मेरे देश का क़्या होगा देश को  बनाने और बिगाड़ने में इलॉटर्निकनिक मीडिया का हाँथ 

यार मेरे समझ नहीं आ रहा है।


देश का मीडिया कितना गिरेगा
जो सवाल? सत्ता धारी पार्टी से पूंछना। चाहिए तो विपक्ष से पूंछ रहे हैं।


कोई देश मे दुर्घटना या गलत होता तो जो दुनिया छोड़के चले गए उन्हे दोसी बताया जा रहा है।

देश के मुल्य मुद्दों की बात ही नहीं हो रही है ।

मीडिया के खिलाफ आंदोलन की तैयारी की जाए अब  क्योंकि कलमकार अपनी ताकत भूल गए हैं और अपने कार्यों से भटक चुके हैं जिम्मेदारियों का एहसास बाकी नहीं रहा

खाली पेट है ।जनता गरीब परिवार किसानों की हालत खराब हैं।

हर तरफ असुरक्षित माहौल नजर आ रहा है।

बदहाल कानून विवस्था और शासकों का आग मूतना  प्रत्यक्ष देखा जा सकता है।

कहीं बलात्कार कहीं  भ्रष्टाचार  तो कहीं गुंडागर्दी

सबसे बड़ा विकास  पाकिस्तान की गरीबी बेकरी मक्कारी दिखाने से नहीं

हिंदुस्तान के विकाश को नया आयाम देने से आएगा ।

बेरोजगारी खत्म करने से आएगा
 शिक्षा स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था  को बनाने से आयेगा।

कानून व्यवस्था को सुधारने से आएगा ।

रात दिन बस राजनेताओं की तारीफ़ों औऱ यात्राओं की बात कर रही हैं मीडिया।

कुछ चैनल तो सम्प्रदायक वातावरण बनाने पर ही करते है विसवास ।


हर समय हिन्दू मुस्लिम दलितों आदिवासियों को अलग अलग बताने की कोशिश में लगे रहती है मीडिया।
  मीडिया को अपनी जिम्मेदारी पर वापस लाने की आवश्यकता है क्योंकि कलम के सिपाही का जो दायित्व है वह अगर सही तरीके से अपने दायित्व का पालन करना शुरू कर दें तो देश के अंदर एक नया इंकलाब आएगा
लेखक✍🏻
अब्दुल कादिर खान
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