कांग्रेस विधायक  विजय राघवेंद्र सिंह बसंत भैया  की  अध्यक्षता में मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस

 कटनी- विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने पूर्णता छुट्टी की घोषणा की जिसे आदिवासी समुदाय के अंदर अलग उत्साह नजर आया आदिवासियों द्वारा कटनी जिले के समस्त ग्रामों से आदिवासी समुदाय के लोग अंजुमन इस्लामिया स्कूल में एकत्रित होकर धूमधाम से मनाया आदिवासी दिवस वही आदिवासी अपने रूढ़ीवादी संस्कृति को लेकर जागरूक नजर आए प्राकृतिक अपनी पुरानी जीवनशैली और नाट्य सांस्कृतिक गानों पर थिरकते नजर आए वहीं कांग्रेस विधायक विजय राघवेंद्र सिंह ने कांग्रेस पार्टी की विशेष उपलब्धियां भी बताएं आदिवासी समुदाय के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ जी की घोषणा का भी वाचन किया जिसमें उनके द्वारा बताया गया कि किसी आदिवासी समुदाय के घर में अगर कोई बच्चा पैदा होता है उसे 5 कुंटल गेहूं चावल बड़ा बर्तन और अगर कोई व्यक्ति का स्वर्गवास होता है तो ऐसी स्थिति में भी 5 क्विंटल गेहूं चावल उसके परिवार को दिया जाएगा इसके साथ ही जिन साहूकारों द्वारा आदिवासियों का कुछ सामान गिरवी रखा हुआ है साइकिल मोटरसाइकिल ट्रैक्टर या जेवरात व उन्हें वापस किया जाए और उनका कर्ज माफ किया गया है। इसके साथ ही ₹10000 और एटीएम आदिवासियों को दिया जाएगा जिससे वह साहूकारों के कर्ज से बच सकेंगे आदिवासी दिवस के मौके पर महान क्रांतिकारी आदिवासियों के भगवान बिरसा मुंडा को भी याद किया गया  कटनी शहर अंजुमन इस्लामिया स्कूल से सुभाष चौक होकर रेलवे स्टेशन रोड रैली निकालकर जय भीम जय बिरसा आदिवासी एकता के नारे लगाए गए  इसके साथ ही मेधावी छात्र-छात्राओं को भी प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे विजय राघवेंद्र सिंह बसंत भैया बड़वारा विधायक इसके साथ ही गोंडवाना समाज से सभी जेस्ट श्रेष्ठ कार्यकर्ता 

संजय पाठक फ्रेंड्स ग्रुप से ढीमरखेड़ा अध्यक्ष अब्दुल कादिर खान  जनपद पंचायत से काफी संख्या में लोग पहुंचे ग्राम छाहर से बिशन सिंह बचन सिंह मलखान सिंह जयकरण सिंह वहीं दादरसिहुडी से सहनाम सिंह निरंजन सिंह कोठी से और आसपास के सभी क्षेत्रों से आदिवासी समुदाय से भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही

 आओ जाने बिरसा मुंडा के बारे में लेखक अब्दुल कादिर खान

बिरसा मुंडा का जन्म रांची में हुआ बिरसा मुंडा को आदिवासी अपना भगवान मानते हैं।

 उन्होंने ब्रिटिश सरकार से लड़ने के लिए अपने  समुदाय  को संगठित कर क्रांतिकारी समूह  बनाया और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आंदोलन किया जिसमें 500 लोगों को ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार किया  जिसका नेतृत्व बिरसा मुंडा कर रहे थे। आदिवासियों को अपने हक के लिए लड़ना सिखाया 25 वर्ष की उम्र में शहीद हुए 1857 की क्रांति में बड़ा योगदान रहा शिक्षा के क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा रांची से प्राप्त की आगे की शिक्षा के लिए मिशनरी स्कूल में भेजना पड़ा क्रिश्चियन स्कूलों में खाली क्रिश्चियन बच्चों को ही पढ़ाया जाता था इसको देखते हुए उन्हें क्रिश्चियन धर्म अपनाना पड़ा शिक्षा के दौरान इसाई धर्म अपनाया बाद में इनके पिता ने  स्कूल से निकाल कर  ईसाई धर्म का बहिष्कार किया अपने धर्म वापसी  की ओर नेतृत्व किया स्वतंत्रता हासिल करने के लिए इन्होंने आनंद पांडे से जुड़कर हिंदुत्व हिंदुत्व को समझा और सीखा ऐसे उन्हें दोनों धर्मों के ज्ञान मिले लेकिन आगे बढ़ते हुए उन्होंने अपने रूढ़ीवादी धर्म को ही सर्वश्रेष्ठ मानकर अपने धर्म में वापसी की और स्वतंत्रता सेनानी बने अपने समूह धर्म की जागरूकता फैलाने का भी काम किया ब्रिटिश सरकार ने इनकी मौत का कारण बीमारी बताया ऐसे 25 वर्ष की उम्र में बिरसा मुंडा ने एक इतिहास रचा संसद में आज भी उनकी तस्वीर लगाई जाती है  सभी आदिवासी समुदाय के लिए बिरसा मुंडा आदर्श हैं  


KKK, 24X7 NEWS/कटनी ब्यूरो रिपोर्ट 











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