गाय पर राजनीति करके नेता बन जाना आम बात है

स्लीमनाबाद/आशीष हल्दकार:-

गाय पर राजनीति करके नेता बन जाना  एक आम बात है लेकिन गाय को माता कहने वाले न नेता जी माता की  रक्षा नही कर पा रहे है आपको बता दे कि ये नजारा स्लीमनाबाद समीप तेवरी में आने के लिए  रात्रि साढ़े ग्यारह बजे मेरे घर के सामने का नजारा है,जिसमें आप तकरीबन दो दर्जन से अधिक गौमाताओं को सड़क पर असहाय और निरीह बैठा हुआ देख सकते हैं। मैं जानता हूँ कि ये दृश्य आपके लिए कोई नया नहीं होगा और आप भी रोजाना ऐसे नजारों से रूबरू होते ही होंगें लेकिन क्या आपको पता है कि ये गायें न सिर्फ असहाय होती हैं,बल्कि भूखी और प्यासी भी होतीं हैं,जिन्हें इनके मालिक दूध निकालने के बाद यूँ ही आवारा सड़कों पर मरने के लिए छोड़ देते हैं। आपको पता होना चाहिए कि इन गायों के मालिकों में अनेकों ऐसे भी अवश्य होंगें जिनके लड़के और पोते फेसबुक में कट्टर हिन्दू,गौरक्षक,गौसेवक,देशभक्त और चौकीदार जैसी उपमाएँ लगाकर घूम रहे हैं। इनमें से कई तो गौरक्षा मंच,गौसेवा समिति,भारत रक्षा समिति,हिन्दू बचाओ समिति,हिन्दू वाहिनी जैसे संगठनों के मंत्री,महामंत्री,उपाध्यक्ष,अध्यक्ष भी होंगें और इनकी दुपहिया वाहनों पर ये पदनाम शोभायमान भी हो रहा होगा।। ऐसे ही कुछ लोगों ने पिछले कुछ सालों में महज गायों को ले जा रहे लोगों की हत्याएं तक कर दी हैं,जिन्हें धर्म की रक्षा समझकर न्यायोचित भी ठहराया गया है।। अफसोस,,इनमें से एक भी राष्ट्रभक्त या गौभक्त इन माताओं को बचाने घरों से आज तक नहीं निकला।। मैं सफर के दौरान अक्सर ट्रक या बस की टक्कर से सड़कों पर पड़े गौमाताओं के क्षत विक्षत शरीरों को देखता हूँ तो सोचता हूँ कि या तो इस देश में इन्हें माँ कहना बन्द कर दिया जाए या फिर इन मांओं के लिए आसरे सुनिश्चित कर दिए जाएं।। सोशल मीडिया में देश,धर्म,गाय और राम की ठेकेदारी करने वाले लफंटूशों से मैं किसी बहस में नहीं पड़ना चाहता लेकिन सत्ता और प्रशासनिक पदों में आरूढ़ लोगों से निवेदन जरूर करना चाहूंगा कि इस विकट और गंभीर परिस्थितियों पर ध्यान दें और ऐसे गौपालकों पर कठोरतम कार्यवाही करें।

Share To:

Post A Comment: