क्या देश को आवश्यकता है नए सिस्टम की ? विगत दिनों इंदौर में किडनैपिंग की घटना के बाद एक चिंतन

 व्यापार हो,शिक्षा हो,चिकित्सा हो,मानवाधिकार हो या कोई भी ऐसा क्षेत्र जहाँ सुरक्षा की आवश्यकता है या फिर उसमें परिवर्तन की,,,,आये दिन यही खबर की फला स्कूल में बच्चे के साथ दुर्व्यवहार हुवा,या किसी बच्चे का किडनैप हुवा सोशल मीडिया ने एक तरफ जहां इसे जानकारी बनाया तो शातिर लोगो ने इसका दुरुपयोग करना शुरू किया हाल के दिनों में जो किडनैपिंग वाला आडियो जारी हुवा जो कि पूरी तरह फेक था वास्तव में जो भी मैसेज व्हाट्सएप पर डाला जाता है वह इतना रोटेट हो जाता है की पहला संदेश कहां से भेजा गया वह जानना मुश्किल हो जाता है जैसा कि मुझे पता है व्हाट्सएप का जो सरवर है उससे इंफॉर्मेशन ले पाना बहुत ही कठिन काम है क्योंकि उस कंपनी की भी अपनी एक पॉलिसी होती है इसलिए ऐसे मामलों में बहुत एतिहात के साथ कोई भी सूचना आगे बढ़ानी चाहिए ,,,,, आए दिन स्कूल की बसों द्वारा दुर्घटनाएं आम बात हो गई है स्पीड गवर्नर का पालन ना के बराबर होता है स्कूल प्रशासन भी इसके लिए जिम्मेदार हैं उसको संबंधित पालकों की और भी समस्या है वो ट्यूशन फीस हो एक्टिविटी फीस हो स्कूल की कॉपी किताब हो सब मामले में स्कूल प्रबंधन का अप्रत्यक्ष रूप से इंवॉल्वमेंट रहता है जिसके चलते पलकों को मोटी रकम देकर कॉपी किताब खरीदना पड़ती है जो हर साल बदल जाती है इसलिए

वहा स्कूल की ड्रेस से लेकर कॉपी किताब तक सब मे कमीशन बाजी,यही हाल अस्पतालों का है एक डॉक्टर द्वारा लिखी दवा उसके अस्पताल या क्लिनिक के पास ही मिलेगी बल्कि कोई 2 दवा तो शहर के होलसेल मार्केट दवा बाजार में भी नहीं मिलेगी बहुत से मामलों में परिवर्तन संविधान में भी हुए हैं न्यायपालिका में भी हुए हैं मगर इतना ही काफी नहीं है आज किस स्थिति में भारत देश है इससे पूरे विश्व को बहुत संभावना है लेकिन बगैर कठोर कदम के कुछ भी संभव नहीं है आजादी के बाद देश जिस तरह से आगे बढ़ा उसे हम पार्ट वन कह सकते हैं जिस तरह फिल्मों में मध्यांतर होता है उसी प्रकार भारतवर्ष के लिए यह समय अभी तक का पार्ट वन  है ,,,जैसा कि फिल्मों में मध्यांतर बाद क्लाइमेक्स की ओर फिल्म बढ़ती है ,,  चुकी प्रारंभ में फिल्म का ओपनिंग स्लो होती है उसी प्रकार आजादी के बाद देश का विकास स्लो ही रहा हालांकि इसमें कोई बुराई नहीं है मगर आज हालात अलग है देश में आए दिन कई घटनाएं घट रही है जिस पर कोई संज्ञान नहीं लिया जाता फिर 2 दिन बाद नई घटना नया क्षेत्र नया शहर यह बदस्तूर जारी है वह इंदौर हो उन्नाव या कोई भी गांव छोटी बच्चियों के साथ में आये दिन घटनाएं होती रहती है,,,, या फिर कोई भी क्षण दुर्घटना वह वाहन की हो बस की हो ,,,,, चिकित्सा क्षेत्र में भी आए दिन ऐसे लापरवाही भरे हादसे होते रहते हैं मुख्य आरोपी छूट जाता है और भुगतता है एक आम आदमी ही  है जो पैसे से भी कमजोर  है और रुतबे से भी,,, आखिर यह व्यवस्था कब तक चलेगी यह सोचने वाली बात है आने वाले समय में अगर देश को प्रगति करनी है तो पूरे सिस्टम में बदलाव करना पड़ेगा और हमें भी अपनी जिम्मेदारी तय करना होगी ज्यादा से ज्यादा लोगों को हर बात हर मामले में शिक्षित करना होगा साथ ही छोटे से प्रचार के लिए कुछ भी सन्देश वायरल करने से भी मुक्ति पानी होगी क्यो की अभी तो यह शुरुवात ही है✒

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