“संतों पर अशोभनीय टिप्पणी भाजपा के बगुलाभगत नेताओं के संस्कार “

“पत्रकारों की क्या औक़ात ये शब्द बोलने वाले आचरण की बात करते शोभा नही देते”

KKK 24X7.NEWS /भोपाल 

म.प्र.कॉंग्रेस कमेटी के प्रदेशसचिव राकेश सिंह यादव ने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को संकीर्ण मानसिकता का बताया हैं।म.प्र.में सत्ता से बेदखल होने के बाद माननीय मुख्यमंत्री कमलनाथ जी द्वारा किये जा रहे विकास कार्यों की गति से भाजपा के नेताओं का मानसिक संतुलन हिल गया हैं। आज भोपाल में आयोजित संतों के समागम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कमलनाथ जी पर अशोभनीय टिप्पणी करके संतों के साथ म.प्र. की धर्मप्रेमी जनता का भी अपमान कर रहे हैं।सामान्य शिष्टाचार के साथ बैठना कैलाश विजयवर्गीय की नज़र में संतों को जूता दिखाना दिखता हैं तो इन्हें अपने चश्मे के नम्बर की जॉंच कराना चाहिए।कैलाश विजयवर्गीय की फ़ेसबुक पोस्ट को अगर भूलव़श सही माने,जो की माननीय मुख्यमंत्री के खिलाफ की हैं तो यह फेसबुक पोस्ट में जो की इनकी ही फ़ेसबुक पर पोस्ट हैं इसमें केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ठीक इसी प्रकार मंच पर आसीन हैं जिस तरह मुख्यमंत्री कमलनाथ जी बैठे हैं तो कैलाश विजयवर्गीय के चश्मों से केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह गृहमंत्री अमित शाह को जूता दिखा रहे हैं।अब क्या करेंगे कैलाश विजयवर्गीय जी क्या केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह को भी फेसबुक पोस्ट  करके कहेंगे की गृहमंत्री अमित शाह को जूता दिखा रहे हैं। इसमें ही लालकृष्ण आडवानी जी भी ठीक उसी तरह बैठे हैं जिस तरह मुख्यमंत्री कमलनाथ जी संत समागम में बैठे हैं अब कैलाश विजयवर्गीय की फेसबुक पोस्ट को सही माने तो आडवानी जी प्रधानमंत्री मोदी जी को जूता दिखा रहे हैं।

अब क्या सलाह देंगे कैलाश विजयवर्गीय आडवानी जी को...?

ये कहावत साबित होती हैं “नाच न आये तो आँगन टेढ़ा “

कैलाश विजयवर्गीय का हमेशा दोहरा चरित्र रहा हैं ,राजनैतिक फ़ायदे के लिए संतों का उपयोग करके म.प्र.की जनता को 15 साल छला हैं।आज कॉंग्रेस के साथ संतों का आर्शिवाद देखकर बौखलाहट में इस तरह के अमर्यादित भाषा का उपयोग करके म.प्र. की जनता और संतों तथा मुख्यमंत्री का अपमान करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।कैलाश विजयवर्गीय को नही भुलना चाहिए की मुख्यमंत्री कमलनाथ जी उनके भी मुख्यमंत्री हैं क्योंकि कैलाश विजयवर्गीय भी म.प्र. के मतदाता हैं एंव साढ़े सात करोड़ मतदाताओं में शामिल हैं। कॉंग्रेस ने हमेशा संतों का सम्मान किया हैं लेकिन भाजपा की तरह संतों का उपयोग करके दूध में से मख्खी की तरह निकाल कर नही फेंका ।ऐसा करना सिर्फ भाजपा का चरित्र हैं जो जगज़ाहिर हैं। संतों एंव माननीय मुख्यमंत्री पर अशोभनीय टिप्पणी के लिए कैलाश विजयवर्गीय को माफ़ी मॉंगना चाहिए।राजनैतिक महत्वाकांक्षा में संतों एंव धर्म का अपमान करके अपनी राजनीति को हल्के स्तर पर न ले जाना ही भाजपा कासिद्धान्त हैं।

राकेश सिंह यादव
प्रदेशसचिव
म.प्र.कॉंग्रेस कमेटी
भोपाल
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