क्या भविष्य में स्वतंत्र पत्रकारिता संभव है

नागरिकों के हित में और सरकारी गड़बड़ी के खिलाफ खबरें लिखने और दिखाने पर मीडिया कर्मियों पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है, सत्ता में बैठे लोग मीडिया को सिर्फ अपने प्रचार प्रसार का माध्यम समझते हैं, इस कठोर समय में पत्रकार संगठनों की भी आवाज कमजोर पड़ रही है, ऐसे में सत्ता से सवाल करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता जा रहा है, जिले में काम कर रहे संवाददाताओं पर स्थानीय प्रशासन दबाव बनाकर खबरें रुकवाने की कोशिश कर रहा है ,ऐसे में कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं, क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था बिना सशक्त मीडिया के संभव है, प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पत्रकारों के खिलाफ कार्यवाही की खबरें आ रही हैं लेकिन दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही क्यों नहीं हो रही ऐसे हालात में क्या भविष्य में स्वतंत्र पत्रकारिता संभव है


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