बारिश से बर्बाद हुई फसल कुदरत के  कहर से किसान रोया खून के आंसू

KKK न्यूज़ रिपोर्टर
          नैनी
      सुभाष चंद्र

प्रयागराज  कुदरत के कहर से अन्नदाता कहा जाने वाला किसान अब खून के आंसू रोने पर विवश है। उसके माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह से नष्ट हो गया। इसे कुदरत का कहर ही कहें या विधि का विधान। पिछले कई दिनों से झमाझम हो रही बारिश से लोगों को जहां गर्मी से राहत तो मिली थी। मगर इस बारिश में अन्नदाता कहे जाने वाले किसान खून के आंसू रोने पर विवश हैं। बारिश के कहर से किसानों के खेतों में खड़ी  तिला और बाजरा की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है बुद्धिजीवियों की माने तो सितंबर के आखिरी सप्ताह में हल्की-फुल्की सर्दी शुरू हो जाती थी। बरसात मानो पूरी तरह से चली जाती थी इस बार तो इंद्रदेव की नाराजगी दूर होती नहीं दिख रही है। लगातार हो रही बारिश से जानवर और पशु पक्षी ही नहीं आम जनमानस का हाल बेहाल है। जगह-जगह कीचड़ और जलभराव के कारण डेंगू और बुखार जैसी खतरनाक बीमारियां फैल रही है। लगातार हो रही बारिश के चलते तिला और बाजरा की फसल तो बर्बाद हो ही गई। वही किसान आलू और सरसों के लिए खेत की तैयारी नहीं कर पा रहा है। फसल बर्बाद  हो गया बारिश का कहर यूं ही जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं है। जब अन्नदाता कहा जाने वाला किसान दाने-दाने को मोहताज हो जायेगा ।



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