NRC

बहिष्कृत का भाग्य

अब जब NRC कि प्रक्रिया समाप्त हो गई है, तो हम उन 19 लाख लोगों के साथ क्या कर रहे हैं जो बचे हुए हैं? 

समस्या यह है कि उनके भाग्य का फैसला विदेशी मसलों/नागरिकों के न्यायाधिकरणों/अधिकरणों द्वारा किया जाएगा जिनमें परिपक्व और न्यायिक रूप से प्रशिक्षित सदस्यों की कमी हैं और जो अब तक सीमा पुलिस की रिपोर्टों पर निर्भर हो चुके हैं।

न्यायपालिका के उच्च पीठों में अपील का एक विकल्प बहिष्कृत लोगों के लिए मौजूद है, लेकिन वह प्रक्रिया महंगी और कभी-कभी अत्यंत महंगी होने की संभावना है। सरकार ने कानूनी सहायता का वादा किया है लेकिन हमें प्रतीक्षा करनी होगी और देखना होगा कि क्या यह निष्पक्ष रूप से किया गया है।

इन अपीलों के समाप्त हो जाने के बाद, उनमें से अधिकांश गरीब और असहाय लोगों के भाग्य का क्या होगा? उन्हें निर्वासित करना एक विकल्प नहीं है। 

हालांकि, असम के कई लोग, एक ऐसे स्थान में रह रहे हैं, जो अभी भी अविकसित हैं। ऐसे में वे इस प्रकार का बोझ उठाने के लिए तैयार नहीं हैं, जब वार्षिक बाढ़ के कारण उनका अपना जीवन बहुत मुश्किल से कट रहा है। प्राकृतिक संसाधनों का सूखना और गला काट प्रतियोगिता तो है ही।

उन्होंने जो भी राजनीतिक शक्ति प्राप्त की है, वे उसे खोने से डरते हैं। 

NRC की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद छूटे हुए लोगों का पुनर्वास करना और उनकी देखभाल करना केंद्र की जिम्मेदारी है। 

इस बीच, संगठन, जागरूकता, धैर्य और अफवाहों और भड़काऊ बयानबाजी का खामियाजा उठाने से बचकर ही असमिया अपना भविष्य देख सकतें है।

लेकिन हम इस बात से मुह नही मोड़ सकते कि उनको मदद की जरूरत है।

हम खुद को क्षमा नही कर पाएंगे।।

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