पिछले दो दिन से सीसीडी के सिद्दार्थ का मुद्दा छाया हुआ है । समझिए यह है क्या?

जरूरत से ज्यादा ऋण लेना,बैंको से व PE (प्राइवेट इक्विटी, जो दरअसल जनता को बेवकूफ बनाने के लिए ही नाम दिया गया बहुत सारे PE इसे देते महंगे ब्याज के ऋण के रूप में ही है)

 इस सुसाइड का कारण बना। विगत वर्षों में उद्योगपतियों ने व ज्यादातर लोगों ने उधार  लेकर realestate में इन्वेस्ट किया , इसमें पहले2012 तक पैसा बन रहा था।अब उन प्रॉपर्टी को कोई खरीददार नहीं है। unproductive  एसेट ,होने से अब ब्याज चुकाना भी भारी पड़ रहा है।इसके लिए खातों में ,आयकर संबंधी हेरफेरियाँ की जाती है। अब उन हेरफेरियाँ को भी पकड़ा जा रहा है तो ऐसे dishonest इंडस्ट्रियल लोगों के पास बहुत कम विकल्प बचता है।हाथ खड़े करने के बाद सारा चुना बैंको व वित्तीय संस्थानों को लग रहा है।इंडिरेक्टली ये  आम जनता के द्वारा टैक्स का पैसा है जो सरकार बैंको को मजबूत करने के लिए लगातार दे रही है। सिद्धार्थ में थोड़ी बहुत नेकी/शर्म बाकी थी सो उसने आत्म हत्या करली।बाकी वीडियोकॉन, एस्सार, भूषण और सैंकड़ो नाम ऐसे है जो सामने आने वाले है जिन्होंने देश को लूटा है। ऐसे सभी मामले बिज़नेस मॉडल फैल होने वाले नहीं है। ये सभी हेराफेरी के मामले है। ऐसे फैल बिज़नेस को  किसी भी प्रमोटर को महंगी गाड़ियों , हवाई जहाज से नीचे नही पाएंगे। आज भी उनके ठाट बाट में कोई कमी नही, अभी भी बच्चो की शादी 5 -7 स्टार होटल में ही होती है। दुखी व लॉस में है तो आम जनता।क्योंकि इन खराब खातों में ब्याज नही मिलने व loss की वजह से बैंक रिटेल व छोटे ऋणियों से ब्याज ज्यादा ले रहे हैं। आम जमाकर्ता  सीनियर सिटीजन को उनकी जमाओं पर ब्याज कम दे रहे हैं।यदि ऐसे खराब NPA खाते  न हो तो छोटे ऋणों पर ब्याज दर 2 %कम हो सकती है। जमाओं पर 2% बढ़ सकती है। हमारे उद्योगपति व उनके संगठन विदेशों में ब्याज दर कम होने की बात करते व यहां ब्याज घटाने की बात करते है। लेकिन यह नही बताते की की वहां NPA ,1से 2%भी नहीं है। वहां उद्योगपति बेईमान नहीं है, हेरफेरी कर टैक्स  चोरी कर बड़ा  नहीं  बना ।वह ऑनेस्ट बिज़नेस कर बड़ा बना है बिज़नेस बढ़ाया है।जहां बैंको के 15 से 20 प्रतिशत ऋणों पर NPA  होने से ब्याज नहीं  मिल रहा हो, और लगभग 7  लाख करोड़ हानि का प्रोविज़न पूर्व वर्षों के लाभ में से करना पड़ाहै तो बैंको की ऋण देने व सस्ता ऋण देने और जमाओं पर उचित ब्याज देने की क्षमताओं पर  विपरीत असर पड़ा है। सही माने  में तो इसका नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है।बैंककर्मियों का वेतन नहीं बढ़ाया जा रहा है।सरकार कहती है कि बैंको में वेतन बढ़ाने के लिए लाभ नहीं है।आमधारणा की बैंको में वेतन बहुत अधिक है, के विपरीत सच  जिसे जानकर ताज्जुब होगा कि बैंक में लगे नए अफसर का  वेतन सरकारी विद्यालय में लगने वाले तृतीय श्रेणी के अध्यापक का 65% ही होता है।सभी बिज़नेस व अन्य न्यूज़ चैनल सिद्धार्थ के पत्र के वो अंश दिखा कर सरकार को कोस रहें है,  जिसमे आयकर के बड़े अधिकारी की छानबीन से परेशानी जा जिक्र किया।उस बात पर चर्चा नही कर रहे जो उसी पत्र में उसने लिखा कि खातों में बहुत सारे ट्रांसक्शन की जानकारी उसके अलावा कंपनी के बोर्ड, अधिकारियों व ऑडिटर्स को नहीं है।मृत आत्मा के साथ सम्मान दर्शाते हुए व परिवार के साथ सहानुभूति के साथ यह कटु सत्य सामने है कि हेराफेरियो का व बैंको के अलावाअन्य संस्थानों से  लिए गए ऋण  व तथाकथित PE फण्ड का दबाव न झेल पाने, व अभी भी उनमें थोड़ी ईमानदारी का अंश बचा होने से ये घटना हुई।

बैंको एवम राष्ट्रीय सम्पत्ती का दोहन हुआ है, वोट उगाहने में और अब सार्वजनिक क्षेत्र को कुछ घरानों की  निजिकम्पनि को बेचा जा रहा है।

सरकार को आयकर में चोरी पकड़ने में  कड़ाई करने की याद आती है!

एक ऐसा आदमी जिंसने हजारों गरीबों को रोजगार दिया हो उसको बचाने की नहीं।।

मीडिया को उन उद्योगपतियों को सलाह देना चाहिए जिन्होंने ऋण का उपयोग बिज़नेस के अलावा  *अन्य purpose* के लिए किया है। देश व जनता के साथ धोखा किया है।

 *क्या कारण है कि अम्बानी अडानी का कर्ज माफ हुआ जेट एवम कॉफी डे का नहीं?* 

 *पिछले 10 -15 वर्षों में गलत दिशा में RBI, सरकार व बैंको की loan देने की नीतियों का यह परिणाम है।* 

वर्तमान में भी सरकारों द्वारा   ऋणमाफी, मुद्रा ऋणों ,

59 मिनट में 1 करोड़ के ऋणों का राजनीतिक उपयोग , रही सही बैंको की हालत व सम्पूर्ण अर्थतंत्र केदीर्घावधि के  लिए गंभीर खतरा है। 

 *गृहमंत्री जी के बयान थे कि किसानों के कर्ज माफ नही करेंगे, उद्योगपतिओं के कर्ज माफ करेंगे। क्या ये केवल अडानी अम्बानी के लिए था?* 

जिसमे सीधा सीधा नुकसान जैसा कि मैंने ऊपर बताया है , आम जनता का ही है।

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