न्यूनतम मजदूरी भी देने में असमर्थ योगी सरकार 

--बेसिक शिक्षा विभाग का मामला।

---तहरी मतलब केवल पीला चावल।

    प्रयागराज जनपद के तहसील करछना अंतर्गत बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालय करछना प्रथम व द्वितीय में कार्यरत रसोइयों को न्यूनतम वेतनमान भी देने में योगी सरकार असमर्थ है तो यहां अध्ययनरत विद्यार्थी व स्टाफ तहरीर का मतलब केवल पीला चावल ही समझते हैं। जानकारी के अनुसार उ0प्र0 की जनप्रिय योगी सरकार निर्धारित न्यूनतम वेतनमान व न्यूनतम मजदूरी के भुगतान के प्रति सजग है परन्तु आज प्रयागराज जनपद के तहसील करछना के एसडीएम कोर्ट से सटे  प्राथमिक विद्यालय करछना प्रथम व द्वितीय में इसका विपरीत उदाहरण मिला। दोनो ही विद्यालयों के रसोइयों ने सार्वजनिक रूप से बताया कि उन्हें केवल रु0 एक हजार प्रति माह की दर से ही मानदेय वह भी कई महीनों के बाद मिलता है। इस प्रकार बेसिक शिक्षा विभाग के रसोइयों को मात्र तैंतीस रु0 तैंतीस पैसे प्रतिदिन का भुगतान मिलता है। यह घोर आश्चर्यजनक है कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में मात्र रु0 33.33 प्रतिदिन में एक परिवार अपना गुजारा कैसे कर सकता है? यहां के प्राथमिक विद्यालय प्रथम के रसोइये शांति देवी व निर्मला के वक्तव्य से यह भी प्रतीत हुआ कि उन्हें मानदेय के अलावा कुछ नही पता जिससे यह स्पष्ट होता है कि शायद वह किसी अन्य के स्थान पर कार्य कर रही हैं। इस विद्यालय में रसोइयों द्वारा उत्तम स्तर की स्वच्छता व्यवस्था मिली जिसमे प्रधानाध्यापक धनन्जय सिंह का सहयोग सराहनीय बताया गया जबकि प्राथमिक विद्यालय द्वितीय में सफाई के नाम पर सब कुछ अस्त व्यस्त मिला। इन दोनों ही विद्यालयों में मीनू के हिसाब से आज तहरी व दूध की व्यवस्था होनी चाहिए थी परन्तु विद्यार्थियों को तहरी के नाम पर उबला हुआ मात्र पीला चावल ही मिला था जबकि दूध के एक बूंद का भी दर्शन नही हुआ। सम्भवतः यहां के विद्यार्थी व स्टाफ तहरी का मतलब केवल पीला चावल ही समझते हैं। प्राथमिक विद्यालय द्वितीय की प्रधानाध्यापिका विनती गुप्ता आज अवकाश पर थीं। यद्द्पि यह विद्यालय बीआरसी पर ही है जहां स्वयं खण्ड शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव का कार्यालय है परन्तु स्वच्छता नाम की कोई चीज यहां नही दिखी व खुद खण्ड शिक्षा अधिकारी के बारे में लोग कोई जानकारी नही दे सके। यहां मध्यान्ह भोजन के समय कुल 38 विद्यार्थी उपस्थित मिले। यहां उपस्थित इंचार्ज कृष्ना सिंह का स्टाफ व विद्यार्थियों के प्रति काफी सहयोगात्मक रवैया देखने को मिला। फिलहाल के लिए बड़ा सवाल यह है कि खुद वीआईपी व्यवस्था व लाखों की व्यवस्था से भी सन्तुष्ट न रहने वाले अधिकारीगण व जनप्रिय योगी सरकार क्या इन रसोइयों के लिए कम से कम निर्धारित न्यूनतम वेतनमान की समयबद्ध व्यवस्था बना सकेंगे?





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