भोपाल, KKK न्यूज़ 
प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे ने जारी एक बयान में कहा है कि शिवराजसिंह चौहान जी द्वारा स्वतंत्रता सेनानी और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग हतप्रभ करने वाला है । 
हाँ ,पंडित नेहरू को अपराधी मानकर अंग्रेज़ों ने आज़ादी के आंदोलनों में नौ वर्षों तक जेल में रखा। क्या शिवराज सिंह को पंडित नेहरू को अपराधी कहने की प्रेरणा अंग्रेज़ों से मिली है ? 
खैर, कुछ प्रासंगिक प्रश्न आज शिवराजसिंह जी से पूछे जाने चाहिए । 
1) आर्टिकल 370 ( 36a ) का भविष्य देश के तत्कालीन ग्रह मंत्री वल्लभभाई पटेल ने अपने दिल्ली निवास पर 15 - 16 मई 1949 को खुद निर्धारित किया था और भारत का संविधान जब 26 नवंबर 1949 को पारित हुआ और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ तब आर्टिकल 370 उसका अभिन्न हिस्सा था। तब क्या श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने नेहरू केबिनेट के मंत्री के रूप में अपने हस्ताक्षर कर के आर्टिकल 370 को संविधान का हिस्सा नहीं बनाया था ?
तो क्या आप ये आरोप वल्लभभाई जी पटेल और श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी पर भी लगा रहे हैं ? 

2) जम्मू कश्मीर में पीडीपी और भाजपा की साँझा सरकार के न्यूनतम साँझा कार्यक्रम में भाजपा ने स्वीकारा था कि धारा 370 को बरकरार रखेंगे और दो विधान और दो निशान के रहते प्रधानमंत्री जी और आडवाणी जी के सानिध्य में वहाँ शपथ ली गई । 
तो आपके इस अभद्र आरोप से हम क्या समझें ? 

3) शिवराज जी,  19 जनवरी 1990 को सुबह कश्मीर के प्रत्येक हिन्दू घर पर एक नोट चिपका हुआ मिला, जिस पर लिखा था- "कश्मीर छोड़ के नहीं गए तो मारे जाओगे।"
और फिर पंडित भाइयों का क़त्लेआम हुआ तब केंद्र में विश्वनाथ प्रतापसिंह की राष्ट्रीय मोर्चे (146 सीटें) और भाजपा (86 सीटें ) की साँझा सरकार थी जिसने जगमोहन ( भाजपा के वरिष्ठ नेता ) को गवर्नर नियुक्त किया था । अर्थात केंद्र और राज्य में आपकी सरकार के रहते पंडित भाइयों का कत्लेआम हुआ तब आप किसको अपराधी ठहराएंगे ? 

4) शिवराजसिंह जी ,1994 में देश की संसद ने सामूहिक प्रस्ताव पारित कर के पाक के कब्जे वाले कश्मीर पर हिंदुस्तान का अधिकार जताया था । आज उस हिस्से पर बीते पाँच सालों से चाइना अपने इकोनॉमिक कॉरिडोर को आकार दे रहा है और केंद्र की भाजपा सरकार विरोध का एक स्वर भी नहीं निकाल रही है,  तो आप फिर किसको अपराधी ठहराएंगे? 
शिवराज जी ,जब भी आप देश के मूर्धन्य नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू , वल्लभभाई पटेल , श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी को पढ़ेंगे तो एक बात स्पष्ट होगी कि वैचारिक मतभिन्नता के बावजूद वे लोग एक दूसरे के दृष्टिकोण का आदर करते थे। अभद्र भाषा तो बहुत दूर की बात है । 
अतः शिवराज जी ,आप सभी वरिष्ठ नेताओं से आग्रह है कि समालोचना करें, मगर भाषा की मर्यादा को लाँघ कर नहीं , 
अन्यथा भावी पीढ़ी आप लोगों से क्या प्रेरणा ले पाएगी ?

अंततः ,शिवराजसिंह चौहान जी, मैं जल्द ही आपको सारे प्रमाणों के साथ विस्तार से एक पत्र लिखूँगा जम्मू कश्मीर के इतिहास पर और आर्टिकल 370 पर कि कैसे जम्मू कश्मीर का 26 अक्टूबर 1947 में एक्सेशन हुआ। 
जब 5 मार्च 1948 को राजा हरिसिंह ने दो विधान 2 निशान तय किए, जब 15 - 16 मई 1949 को वल्लभभाई पटेल ने आर्टिकल 370 तय किया या जब भारत के संविधान में आर्टिकल 370 आया तब श्यामाप्रसाद मुखर्जी कैबिनेट के मंत्री थे और उन्होंने संविधान पर अपनी सहमति की मोहर लगाई थी ।
पंडित नेहरू और वल्लभभाई पटेल के अथक प्रयासों का ही परिणाम था कि आज जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।
इन ऐतिहासिक तथ्यों के अभाव में शायद आप यह सब कह गए  जो आपको शोभा नहीं देता।

संजय श्रीवास्तव
सह स्थायी मंत्री
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