विश्व स्तनपान सप्ताह के लिये मीडिया कार्यशाला सम्पन्न

सोनू त्रिपाठी रिपोर्टर कटनी -प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी विश्व स्तनपान सप्ताह 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जायेगा। नवजात शिशु को मां का दूध, अमृत के समान होता है। जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान की शुरुआत कर 22 प्रतिशत नवजात शिशुओं को बचाया जा सकता है। इसके इलावा जन्म के 24 घंटे के भीतर शिशुओं की मौत का 2.4 गुना खतरा भी कम किया जा सकता है। इस आशय की जानकारी मंगलवार को कलेक्टर शशिभूषण सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न विश्व स्तनपान सप्ताह की मीडिया कार्यशाला में दी गई। इस मौके पर जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग नयन सिंह, जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी वनश्री कुर्वेति, डॉ0 यशवंत वर्मा, प्रभारी एनसीएनयू डॉ0 नीलम सोनी सहित जिले के प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे। शशिभूषण सिंह ने कहा कि हर्ष की बात है कि कटनी जिले मे स्तनपान के महत्व की जागरुकता अधिक है। यहां जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान और 6 माह तक केवल स्तनपान करने वाले शिशुओं का औसत प्रतिशत राष्ट्रीयस्तर और राज्यस्तर के औसत सूचकांक प्रतिशत से कहीं अधिक है। फिर भी स्तनपान के संबंध में जागरुकता संवर्धन के लिये सतत् अभियान चलाने की आवश्यकता है। जिले के डिलेवरी सेन्टर आंगनबाड़ी केन्द्र और एनआरसी केन्द्रों में आने वाली माताओं और किशोरी बालिकाओं की जागरुकता के कार्यक्रम किये जायें।जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास नयन सिंह ने बताया कि कटनी जिले का जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान के प्रतिशत का सूचकांक और 6 माह तक केवल स्तनपान का औसत प्रतिशत सूचकांक बेहतर है। जन्म से 6 माह तक के बच्चे को सिर्फ स्तनपान कराना चाहिये। उसके बाद ही ऊपरी आहार देना चाहिये। इससे 13 प्रतिशत बच्चों को बचाया जा सकता है। उन्होने बताया कि विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान आंगनबाड़ी केन्द्रों में विविध कार्यक्रम दिवसवार होंगे। सप्ताह के अंत में जिले में नवाचार के रुप में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर स्वस्थ्य शिशु प्रतियोगिता भी आयोजित कर स्थानीय स्तर पर पुरुस्कृत किया जायेगा।डॉ0 नीलम सोनी ने बताया कि जन्म के तुरंत बाद बच्चों को मां का पीला गाढ़ा दूध यानी कोलस्ट्रम ही दिया जाना चाहिेये। यह बच्चे का पहला टीका है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। बच्चे को संक्रमण और एलर्जी से बचाता है। जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरु कराके जीवन के पहले महीने में होने वाली बाल मृत्यु को रोका जा सकता है। इस मौके पर बच्चों में पोषण और स्तनपान के महत्व पर फिल्म भी प्रदर्शित की गई।


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