जब हाईकोर्ट के एडवोकेट ने कहा कि क्षेत्रीय भाषा के तौर पर विकसित हो पचेली लोकभाषा 

कलयुग की कलम (अंकित झारिया रिपोर्टर)

उमरियापान:- उमरियापान के व्योहार मोहल्ला स्थित हनुमान मंदिर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् इकाई जबलपुर के द्वारा रविवार को पचेली लोकभाषा पर केन्द्रित विशाल साहित्यिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम मप्र लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विपिन बिहारी व्योहार के मुख्य आतिथ्य और अखिल भारतीय साहित्य परिषद् प्रदेश उपाध्यक्ष शरद अग्रवाल की अध्यक्षता में हुआ। इस दौरान कार्यक्रम की शुरूआत माँ सरस्वती के पूजन से हुईं। हिंदी बुंदेली और उर्दू भाषा की कवियित्री छाया नर्गिस ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया।इस दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एडवोकेट राजेश तिवारी ने कहा की क्षेत्रीय भाषा के तौर पर पचेली लोकभाषा को विकसित करने की आवश्यकता है।इस क्षेत्र की प्रतिभाओं का सम्मान करने एवं उनके द्वारा किए गए कार्यों को भावी पीढ़ी के समक्ष रखने की जरूरत है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एमपीपीएससी पूर्व चेयरमैन डॉ विपिन बिहारी व्योहार ने पचेली लोकभाषा में उद्बोधन देते हुए कहा कि इसी भाषा में साहित्य लिखे जाने की जरूरत है। उन्होंने उमरियापान के छात्र शुभांशु चौरसिया का उल्लेख करते हुए कहा कि  यूपीएससी इंजीनियरिंग सर्विसेस जैसी राज्य स्तर पर कई परीक्षाओं में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया है। समाज और क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। कवि राजा चौरसिया ने पचेली लोकभाषा में कई उदाहरण देते हुए इस भाषा की पीड़ा को सामने रखा। इसके अलावा भोपाल, जबलपुर,कटनी सहित अन्य स्थानों से पहुंचे साहित्यकारों ने उद्बोधन देते हुए अपनी-अपनी बात रखी। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर कौशल दुबे ने किया। इस दौरान अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संभागीय अध्यक्ष राज सागरी, सेवानिवृत्त शिक्षक सीएल शुक्ला, रमाशंकर खरे,राजेंद्र अग्रवाल, दुर्गा प्रसाद पाठक,राजेंद्र सिंह ठाकुर, रमेश कुमार धुर्वे,मिथिलेश बर्मन, चौधरी द्वारका प्रसाद,अटल बिहारी, व्योहार,राजेश व्योहार, निरंजन द्विवेदी, जितेंद्र चौधरी, परशुराम मिश्रा,सुभाष चौरसिया,प्रदीप ताम्रकार,रविन्द्र गर्ग, शशिकांत चौरसिया,दीपचंद यादव,अदिति व्योहार,राधा व्योहार,महेन्द्र सिंह पटेल, के के चौरसिया सहित बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही।

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