कड़वा सच,,,,,,,,,

जिस दिन देश के नेताओ को व जनता द्वारा चुने हुए लोगो को अनिवार्य रूप से सख्त नियम बना दिये जायें की उनको मिलने वाले वेतन भत्ते  vip कल्चर पेंसन सुरक्षा आदि आदि नही दिए जाएंगे ,,

जो देश समाज की सेवा का ढिढोरा पीटते है राजनीति को व्यापार बना रक्खे है जाती धर्म को बांट कर वोट बैंक की राजनीति कर अपना  उल्लू सीधा करके भोली भाली जनता को वेवकूफ बना के राजनीति करने का उद्दोग व्यापार बना रक्खे है जिनको आम जनता की परेशानियों सुविधाओ विकाश से कोई सरोकार नही केवल अपना विकाश राजनीति में करना ही मात्र उद्देश्य बना लिया है उक्त कायदे कानून के दायरे में ही चुनाव लड़कर देश व समाजसेवा कर सकते है तब पता चलेगा कि सच्चे समाज सुधारक देश भक्क्त जनसेवक कौन कौन है इस देश मे जनता की गाड़ी कमाई का 35 प्रतिशत नेताओ व उनके आकाओ के पास जाता है 35 प्रतिशत इस देश के नोकर शाहों व उनके निचले स्तर के नोकर सहो की जेब मे जाता है बचे 30 प्रतिशत में विकाश उन्नति देश की कैसे संभव हो सकती है ,,,,

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