राष्ट्रीय कवि मनोहर मनोज कटनी के 70वें जन्मदिन पर कवि सम्मेलन का आयोजन

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राष्ट्रकवि *मनोहर मनोज* गुरु जी  के 70वें जन्मदिन के अवसर पर कटनी में आयोजित कवि सम्मेलन में प्रदेश के 70 कवियों ने शिरकत की, यह काव्य सम्मेलन राष्ट्रीय कवि संगम इकाई मध्यप्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष राष्ट्रीय कवि सुमित ओरछा जी द्वारा संयोजित रहा जिनमें की  प्रदेश के सुविख्यात कवियों ने अपनी शुभकामनाएँ गुरु जी को दी और मंच से काव्य पाठ किया कार्यक्रम दो चरणों मे हुआ जिसमे से प्रथम चरण कटनी जिले के साहित्यकारों के नाम रहा और दूसरा चरण प्रदेश के अन्य जिलों के रचनाकारों के लिए रहा , प्रथम सत्र का संचालन कवि प्रकाश प्रलय ने किया कार्यक्रम की शुरुवात महेंद्र नरसिंहपुर की वंदना से हुई जो मधुर और बेहद कर्णप्रिय रही, मनोहर दीप ने गीत ' प्रश्न जब अनेक हो गए पेट पीठ सब एक हो गए' पढ़कर समा बाँधा, जय नारायण सोनी अम्बर ने रचना ' पास में दौलत नहीं तो आँख का तारा हुआ' पढ़ी, सुधीर सागर ने 'जलाओ कोशिशों के दिए, विष्णु बाजपेयी ने 'दर्द का अगर जवाब दे देते', लखन घनघोरिया ने 'देश का बेटा देश की माटी', राजीव श्रीवास्तव ने 'गजल में मीर गालिब छंद में रसखान लिखते हैं' पंडित रामखेलावन गर्ग ने ' सत्य कहना सत्य जैसा भाष है पर सच नहीं', अंजुमन तिवारी ने 'ज़िन्दगी कभी मुश्किल कभी आसान होती है', जीतेन्द्र नीरज ने' हर सफर के लिए हम सफर चाहिए', चन्द्र किशोर चंचल ने 'कुछ शिकायत नहीं है किसी से जो मिला है ले लिया खुशी से', राजेन्द्र सिंह ठाकुर ने 'तुम मेरी मुस्कान बनकर आओ मेरे अधरों में', शानू बेखौफ ने' ज़िन्दगी जी के दिखाओ तो समझ जाएंगे', रवि चतुर्वेदी ने 'पाद नहीं पाओगे', गोपाल जी ने ' क्या पता क्यों शराब देती है किस जनम का अज़ाब देती है', रमाकांत की रचना मनोज जी के ऊपर रचित 'काव्य के उपवन में ईश्वर की खोज मनोहर मनोज' तथा पूर्व विधायक कटनी एवं कवि लक्ष्मीचन्द्र ने पत्नी चालीसा का वाचन किया, साथ ही मनोहर मनोज जी के सुपुत्र अथर्व तिवारी ने गीत 'कितना पागल हुआ मन तुम्हारे बिना और उसपे ये सावन तुम्हारे बिना' को गाकर मंत्रमुग्ध कर दिया, कार्यक्रम के दूसरे चरण में संचालन कवि सुमित ओरछा ने  मुक्तक 'कीमत मेरी हर कोई भी वहन नहीं कर सकता है। मुझको कोई जुगुन आकर दहन नहीं कर सकता है।। जो उजियारे का साथी हो आकर मेरे साथ रहे। मैं सूरज हूँ अंधियारा मुझको सहन नहीं कर सकता है।।' के साथ पुनीत तिवारी को आमंत्रित किया पुनीत ने गीत' आई जो बसंत है जो तुझे हर बार याद किया', मनोज दुबे देवास ने पिता के ऊपर लिखी रचना' किसको सुनाऊँ मैं बातें ये सारी बहुत याद आती है पापा तुम्हारी' पढ़कर आंखों को नम होने पर मजबूर कर दिया,' रोमेश हरदा पत्रकार आज तक ने उन्नाव पीड़िता पर लिखी कविता' बलात्कार पहले पीड़िता का फिर व्यवस्था का  हुआ', सुषुप्त त्रिपाठी ने' जिस धरा की धरा पे राम ने लिया' गौरव भिंड ने'मर्यादा से अधिक त्याग भी कायरता कहलाता है', प्रमोद तिवारी विभोर पन्ना ने 'वो राम मेरी अनुराग मेरी हमराह मेरी मेरी धड़कन', महेश जबलपुरी ने 'दीवाने से पूंछ रहे हो प्यार की कीमत क्या होगी', मुकेश सानिध्य टिमरनी ने छंद 'एक काला ग्वाला प्रेम रंग बाँट रहा', आशीष सोनी नरसिंहपुर ने 'तन्नक सी बात पे तुम भुकर भुकर जात हो',  विजयानन्द माहिर गाडरवारा ने 'फ़ोन भी बेहद अजीब है न पहले झूठ इतना कौन बोलता था', सौम्या तिवारी सतना ने 'पावन भारत माटी है' सलिल तिवारी ने 'प्यासी थी वर्क अर्श पे बादल को पी गई', सूरज राय सूरज ने शेरो शायरी से माहौल को शायराना बना दिया उनकी गजल मेरा दुश्मन गैर के हाथों से मरने न देगा'  ने खूब वाहवाही लूटी, 'योगेश योगी किसान ने छंद 'देश की अखंडता में कोई जो प्रहार करे प्राण दंड उसका प्रसाद होना चाहिए' पढ़कर देशभक्ति का माहौल बनाया, प्रियांशु तिवारी ने देशभक्ति से सराबोर मुक्तक सुनाकर सबका मन मोह लिया,  शुभम चौरासिया मैहर ने 'मेरी नजरों से एक बार बस देख भर लो', आनंद जैन अकेला ने 'डूबना गर मेरा मुक्कदर था', कवि शशिकांत शशि देवास ने 'राम श्याम शिवा और पैगम्बर न पीर देश के जवानों जय बोलो कश्मीर की' पढ़कर वातावरण को ऊर्जा से लबरेज़ कर दिया, श्री प्रकाश पटेरिया ने ओज को पढ़कर देशभक्ति का उबाल रक्त में पैदा किया, गुरु सक्सेना साँड़ नरसिंहपुरी ने अपने छंदों से हास्यव्यंग की नदिया बहा दी, अंत मे मनोहर मनोज जी ने हास्यव्यंग की कविता सुनाकर सबका आभार व्यक्त किया और अंत मे सुमित ओरछा जी ने कवि मनीष तिवारी के महामंत्री राष्ट्रीय कवि संगम बनाए जाने की भी घोषणा की।









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