौनिहालों का भविष्य

मेरे देश में घरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही है रोज नया कृत्य देखने मिल रहा है क्या हिंदू क्या मुस्लिम क्या सिख क्या इसाई क्या बौद्ध क्या पारसी

अब नहीं रहा मान-सम्मान समाज जात पात की मर्यादा सभी धर्मों के अंदर बेटियों को प्रताड़ित किया जा रहा है छोटी-छोटी बातों पर बड़े बड़े फैसले लिए जा रहे हैं कहीं बेटियों की छुटपुट गलतियों पर मर्दों द्वारा चढ़ाई की जा रही है।

 पारिवारिक हिंसा का बड़ा रूप बनता जा रहा है ना बच्चों की फिक्र ना मां बाप की मर्यादा शराब के नशे में धुत शैतान के रूप में सारी मर्यादाओं को लांग बेटियों के साथ कर रहे दुराचार

 घरों पर सिसकती बेटियां यह हमारा समाज कैसा रूप लेता जा रहा है। 

जहां बेटियों को बहुओं को लक्ष्मी का रूप कहा गया हो जिस देश में बेटियों की पूजा की जा रही हो।

 उन बेटियों के साथ यह दुर्व्यवहार दासी समान व्यवहार दहेज के नाम पर प्रताड़ना मारपीट की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है।

 जहां

 बेटियों को बेटों के समान माना जा रहा हो जहां फाइटर प्लेन उड़ा रही बेटियां जहां पुलिस आर्मी सीआरपीएफ कलेक्टर एसपी सीएसपी  डीएसपी कमिश्नर और जोड़ो कराटा स्पर्धा में गोल्ड मेडल पा रही बेटियां वहां यह भी चल रहा है।

और धर्म के ठेकेदार इन चीजों को लेकर सामाजिक चेतना के कार्यों से दूर दिख रहे हैं।

 कानून व्यवस्था के दावे कर रही सरकार लचर सिस्टम से लाचार मां-बाप आंसू ही बहा रहे हैं।

 अभी-अभी कुछ घटनाएं सामने आई जहां ससुराल में शराब पीकर पति द्वारा मारपीट कर  मायके भगा देना आम सी बात लग रही है ।

क्या इन जैसे लोगों को इस बात की भी खबर है कि जब किसी की बेटी बहन को आपके द्वारा इस तरीके से प्रताड़ित किया जाता है।

 तो उसके मां बाप भाई पर क्या असर पहुंचता है।

 उनके दिल  मैं क्या आघात पहुंचता है।

 शायद उस पीड़ा को एक बाप और मां समझ सकती है जो अपने घर से अपनी बेटी को विदा करता है।

 और उस बेटी के साथ उसका लाढ़ प्यार प्रेम इच्छाशक्ति सब की विदाई हो जाती है ।

और ऐसी घटनाएं उसके साथ निर्मित होती हैं जिससे उसका स्वाभिमान चूर चूर हो जाता है।

दमाद के प्रति उसका भरोसा उसकी इच्छाशक्ति जैसे मर सी जाती है ।

सभी समाजों के लोगों को चाहिए कि वह पारिवारिक हिंसा के खिलाफ आवाज उठाएं 

और सामाजिक तौर पर एक जन चेतना का कार्य करें

 जहां बेटियां गलत है वहां बेटियों को समझाइश दी जावे और जहां बेटों की गलती है वहां बेटों को समझाइश दी जाए

 कानून व्यवस्था बेहतर है यह मैं नहीं कह सकता लेकिन कानून से भी एक बेटी को न्याय दिलाया जा सकता है ।

कुछ धाराएं हैं जिससे बेटियों का भला हो सकता है ।

वह मैं अपने लेख में उल्लेखित करता हूं  इन धाराओं के तहत पति के द्वारा प्रताड़ित करने पर सजा का प्रावधान है

धारा 151, 107,16 सीआरपीसी

 मार पीट

 354 के अंतर्गत महिला की लज्जाशीलता भंग करने के लिए उसके साथ बल का प्रयोग करना

रेप इन मैरेज

धारा 371 के अंतर्गत किसी महिला के साथ दास के समान व्यवहार

यदि दहेज का सामान ससुराल पक्ष के लोग दुर्भावनावश अपने कब्जे में रखते हैं तो धारा 405-406 भा.द.वि. का अपराध होगा। विवाह के पूर्व या बाद में दबाव या धमकी देकर दहेज प्राप्त करने का प्रयास धारा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अतिरिक्त धारा 506 भा.द.वि. का भी अपराध होगा।

 धारा 323 व 342

 घरेलू हिंसा

 दहेज उत्पीड़न क़ानून (498 A)

इसके साथ ही घरेलू हिंसा के लिए महिला बाल विकास विभाग में भी अच्छी व्यवस्था है।

 ऐसी समस्याओं के लिए सामने आए  और विरोध करें  ऐसे दुराचारियों को सजा मिले  और सामाजिक तौर पर  सुधार के लिए जन चेतना का कार्य भी करें 

 लेखक 

अब्दुल कादिर खान कलयुग की कलम  मोबाइल नंबर 9753 687 489  

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